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कुंडेश्वरी में कबड्डी का महासंग्राम उत्तराखंड के युवाओं ने जोश और जुनून से लिखी नई इबारत

समर स्टडी हॉल बना खेल भावना का केंद्र जहां उत्तराखंड के बारह जिलों की टीमें मैदान में जज़्बे, अनुशासन और जीत के हौसले के साथ आमने-सामने

काशीपुर। खेल की ऊर्जा और युवाओं के जज़्बे से सराबोर वातावरण में कुंडेष्वरी स्थित समर स्टडी हॉल विद्यालय शनीवार को खेल संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गया है। यहां 23वीं उत्तराखंड सब जूनियर कबड्डी प्रतियोगिता (बालक एवं बालिका वर्ग) का भव्य आयोजन जारी है, जिसमें उत्तराखंड के बारह जिलों की लगभग बीस टीमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। इस राज्यस्तरीय आयोजन की मेजबानी समर स्टडी हॉल विद्यालय ने की है, जबकि आयोजन का दायित्व उधम सिंह नगर कबड्डी एसोसिएशन ने संभाला है, जो उत्तराखंड कबड्डी फेडरेशन के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है। प्रतियोगिता का शुभारंभ विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और नगर निगम काशीपुर के मेयर दीपक बाली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उनके साथ मंच पर एथलीट गोल्ड मेडलिस्ट विजेंद्र चौधरी, फेडरेशन अध्यक्ष महेश जोशी, एसोसिएशन उपाध्यक्ष मेजर सिंह, समर स्टडी हॉल ग्रुप की अध्यक्षा मुक्ता सिंह, सचिव चेतन जोशी, उपसचिव महेंद्र सिंह, डायरेक्टर राहुल पैगिया, उपाध्यक्ष दिलबाग सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष अनुराग कुमार सिंह, सचिव बृजेश दुबे और प्रधानाचार्य अनुज भाटिया उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब मुख्य अतिथियों ने विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को सम्मानित किया। छात्रों को ट्रॉफी प्रदान की गई और उनके अभिभावकों को शॉल ओढ़ाकर गौरवान्वित किया गया। सम्मान पाने वालों में सक्षम प्रताप सिंह (एथलेटिक्स), पूजा रावत (एथलेटिक्स), प्रखर सक्सैना (चेस), ललित सिंह (एथलेटिक्स), नैंसी रावत (एथलेटिक्स), कवलीन कौर (क्रिकेट) और दीपांशी भारद्वाज (फेंसिंग व एथलेटिक्स) शामिल रहे। जब इन होनहार विद्यार्थियों के नाम पुकारे गए, तो विद्यालय प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अभिभावकों के चेहरे गर्व से चमक उठे और विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास झलकने लगा। इस सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण का फल अवश्य मिलता है। विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि खेल न केवल शारीरिक विकास का माध्यम हैं बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता की भावना को भी जन्म देते हैं।

प्रतियोगिता के पहले दिन हुए मैचों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। बालिका वर्ग के मुकाबलों में नैनीताल ने पौड़ी को 30-16 से मात देकर शानदार शुरुआत की। देहरादून की टीम ने पिथौरागढ़ को 31-15 से हराकर अपने मजबूत इरादों का परिचय दिया, जबकि हरिद्वार की बालिकाओं ने उधम सिंह नगर को 39-22 से पराजित कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। बालक वर्ग में देहरादून ने टिहरी को 33-20 से मात दी, उधम सिंह नगर ने उत्तरकाशी को 44-11 के विशाल अंतर से हराया, और बागेश्वर ने पिथौरागढ़ को 32-24 से हराकर अपनी दावेदारी मजबूत की। खिलाड़ियों की फुर्ती, रणनीति और खेल के प्रति समर्पण ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खेल मैदान उत्साह और जयकारों से गूंज उठा। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले 12 अक्टूबर 2025 को खेले जाएंगे, जिनका इंतजार अब हर खेलप्रेमी को बेसब्री से है।

निर्णायक मंडल ने प्रतियोगिता को अनुशासित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। रेफरी इंचार्ज गुडमोहर शाह के नेतृत्व में निर्णायक प्रवीण (टिहरी), आदेश डबराल (देहरादून), प्रवीण चौहान (देहरादून), नरेंद्र चौहान (देहरादून), रवि राठी (हरिद्वार), समीर (हरिद्वार), सुमित कुमार (हरिद्वार), शालिनी आर्य (उधम सिंह नगर), विमल पांडे (उधम सिंह नगर) और पलक (उधम सिंह नगर) ने अपने अनुभव और दक्षता से प्रतियोगिता का संचालन किया। उन्होंने खेल भावना को सर्वाेपरि रखते हुए हर मुकाबले को निष्ठा और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और निर्णायकों के निर्णयों पर दर्शकों ने भरोसा जताया और तालियों से उनका स्वागत किया। प्रतियोगिता का वातावरण अनुशासन और सम्मान की भावना से भरा रहा, जिसने सभी के दिलों को छू लिया।

इस आयोजन की शोभा बढ़ाने पहुंचे विशेष अतिथियों में नरेंद्र सिंह (पूर्व उपाध्यक्ष कबड्डी एसोसिएशन), आर. एस. तिवारी (प्रधानाध्यापक सेमफोर्ड स्कूल), जतिन शर्मा (अध्यक्ष राधे हरि डिग्री कॉलेज काशीपुर), मनदीप सिंह ढिल्लन (पूर्व छात्र संघ सचिव), पायल थापा (विश्वविद्यालय प्रतिनिधि), संजय चौधरी (पूर्व ग्राम प्रधान), अमित नारंग (ग्राम प्रधान हल्दुआ), शशांक चौधरी (उपप्रधानाचार्य) और मनु अग्रवाल सहित विद्यालय का पूरा स्टाफ उपस्थित रहा। सभी ने खेलों को शिक्षा के समान महत्वपूर्ण बताते हुए खिलाड़ियों की मेहनत और आयोजन समिति की लगन की सराहना की। कार्यक्रम का हर क्षण उत्साह, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहा। समर स्टडी हॉल विद्यालय ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि खेल के माध्यम से भी शिक्षा और संस्कारों को नई दिशा दी जा सकती है।

उत्तराखंड कबड्डी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मेजर सिंह ने अपने उत्साहपूर्ण संबोधन में कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण आत्मा और युवा शक्ति का उत्सव है। उन्होंने विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, आयोजन समिति और विद्यालय प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इनके सहयोग से यह आयोजन बेहद प्रेरणादायक बन पाया है। उन्होंने कहा कि कबड्डी हमारी मिट्टी से जुड़ा खेल है, जो साहस, अनुशासन और एकता का प्रतीक है। मेजर सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता में शामिल लगभग निन्यानवे प्रतिशत खिलाड़ी सरकारी विद्यालयों से हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपार जज़्बे से मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि यही बच्चे भविष्य में उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एसोसिएशन का उद्देश्य हर ग्रामीण क्षेत्र तक खेल की पहुंच सुनिश्चित करना है ताकि कोई प्रतिभा साधनों की कमी से पीछे न रह जाए। मेजर सिंह ने शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी नमन किया, जो इन खिलाड़ियों को तराशने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तराखंड कबड्डी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराएगा।

समर स्टडी हॉल ग्रुप की अध्यक्षा मुक्ता सिंह ने अपने भावनात्मक संबोधन में कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में जीत या हार से अधिक महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। उन्होंने कहा कि हर वह खिलाड़ी जो मैदान में उतरता है, वह पहले से ही विजेता होता है, क्योंकि साहस के साथ भाग लेना ही असली सफलता है। उन्होंने कहा कि आज मैदान में बैठी हर बालिका और हर बालक मेहनत और समर्पण की मिसाल हैं, जो साबित करते हैं कि धूप और कठिनाइयाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस आयोजन को कवरेज देकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी जीत वह है, जब कोई अपना सर्वश्रेष्ठ देता हैकृचाहे परिणाम कुछ भी हो। मुस्कराते हुए उन्होंने कहा, “जो जीता वो भी सिकंदर है, जो नहीं जीता, वो भी सिकंदर है,” क्योंकि असली जीत आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास में छिपी होती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि अपने हुनर को पहचानें, आत्मविश्वास बनाए रखें और हर चुनौती को अवसर में बदलने का साहस रखें।

मेयर दीपक बाली ने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और जोश का उत्सव है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए खिलाड़ियों का जोश देखकर यह स्पष्ट है कि राज्य का भविष्य सुनहरा है। उन्होंने आयोजन समिति और विद्यालय प्रबंधन का धन्यवाद करते हुए कहा कि समर स्टडी हॉल ग्रुप ने खिलाड़ियों के रहने, खाने और प्रशिक्षण की उत्कृष्ट व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग है और हार-जीत केवल एक पड़ाव। असली विजेता वही होता है जो हार को अपनी अगली जीत का आधार बनाता है। उन्होंने कहा, “मन छोटा होगा तो लक्ष्य दूर रह जाएगा, लेकिन मन बड़ा होगा तो कोई भी जीत असंभव नहीं।” दीपक बाली ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के ‘खेलो इंडिया’ और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत काशीपुर पुलिस स्टेडियम को अत्याधुनिक खेल परिसर के रूप में विकसित करने के लिए लगभग पैंतालीस करोड़ रुपये की योजना पर कार्य चल रहा है, जिससे युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि जब जज़्बा सच्चा हो, तो न सीमाएँ मायने रखती हैं, न संसाधनों की कमीकृसिर्फ मेहनत, विश्वास और संकल्प ही जीत की असली पहचान हैं।

एथलेटिक्स सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन विजेंद्र चौधरी ने अपने प्रेरणादायक विचार रखते हुए कहा कि खेल जीवन का सार हैं। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी आज मैदान में पसीना बहाता है, वही कल जीत की चमक लेकर लौटता है। उन्होंने कहा कि “हिम्मत नहीं तो प्रतीक्षा नहीं, विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं”कृयानी कठिनाइयाँ ही हमें मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी खेल का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है; जो सच्चे मन से खेलता है, वही वास्तविक विजेता कहलाता है। चौधरी ने कहा कि शिक्षा और खेल जीवन के दो पंख हैंकृएक बुद्धि को विकसित करता है, दूसरा व्यक्तित्व को। उन्होंने हँसी-मजाक के लहजे में कहा, “लोग पूछते हैं बच्चे क्या बनना चाहते हैं, लेकिन किसी खिलाड़ी से पूछिएकृवह सपनों को मैदान में जीता है।” उन्होंने कहा कि हर गिरना एक नई उड़ान की शुरुआत है। जब पसीना ईमानदारी से बहता है, तो सफलता सिर झुकाकर सलाम करती है। इस प्रेरणादायक आयोजन ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की धरती न केवल देवभूमि है, बल्कि खेलभूमि भी बन चुकी है, जहाँ हर युवा खिलाड़ी सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रखता है।

उत्तराखण्ड फेडरेशन कबड्डी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष महेश जोशी ने मिडिया से बात करते हुये कहा कि कहा कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता लगातार तेईस वर्षों से सफलता के साथ आयोजित हो रही है, जो अपने आप में गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का आयोजन भी बेहद उत्कृष्ट और प्रेरणादायक रहा, जिसमें जिले के पदाधिकारियों और आयोजन प्रबंधकों ने पूरी निष्ठा और सहयोग के साथ इसे सफल बनाया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जा रहा है, और यह गर्व की बात है कि उत्तराखण्ड के कई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सरकारी सहयोग की कमी महसूस होती है, फिर भी फेडरेशन अपने सीमित संसाधनों से खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। इस वर्ष उत्तराखण्ड के चार खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है, जो प्रदेश के लिए सम्मान की बात है। महेश जोशी ने बताया कि तीन खिलाड़ी एशियन गेम्स के लिए चयनित हुए हैं, जो राज्य की खेल प्रतिभा का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार थोड़ी और मदद करे तो उत्तराखण्ड के खिलाड़ी देश का नाम और ऊँचा कर सकते हैं। जोशी ने यह भी बताया कि हरिद्वार में पंद्रह करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त कबड्डी प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सैकड़ों युवा खिलाड़ी लाभान्वित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड के ये होनहार खिलाड़ी आने वाले वर्षों में न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का तिरंगा लहराने में अग्रणी भूमिका निभाएँगे।

वहीं मिडिया से बात करते हुये मुख्य अतिथि दीपक बाली ने कहा कि आज का दिन खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों को नई ऊर्जा और सम्मान देने का यह आयोजन एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगा बल्कि नगर के विकास में भी नई दिशा देगा। दीपक बाली ने समर स्टडी हॉल के स्कूल प्रबंधन और अध्यक्षा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस संस्था ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जो योगदान दिया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि नगर निगम सदैव ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने के लिए तत्पर है, ताकि हर बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके। मेयर बाली ने बताया कि प्रधानमंत्री के खेलो इंडिया अभियान की भावना को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम काशीपुर खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि कबड्डी वह खेल है जो मिट्टी की खुशबू से जुड़ा है, गांवों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नगर निगम की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा ताकि काशीपुर के बच्चे खेल के माध्यम से न केवल अपना भविष्य उज्जवल बना सकें, बल्कि प्रदेश और देश का नाम भी रोशन करें। दीपक बाली ने कहा कि वे स्वयं इस मुहिम के साथ खड़े हैं और हर उस पहल को आगे बढ़ाएंगे जो युवाओं के सपनों को साकार करने में मददगार बनेगी।

काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने मिडिया से बात करते हुये कहा कि आज समर स्टडी हॉल में आयोजित जिला स्तरीय कबड्डी टूर्नामेंट ने यह साबित कर दिया है कि हमारे युवा खेल भावना और अनुशासन के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की यही सोच है कि देश के पारंपरिक खेलों को नई पहचान और सम्मान मिले। इसी दिशा में सरकार लगातार ऐसे आयोजन कर रही है ताकि कबड्डी जैसे देसी खेलों को फिर से वह स्थान मिल सके, जो कभी ग्रामीण भारत की आत्मा हुआ करते थे। विधायक चीमा ने कहा कि यह टूर्नामेंट न केवल प्रतिस्पर्धा का मंच है बल्कि युवाओं को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी आज जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, वे आगे चलकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहराएँगे। चीमा ने कहा कि यह देखकर गर्व होता है कि बच्चों में खेल के प्रति अद्भुत उत्साह और जुनून है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड के खिलाड़ी पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएँगे। विधायक ने कहा कि सरकार हर पारंपरिक खेल को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि खेलों के माध्यम से देश के युवाओं को अनुशासन, फिटनेस और टीम भावना की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने आयोजकों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि काशीपुर की धरती से निकले ये खिलाड़ी आने वाले वर्षों में राज्य का गौरव बनेंगे।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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