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कुमाऊँ परिवहन निगम कर्मियों ने 8 सितम्बर से सभी डिपो में कार्य बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया

वेतन न मिलने से आक्रोशित कुमाऊँ परिवहन निगम कर्मचारी चेतावनी के बाद अब निर्णायक संघर्ष की राह पर, 8 सितम्बर से थम सकता है बस संचालन

काशीपुर/हल्द्वानी। उत्तराखण्ड परिवहन निगम के कुमाऊँ क्षेत्र में कर्मचारियों और अधिकारियों का धैर्य अब टूटने की कगार पर है। लगातार दो माह से वेतन का भुगतान न होने से निगम परिवार आर्थिक संकट के गहरे दलदल में फंसा हुआ है। कर्मचारियों की नाराज़गी अब खुलकर सामने आ चुकी है और संगठन ने निगम प्रबंधन को साफ चेतावनी दे दी है कि यदि समय रहते वेतन की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। परिवार चलाने के लिए तरस रहे कर्मियों का कहना है कि घर का खर्चा, बच्चों की फीस, बैंक किस्तें और जरूरी सामान की खरीद तक प्रभावित हो चुकी है। लंबे समय से जारी असमंजस और प्रबंधन की चुप्पी ने उनके आक्रोश को और भड़का दिया है। इस बार कर्मचारी संगठन ने साफ कर दिया है कि अब खाली आश्वासन से काम नहीं चलेगा, 7 सितम्बर तक यदि जुलाई और अगस्त माह का वेतन नहीं मिला तो आंदोलन किसी भी सूरत में टाला नहीं जाएगा।

निगम में वेतन को लेकर बढ़ते असंतोष की जड़ उस समय रखी गई थी जब कुमाऊँ के अलग-अलग डिपो के कर्मचारी कई दिनों तक अधिकारियों से वेतन जारी करने की गुहार लगाते रहे। 2 अगस्त को संगठन ने निगम प्रबंधन को लिखित ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कहा था कि कर्मचारियों की मेहनत की कमाई समय पर दी जाए अन्यथा मजबूरन आंदोलन शुरू करना पड़ेगा। उस समय निगम प्रबंधन की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि समय पर वेतन उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसी भरोसे के चलते 8 अगस्त को प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। लेकिन 29 अगस्त बीतने तक भी वेतन जारी न होने से कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी फैल गई है। संगठन ने इसे सीधे तौर पर उत्पीड़न करार देते हुए कहा कि निगम प्रबंधन ने न सिर्फ कोर्ट के आदेश को ताक पर रखा है बल्कि श्रम कानूनों की भी अनदेखी की है।

संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि श्रम कानून की धारा के अनुसार हर माह की सात तारीख तक वेतन का भुगतान होना अनिवार्य है। यहां तक कि माननीय नैनीताल हाईकोर्ट भी इस बारे में आदेश जारी कर चुका है। बावजूद इसके निगम प्रबंधन ने न तो न्यायालय की गंभीरता समझी और न ही कर्मचारियों की कठिनाइयों को। यही वजह है कि अब कर्मचारी आंदोलन के रास्ते पर उतरने को बाध्य हैं। संगठन का आरोप है कि यह स्थिति न सिर्फ कर्मचारियों की आजीविका पर हमला है बल्कि निगम की कार्यप्रणाली को भी कमजोर कर रही है। जब वेतन ही समय पर न मिले तो कर्मचारी पूरे मनोयोग से जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे कर पाएंगे।

घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 8 सितम्बर को कुमाऊँ क्षेत्र के सभी डिपो में कार्य बहिष्कार किया जाएगा। अगले ही दिन यानी 9 सितम्बर को मण्डलीय प्रबंधक (संचालन) कार्यालय काठगोदाम के बाहर संगठन धरना प्रदर्शन करेगा। यदि तब भी मांगें पूरी न हुईं तो 10 सितम्बर से पूरे कुमाऊँ मंडल में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि आंदोलन से पहले कर्मचारियों पर किसी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई की गई तो आंदोलन तत्काल शुरू कर दिया जाएगा और प्रबंधन इसके लिए खुद जिम्मेदार होगा।

वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने कहा कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई घरों में बच्चों की पढ़ाई तक पर असर पड़ा है। कई कर्मचारियों के बैंक खाते की किस्तें बकाया हो गई हैं, जिससे उन्हें कानूनी परेशानियों का डर सताने लगा है। घर के सामान्य खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है और महंगाई के दौर में बिना वेतन परिवार पालना किसी सजा से कम नहीं। उनका कहना है कि निगम प्रबंधन केवल आश्वासन देकर कर्मचारियों को बरगलाने की कोशिश कर रहा है जबकि जमीनी स्तर पर कोई राहत नहीं मिली है। यही कारण है कि अब आंदोलन को ही आखिरी विकल्प मान लिया गया है।

उधर, निगम प्रबंधन की चुप्पी ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है। संगठन नेताओं का कहना है कि समस्या केवल वेतन तक सीमित नहीं रह जाएगी बल्कि इसका सीधा असर बस संचालन पर भी देखने को मिलेगा। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। बसों का संचालन प्रभावित हुआ तो आम जनता के सामने परिवहन का संकट खड़ा हो जाएगा। नेताओं ने कहा कि वे निगम के विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर समय से वेतन मिल जाए तो उन्हें सड़क पर उतरने की नौबत ही न आए।

अब पूरा मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। 7 सितम्बर की डेडलाइन से पहले निगम प्रबंधन क्या कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं, इसी पर सबकी निगाहें टिकी हैं। कर्मचारी संगठन ने आंदोलन का ऐलान करके साफ कर दिया है कि अब और इंतजार संभव नहीं है। यदि इस बार भी वेतन भुगतान टला तो 8 सितम्बर से कुमाऊँ क्षेत्र में परिवहन सेवाएं ठप होना तय है। आम जनता को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ेगा और जिम्मेदारी पूरी तरह से निगम प्रबंधन पर होगी। कुमाऊँ का यह वेतन संकट अब ऐसा रूप ले चुका है, जहां से वापसी तभी संभव है जब प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों को मानकर तुरंत वेतन जारी करे।

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