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कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 27 सितंबर को तय छात्रों में जोश उमंग और नई उम्मीद

लंबे इंतजार के बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव तय, उम्मीदवारों और संगठनों में जोश, परिसर में गूंजे नारों संग लोकतंत्र का उत्सव शुरू

काशीपुर। कुमाऊं विश्वविद्यालय से इस समय छात्र राजनीति की दुनिया की सबसे अहम खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ यूनिवर्सिटी के छात्रों बल्कि पूरे उत्तराखंड के शिक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लंबे इंतजार और पिछली बार की निराशा के बाद आखिरकार छात्र संघ चुनावों की तारीखें तय कर दी गई हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही परिसर में उत्साह और जोश का माहौल साफ दिखाई दे रहा है। छात्र-छात्राओं में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा यही बन गया है कि इस बार कौन से चेहरे उभरकर सामने आएंगे और कौन संगठन छात्रों का विश्वास जीतने में सफल होगा। पिछले साल चुनाव न हो पाने के कारण जिस नाराजगी ने माहौल को आंदोलनों तक पहुंचा दिया था, वह अब धीरे-धीरे उम्मीद और उत्साह में बदल गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति हमेशा से सक्रिय और प्रभावशाली रही है और यही कारण है कि इस बार का चुनाव और भी रोचक माना जा रहा है।

चुनाव की अधिसूचना जारी करते हुए डॉ. मंगल सिंह मंन्द्रवाल ने स्पष्ट किया है कि पूरा चुनावी कार्यक्रम बेहद पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जाएगा। उनके अनुसार 22 सितंबर को कॉलेजों में आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी, जिसके बाद चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू मानी जाएगी। 23 सितंबर को नामांकन पत्रों की बिक्री होगी और उसी दिन से छात्र संगठन अपने प्रत्याशी को लेकर अंतिम निर्णय पर पहुंचेंगे। 24 सितंबर का दिन नामांकन दाखिल करने के लिए तय किया गया है, जब छात्र नेता अपने समर्थकों के साथ जोर-शोर से दस्तावेज जमा करेंगे। 25 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी, जिससे यह तय होगा कि आखिरकार मैदान में कौन-कौन प्रत्याशी बचेंगे। सबसे अहम तारीख 27 सितंबर होगी, जब मतदान संपन्न कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना कर परिणाम भी घोषित किए जाएंगे। यह तय है कि उसी शाम छात्र संगठन अपनी जीत और हार का हिसाब करेंगे और नई छात्र सरकार का गठन हो जाएगा।

पिछले वर्ष छात्र संघ चुनाव न हो पाने से छात्रों में गुस्सा और असंतोष चरम पर पहुंच गया था। जगह-जगह प्रदर्शन, नारेबाजी और आंदोलन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भी असहज कर दिया था। छात्रों का आरोप था कि उनकी आवाज दबाई जा रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों से उन्हें वंचित किया जा रहा है। यही वजह रही कि इस बार जैसे ही चुनावी कार्यक्रम घोषित हुआ, छात्रों के चेहरे खिल उठे और परिसर का माहौल उत्सव जैसा हो गया। छात्र संगठनों के बीच अब रणनीति बनाने की होड़ मच गई है और संभावित प्रत्याशियों ने भी अपने समर्थकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अलग-अलग गुटों में बैठकों का दौर तेज हो गया है और हर कोई इस बार जीत का दावा कर रहा है। यह चुनाव न केवल छात्रों की राजनीतिक समझ को सामने लाएगा बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलेगा।

छात्रों के बीच इस बार का उत्साह कुछ अलग ही स्तर पर नजर आ रहा है। वे खुलकर कह रहे हैं कि अब उन्हें एक नई छात्र सरकार चुनने का मौका मिलेगा, जो उनके मुद्दों को मजबूती से उठाएगी। कैंपस में माहौल चुनावी नारों, पोस्टरों और छात्र नेताओं की सक्रियता से सरगर्म हो गया है। जिन संगठनों ने पिछले साल आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया था, वे इस बार खुद को सबसे मजबूत दावेदार साबित करने में लगे हैं। वहीं, नए चेहरों को भी यह अवसर एक सुनहरा मौका दे रहा है। कक्षा से लेकर कैफेटेरिया तक और हॉस्टल से लेकर परिसर की गलियों तक, हर जगह अब सिर्फ छात्र संघ चुनावों पर चर्चा हो रही है। इस माहौल में यह साफ है कि 27 सितंबर का दिन न सिर्फ मतदान का बल्कि छात्र राजनीति के भविष्य का फैसला करने वाला दिन साबित होगा।

अब जबकि चुनाव का पूरा कैलेंडर घोषित हो चुका है और डॉ. मंगल सिंह मंन्द्रवाल ने अधिसूचना जारी कर दी है, ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परिणाम किस ओर रुख करेंगे। छात्र संघ चुनाव हमेशा से कुमाऊं विश्वविद्यालय की पहचान का हिस्सा रहे हैं और इस बार की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। संगठन अपनी ताकत झोंकने के लिए तैयार हैं, प्रत्याशी प्रचार की योजनाओं पर काम कर रहे हैं और मतदाता छात्र अपने पसंदीदा नेता को चुनने के लिए उत्साहित हैं। यह निश्चित है कि 27 सितंबर को होने वाले चुनाव न सिर्फ विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए बल्कि पूरे प्रदेश की छात्र राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बनने जा रहे हैं। लोकतांत्रिक परंपरा को जीवंत रखने वाले इस चुनाव पर हर किसी की नजर टिकी है और परिणाम आने तक यह उत्साह और रोमांच लगातार बढ़ता रहेगा।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रिंकू बिष्ट ने छात्र संघ चुनाव की तारीखों को लेकर कहा कि आखिरकार वह घड़ी आ ही गई जिसका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। उनका मानना है कि यह चुनाव छात्रों की आवाज़ को मजबूती देने और उनके मुद्दों को सामने रखने का सबसे बड़ा अवसर है। रिंकू बिष्ट ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से छात्र असंतोष में थे क्योंकि पिछली बार चुनाव न होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हुई थी। अब 27 सितंबर को मतदान और परिणाम घोषित होने की घोषणा ने छात्र समुदाय में नई ऊर्जा और उम्मीद जगा दी है। उन्होंने कहा कि छात्र इस बार सही प्रतिनिधित्व चाहते हैं और एक ऐसी छात्र सरकार चुनना चाहते हैं जो वास्तव में उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हो। रिंकू बिष्ट ने विश्वास जताया कि छात्र राजनीति का यह नया अध्याय बदलाव लेकर आएगा।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी जतिन शर्मा ने छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक चुनाव नहीं बल्कि छात्रों की सोच, उनकी इच्छाशक्ति और उनके अधिकारों का प्रतीक है। जतिन शर्मा ने बताया कि लंबे समय से छात्र अपनी प्रतिनिधि सरकार की मांग कर रहे थे और अब जब 27 सितंबर को मतदान और परिणाम की घोषणा तय हुई है, तब पूरे परिसर में नया जोश और उमंग दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस शक्ति का नाम है जो विश्वविद्यालय की दिशा और दशा तय करती है। जतिन शर्मा ने भरोसा जताया कि इस बार के चुनाव छात्रों को एक ऐसा मंच देंगे, जहाँ उनकी समस्याओं को न सिर्फ सुना जाएगा बल्कि उनका ठोस समाधान भी निकाला जाएगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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