काशीपुर। केडीएफ आर्चरी एवं अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र के मैदान में आयोजित वार्षिक खेल मिलन समारोह ने पूरे क्षेत्र में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बना दिया। इस अवसर पर बच्चों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान आर्चरी कोच हेम चंद हरबोला ने आयोजन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि केडीएफ ने इस क्षेत्र में आर्चरी जैसे महत्वपूर्ण खेल को लाने का साहसिक और सराहनीय प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे रीजन में अब तक आर्चरी जैसी विधा का अभाव रहा है, ऐसे में केडीएफ द्वारा इसे यहां स्थापित करना अपने आप में एक ऐतिहासिक पहल है। यही कारण है कि इस आयोजन को केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए बच्चों के लिए एक मिलन समारोह के रूप में आयोजित किया गया, ताकि वे खेल, आनंद और आपसी जुड़ाव का अनुभव एक साथ कर सकें।
कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए हेमचंद हरबोला ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य मकसद बच्चों को विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लेने का अवसर देना और आर्चरी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आज के इस समारोह में बच्चों के लिए कई मनोरंजक और पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें जलेबी रेस और बोरा रेस शामिल रहीं। इन खेलों में बच्चों ने पूरे जोश और उमंग के साथ भाग लिया और मैदान तालियों और हंसी से गूंज उठा। इसके बाद पैरेंट्स (महिला) म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता कराई गई, जिसने माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। इसके साथ ही बच्चों की डांस प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर केडीएफ के संस्थापक राजीव घई ने कार्यक्रम और उसके उद्देश्य को लेकर गहराई से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह भूमि द्रोणाचार्य जी की कर्मभूमि मानी जाती है, जहां महाभारत काल में पांडवों को धनुष विद्या का ज्ञान दिया गया था। वर्षों तक यह विद्या जैसे गुप्त हो गई थी और धीरे-धीरे लोगों की स्मृति से ओझल होती चली गई। राजीव घई ने बताया कि केडीएफ का उद्देश्य इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व इस केंद्र की शुरुआत की गई थी, जब केवल एक धनुष से प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ था, लेकिन आज स्थिति यह है कि केंद्र के पास सात धनुष हैं और लगभग पचास बच्चे नियमित रूप से धनुष विद्या का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो इस प्रयास की सफलता को दर्शाता है।
राजीव घई ने गर्व के साथ बताया कि केडीएफ आर्चरी केंद्र से जुड़े बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने कहा कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बच्चों ने अब तक दो सिल्वर, तीन ब्रॉन्ज और एक गोल्ड जैसे महत्वपूर्ण पदक हासिल किए हैं, जो यह साबित करता है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें तो बच्चे किसी भी स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ बच्चों ने स्वयं अपने धनुष उपलब्ध कराए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चों और उनके परिवारों में इस खेल के प्रति कितना समर्पण और उत्साह है। यह केंद्र धीरे-धीरे न केवल एक प्रशिक्षण स्थल, बल्कि बच्चों के सपनों और आकांक्षाओं का केंद्र बनता जा रहा है।
इस मौके पर राजीव घई ने आर्चरी कोच हेमचंद हरबोला की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हेमचंद हरबोला उत्तराखंड के पहले मेडल होल्डर धनुष विद्या खिलाड़ी हैं और यह केडीएफ के लिए गर्व की बात है कि ऐसे अनुभवी और प्रेरणादायी कोच बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में बच्चे न केवल तकनीकी रूप से मजबूत हो रहे हैं, बल्कि उनमें अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है। राजीव घई ने कहा कि हमेचंद हरबोला जैसे प्रशिक्षक का साथ मिलना इस केंद्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो भविष्य में और भी बेहतर परिणाम देगा।
कार्यक्रम के दौरान राजीव घई ने यह भी कहा कि धनुष विद्या आज तेजी से उभरती हुई खेल विधा है। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स, वर्ल्ड कप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहरा रहा है और देश के खिलाड़ी विश्व स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इसी प्रेरणा से केडीएफ चाहता है कि काशीपुर की धरती से भी एक नया अर्जुन जन्म ले, जो देश और प्रदेश का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत स्टेडियम और प्रशिक्षण सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है, ताकि बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का अवसर मिल सके।
वार्षिक खेल मिलन समारोह को लेकर यह भी सामने आया कि यह आयोजन केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों को एक साथ जोड़ने का भी माध्यम बन रहा है। राजीव घई ने बताया कि आज बच्चे अपने परिवारों के साथ यहां आए हैं और मिलकर इस उत्सव को मना रहे हैं। इस दौरान बच्चों और अभिभावकों ने एक महत्वपूर्ण मांग भी रखी कि वर्तमान में जिस प्लॉट में परिक्षण दिया जा रहा है वह छोट पड़ रहा है, उसके बदले उन्हें जंगल से सटे किसी अन्य स्थान पर भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि वहां भी धनुष विद्या का प्रशिक्षण निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही प्रशासन से औपचारिक मांग की जाएगी, जिससे इस केंद्र का विस्तार हो सके।
आज के दौर में बच्चों की बदलती जीवनशैली पर भी इस अवसर पर चर्चा हुई। राजीव गाही ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल फोन और घर के अंदर सीमित रहने को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। ऐसे माहौल में केडीएफ का यह प्रयास बच्चों को घर से बाहर निकालकर मैदान तक लाने का एक मजबूत माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि आर्चरी जैसी विधा बच्चों में एक अलग तरह का आकर्षण पैदा कर रही है और धीरे-धीरे समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ रही है। बच्चों में इस खेल को लेकर जो क्रेज देखने को मिल रहा है, वह आने वाले समय में काशीपुर के लिए एक नई पहचान बन सकता है।
राजीव घई ने यह भी बताया कि हाल ही में यहां राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय स्तर की टीम का चयन हुआ। उन्होंने इसे केडीएफ और काशीपुर के लिए सौभाग्य की बात बताया कि इतनी बड़ी प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह स्थान इस विधा की शुरुआत के लिए एक मजबूत केंद्र बन चुका है और आने वाले समय में यहां से और भी बड़ी उपलब्धियां सामने आएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान में जहां लगभग पचास बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं, वहीं भविष्य में हर स्कूल से पूछताछ आ रही है और कई विद्यालय अपने यहां भी धनुष विद्या सिखाने की इच्छा जता रहे हैं।
अंत में यह संदेश दिया गया कि आज बच्चों के लिए सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल छोड़कर शारीरिक प्रशिक्षण और खेलों की ओर लौटने की है। केडीएफ आर्चरी एवं अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से फिजिकल ट्रेनिंग, व्यायाम और अनुशासन सिखाया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के प्रयास न केवल बच्चों के शारीरिक विकास में सहायक होंगे, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा देंगे। वार्षिक खेल मिलन समारोह इसी सोच का जीवंत उदाहरण बना, जहां खेल, संस्कृति, परिवार और भविष्य की उम्मीदें एक साथ नजर आईं।



