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केडीएफ अग्निवीर प्रशिक्षण से उभर रही नई पीढ़ी शिव चरण सिंह रावत बने युवाओं की सबसे बड़ी प्रेरणा

सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत के नेतृत्व में केडीएफ का प्रशिक्षण युवाओं को केवल अग्निवीर ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और सुरक्षित भविष्य की मजबूत राह दिखा रहा है

काशीपुर। केडीएफ अग्निवीर योजना के बैनर तले चल रहा प्रशिक्षण आज काशीपुर क्षेत्र में युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और मजबूत दिशा का प्रतीक बनकर उभरा है। इस पहल के केंद्र में सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत हैं, जिनका व्यक्तित्व, अनुभव और अनुशासन युवाओं को स्वतः ही आकर्षित करता है। वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने राष्ट्रसेवा की लौ को बुझने नहीं दिया, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया। केडीएफ के माध्यम से वह उन युवाओं को गढ़ रहे हैं, जो अग्निवीर योजना के तहत देश की सीमाओं की रक्षा का सपना देख रहे हैं। उनका मानना है कि केवल भर्ती परीक्षा पास करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि एक जिम्मेदार, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ वह प्रतिदिन युवाओं के बीच रहकर उन्हें प्रेरणा, आत्मविश्वास और सैन्य मूल्यों की शिक्षा दे रहे हैं।

यह प्रशिक्षण किसी साधारण व्यायाम या दौड़-भाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र सैन्य तैयारी के रूप में विकसित किया गया है। यहां शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक मजबूती, निर्णय लेने की क्षमता और दबाव में काम करने की कला पर विशेष जोर दिया जाता है। केडीएफ परिसर में तीरंदाजी के साथ-साथ जिस दूसरे भाग में शारीरिक प्रशिक्षण संचालित होता है, वहां युवाओं को सेना, पुलिस, एयरफोर्स और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की परीक्षाओं के अनुरूप तैयार किया जाता है। सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत स्वयं मैदान में उतरकर युवाओं को अनुशासन, समय पालन और आदेशों के सम्मान का महत्व समझाते हैं। उनका कहना है कि सेना की वास्तविक चुनौती केवल दौड़ या पुशअप नहीं, बल्कि वह मानसिक दृढ़ता है जो कठिन परिस्थितियों में भी सैनिक को अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होने देती।

दैनिक सहारा प्रजातंत्र से बातचीत करते हुए सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि उनकी कोचिंग केवल अग्निवीर तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि केडीएफ के इस प्रशिक्षण केंद्र में सभी प्रकार की शारीरिक परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है, चाहे वह पुलिस भर्ती हो, सेना हो, एयरफोर्स हो या किसी अन्य सुरक्षा एजेंसी की चयन प्रक्रिया। उनकी एजेंसी का उद्देश्य युवाओं को हर उस मंच के लिए तैयार करना है, जहां शारीरिक दक्षता और अनुशासन की आवश्यकता होती है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि केडीएफ का यह हिस्सा पब्लिक स्कूलों के बच्चों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो रहा है, जहां से छात्र यहां आकर न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बन रहे हैं, बल्कि जीवन में लक्ष्य तय करने की प्रेरणा भी पा रहे हैं।

प्रशिक्षण के साथ-साथ यहां करियर काउंसलिंग को भी एक अहम स्थान दिया गया है। युवाओं को केवल दौड़ने या व्यायाम करने के लिए नहीं छोड़ा जाता, बल्कि उन्हें यह भी समझाया जाता है कि उनके लिए कौन सा क्षेत्र उपयुक्त है। सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने बताया कि अग्निवीर, गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय की अन्य सेवाओं में जाने के इच्छुक युवाओं को सही मार्गदर्शन दिया जाता है। काउंसलिंग के माध्यम से बच्चों की रुचि, क्षमता और संभावनाओं को समझकर उन्हें आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है। इसका परिणाम यह है कि युवाओं का दृष्टिकोण सकारात्मक बन रहा है और वे अपने भविष्य को लेकर अधिक स्पष्ट और आत्मविश्वासी दिखाई दे रहे हैं। इस प्रक्रिया ने कई ऐसे युवाओं को नई दिशा दी है, जो पहले असमंजस में थे।

सेना और सुरक्षा सेवाओं को लेकर समाज में लंबे समय तक यह धारणा रही कि यह क्षेत्र मुख्य रूप से पुरुषों के लिए है, लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है। बातचीत के दौरान सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने स्वीकार किया कि पहले की तुलना में अब महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। सरकार द्वारा नियमों में बदलाव और महिला सशक्तिकरण को लेकर बढ़ती जागरूकता का सीधा असर यहां देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में लड़कियां इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही हैं और उनमें आत्मविश्वास भी पहले से कहीं अधिक है। उनका मानना है कि आने वाले समय में महिलाओं का भविष्य इस क्षेत्र में और भी उज्ज्वल होगा, क्योंकि प्रतियोगिता अपेक्षाकृत कम है और जो लड़कियां शारीरिक व मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लेती हैं, उनके लिए सरकारी नौकरी के अवसर लगभग सुनिश्चित हो जाते हैं।

प्रशिक्षण केंद्र की उपलब्धियों पर नजर डालें तो कम समय में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने बताया कि करीब पांच से छह महीनों के भीतर ही यहां से दो युवाओं का चयन हो चुका है। दोनों युवक हैं, जिनमें से एक गढ़वाल राइफल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है, जबकि दूसरा हाल ही में रानीखेत से अग्निवीर में चयनित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल प्रशिक्षण केंद्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अभी मेहनत के दौर से गुजर रहे हैं। चयनित युवाओं की सफलता ने बाकी प्रशिक्षणार्थियों में भी उत्साह और विश्वास को और मजबूत किया है।

लड़कियों के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनकी कोचिंग में लड़कियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे बढ़-चढ़कर अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। खासतौर पर एनसीसी से जुड़ी छात्राएं इस क्षेत्र में अधिक रुचि दिखा रही हैं और इसे अपने करियर के रूप में देखने लगी हैं। उनका कहना है कि यह क्षेत्र लड़कियों के लिए न केवल सुरक्षित है, बल्कि एक सम्मानजनक और स्थायी भविष्य भी प्रदान करता है। सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास के साथ लड़कियां यहां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और समाज की पारंपरिक धारणाओं को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

अग्निवीर योजना को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ माध्यमों के जरिए इस योजना को लेकर गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जो पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार अग्निवीर केवल एक योजना नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर अग्निवीर सैनिक बनने की क्षमता रखता है, बस उसे थोड़ा अतिरिक्त प्रयास और अनुशासन की जरूरत होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बीएसएफ में 50 प्रतिशत तक अवसर उपलब्ध हैं, उत्तराखंड सरकार ने 10 प्रतिशत कोटा दिया है और पुलिस, अर्धसैनिक बलों तथा ग्रुप सी की नौकरियों में भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

अपने अनुभव के आधार पर सेवानिवृत्त नायब सूबेदार शिव चरण सिंह रावत ने विश्वास जताया कि चार साल की सेवा के बाद कोई भी अग्निवीर खुद को बेरोजगार महसूस नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह गलत है और वास्तविकता से उसका कोई संबंध नहीं है। अग्निवीर योजना युवाओं को न केवल सैन्य प्रशिक्षण देती है, बल्कि उन्हें अनुशासन, नेतृत्व और जिम्मेदारी की ऐसी सीख देती है, जो जीवनभर काम आती है। केडीएफ के माध्यम से तैयार हो रहे ये युवा न सिर्फ परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि एक ऐसे जीवन पथ पर आगे बढ़ रहे हैं, जहां राष्ट्रसेवा, आत्मसम्मान और उज्ज्वल भविष्य साथ-साथ चलते हैं।

प्रशिक्षण ले रहीं दिक्षा पाटवाल ने आत्मविश्वास के साथ बताया कि उनके पिता भारतीय सेना में सेवाकरत हैं और बचपन से ही उन्होंने घर में अनुशासन, देशभक्ति और वर्दी के सम्मान को करीब से देखा है। यही वजह है कि उनके मन में भी सेना में जाने का सपना गहराई से बस गया। दिक्षा ने कहा कि इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह केडीएफ के अंतर्गत सूबेदार शिव चरण सिंह रावत से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने अग्निवीर योजना के तहत होने वाली लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है और अब शारीरिक परीक्षा की तैयारी में पूरी मेहनत और लगन के साथ जुटी हुई हैं।

दिक्षा का कहना है कि आमतौर पर लड़कियों को लेकर यह धारणा बना दी जाती है कि सेना का क्षेत्र उनके लिए कठिन या असुरक्षित है, लेकिन उन्होंने इन बातों से कभी खुद को कमजोर नहीं होने दिया। परिवार के मजबूत समर्थन और सेना से जुड़े परिवेश ने उन्हें और अधिक साहसी बनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके लिए सेना में जाना केवल नौकरी नहीं, बल्कि विरासत में मिला एक सपना है, जिसे वह हर हाल में पूरा करना चाहती हैं।

लिखित परीक्षा पास करने के बाद अपनी तैयारियों को लेकर दिक्षा बेहद सकारात्मक नजर आईं। उन्होंने बताया कि वह रोजाना कड़ी मेहनत कर रही हैं, खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बना रही हैं और हर चुनौती को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार कर रही हैं। भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर दिक्षा ने मुस्कराते हुए कहा कि उनकी उम्मीदें पूरी हैं और उन्हें भरोसा है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के बल पर वह अग्निवीर बनकर देशसेवा का सपना जरूर साकार करेंगी।

प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं दिक्षा पाटवाल ने बेहद आत्मविश्वास और गर्व के साथ बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता भारतीय सेना में सेवारत रहे हैं और उनसे पहले उनके दादा-परदादा भी सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा कर चुके हैं। ऐसे सशक्त सैन्य परिवेश में पली-बढ़ी दिक्षा के लिए सेना केवल एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि विरासत और आत्मसम्मान का प्रतीक है। यही कारण है कि वह आज सूबेदार शिव चरण सिंह रावत के मार्गदर्शन में पूरी निष्ठा से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, ताकि अग्निवीर बनकर अपने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा सकें।

सेना के कठिन प्रशिक्षण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को लेकर पूछे गए सवाल पर दिक्षा ने बिना किसी झिझक के कहा कि उन्हें इन चुनौतियों से डर नहीं लगता। उनका मानना है कि जब लक्ष्य देशसेवा हो, तो हर कठिनाई अपने आप छोटी लगने लगती है। उन्होंने दृढ़ शब्दों में कहा कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वह उन्हें सहने और उनसे लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आत्मविश्वास से भरी दिक्षा का यह जज़्बा साफ दर्शाता है कि आज की बेटियां न केवल सेना में जाने का साहस रखती हैं, बल्कि हर चुनौती को दृढ़ संकल्प के साथ स्वीकार करने का हौसला भी रखती हैं।

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