रामनगर। कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम सुनते ही रोमांच, रहस्य और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम आँखों के सामने उभर आता है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह खबर किसी तोहफे से कम नहीं है कि देश-विदेश के पर्यटकों का सबसे पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र ढिकाला जोन अब अपने पूरे वैभव के साथ 15 नवंबर से फिर से खुलने जा रहा है। मानसून के दौरान बंद रहने के बाद अब इस जोन को पर्यटकों के लिए खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पार्क प्रशासन ने सड़कों की मरम्मत, वन सुरक्षा गश्त और रिहायशी विश्राम गृहों की साज-सज्जा का कार्य समय से पहले पूरा कर लिया है। इसके साथ ही ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है, जिससे देश और विदेश से आने वाले पर्यटक अपने सफारी और रात्रि विश्राम की बुकिंग आसानी से करा सकते हैं।
ढिकाला जोन की खासियत यह है कि यहां प्राकृतिक वातावरण अपने सबसे शुद्ध रूप में दिखाई देता है। मानसून सत्र में हर साल 15 जून से मध्य नवंबर तक इसे बंद किया जाता है, ताकि वन विभाग सड़क सुधार और रखरखाव का कार्य सुचारू रूप से पूरा कर सके। अब जब मौसम सुहावना हो चला है और जंगल फिर से अपनी हरियाली से सराबोर है, तो इसे खोले जाने की घोषणा ने पर्यटकों में उत्साह भर दिया है। पार्क प्रशासन के मुताबिक, इस बार बुकिंग की रफ्तार बीते वर्षों की तुलना में काफी तेज़ है। ढिकाला जोन को कॉर्बेट पार्क का सबसे प्रमुख और आकर्षक भाग माना जाता है, जहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, हिरण, सांभर और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों का दीदार पर्यटक खुली आंखों से कर सकते हैं।
जंगल सफारी का रोमांच हर किसी के दिल में अलग जगह रखता है। सुबह की धूप जब पेड़ों की पत्तियों से छनकर आती है और हवा में साल के पेड़ों की खुशबू घुल जाती है, तब यह अनुभव किसी सपने से कम नहीं होता। वहीं शाम की सफारी में ढलते सूरज के साथ जंगल का रंग और रहस्यमय हो जाता है। पर्यटकों को सुबह और शाम दो समय में सफारी की अनुमति दी जाएगी। वहीं रात्रि विश्राम के लिए केवल उन्हीं विश्राम गृहों में ठहरने की अनुमति होगी, जिन्हें वन विभाग ने अधिकृत किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप को भी सीमित रखना है।

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक ने बताया कि इस बार पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। गाइडों और ड्राइवरों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे न केवल वन्यजीवों की जानकारी दे सकें बल्कि पर्यटकों को सुरक्षित तरीके से जंगल का अनुभव करवा सकें। साथ ही गश्त और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। पार्क में प्रवेश से पहले प्रत्येक वाहन की जांच और परमिट की पुष्टि अनिवार्य की गई है, जिससे किसी भी अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाई जा सके। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रामगंगा नदी के किनारे बसा ढिकाला जोन अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। घने साल के जंगल, हरे-भरे घास के मैदान और पक्षियों की मधुर चहचहाहट यहां आने वाले हर पर्यटक के दिल को छू लेती है। सूर्याेदय के समय जब जंगल सुनहरी रोशनी में नहाता है, या फिर सूर्यास्त के समय जब आसमान लालिमा से भर जाता है, तो वह दृश्य किसी चित्रकार की कूची से बनी उत्कृष्ट रचना जैसा प्रतीत होता है। यही वजह है कि जो एक बार ढिकाला आता है, वह दोबारा लौटने से खुद को रोक नहीं पाता। यहां की शांति और प्राकृतिक वैभव हर बार नए रूप में सामने आते हैं।
पर्यटकों की सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि 15 नवंबर से कॉर्बेट नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम की सुविधा भी पुनः शुरू की जा रही है। इस सुविधा के तहत पर्यटक अब न केवल दिन में जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे, बल्कि रात के समय जंगल के बीच स्थित विश्राम गृहों में ठहरकर प्रकृति की धड़कन को महसूस कर पाएंगे। यह अनुभव उन लोगों के लिए बेहद खास होगा जो शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के सान्निध्य में सुकून तलाशते हैं। यह सुविधा ढिकाला, बिजरानी और झिरना पर्यटन जोनों में उपलब्ध होगी, जहां पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से अपना आरक्षण करा सकते हैं।

वन विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पर्यटक गाइड, वाहन चालक, होटल संचालक और स्थानीय व्यापारी सभी को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ेगी, क्योंकि इस क्षेत्र में हर साल हजारों लोग देश और विदेश से प्रकृति का यह अद्भुत सौंदर्य देखने आते हैं।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस सर्द मौसम में कुमाऊं की वादियों का यह जंगल एक बार फिर जीवंत हो उठा है। बाघों की दहाड़, पक्षियों की पुकार और साल के वृक्षों की महक के बीच, 15 नवंबर से शुरू होने जा रहा यह सफारी सीजन पर्यटकों के लिए एक अनोखा रोमांच लेकर आ रहा है। जो लोग सच्चे अर्थों में प्रकृति और वन्यजीवों से प्रेम करते हैं, उनके लिए ढिकाला जोन का यह अनुभव एक यादगार अध्याय बन जाएगा।



