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किसान सुखविंदर की आत्महत्या पर AICC सदस्य अनुपम शर्मा का बड़ा हमला उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप

किसान की दर्दनाक आत्महत्या के बाद पुलिस तंत्र पर भ्रष्टाचार, वसूली और सत्ता संरक्षण के गंभीर आरोप, कांग्रेस ने वीडियो बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और प्रदेशव्यापी आंदोलन के संकेत दिए।

काशीपुर। AICC सदस्य अनुपम शर्मा ने अपना वीडियो जारी कर कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक और काले दिन के रूप में दर्ज हो गया है। उन्होंने बेहद गंभीर और भावुक लहजे में कहा कि काशीपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पैगाम निवासी किसान सुखविंदर द्वारा की गई आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर लगा एक बड़ा सवाल है। अनुपम शर्मा ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में आम नागरिक और किसान किस स्तर के मानसिक, सामाजिक और प्रशासनिक दबाव में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुखविंदर ने आत्महत्या से पहले उत्तराखंड पुलिस और ऊधमसिंह नगर पुलिस पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जो किसी भी संवेदनशील सरकार और प्रशासन को झकझोर देने के लिए पर्याप्त हैं। शर्मा ने कहा कि यह केवल एक किसान की मौत नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की असफलता का प्रतीक है, जो न्याय देने के बजाय लोगों को टूटने पर मजबूर कर रही है।

वीडियो बयान में AICC सदस्य अनुपम शर्मा ने बताया कि किसान सुखविंदर ने आत्महत्या से पहले यह भी कोशिश की थी कि वह पूरे परिवार के साथ इस कदम को उठाए। उन्होंने कहा कि यह सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि एक किसान इस हद तक टूट चुका था कि वह अपनी पत्नी और बच्चे को भी इस दर्दनाक फैसले का हिस्सा बनाना चाहता था। हालांकि, ईश्वर की कृपा रही कि उसकी पत्नी और बच्चा इस घटना में जीवित बच गए और इस समय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। शर्मा ने कहा कि यह राहत की बात जरूर है, लेकिन इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि एक पूरे परिवार को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम सामने आया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां थीं, जिन्होंने एक शांत किसान को इतना बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया।

अनुपम शर्मा ने अपने बयान में उस वीडियो का भी जिक्र किया, जो सुखविंदर ने मरने से पहले रिकॉर्ड किया था। उन्होंने कहा कि वह वीडियो इतना मार्मिक और पीड़ा से भरा हुआ है कि उसे सुनकर न केवल हैरानी होती है, बल्कि शर्मिंदगी भी महसूस होती है कि प्रदेश में इस तरह की स्थिति पैदा हो गई है। शर्मा ने कहा कि वीडियो में सुखविंदर ने ऊधमसिंह नगर पुलिस और उत्तराखंड पुलिस के कुछ अधिकारियों पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि किसान ने अपने वीडियो में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, वह यह दर्शाता है कि वह अंदर से पूरी तरह टूट चुका था और उसे किसी भी स्तर पर न्याय की उम्मीद नहीं बची थी। AICC सदस्य ने कहा कि यह वीडियो केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक दस्तावेज है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अपने वीडियो बयान में अनुपम शर्मा ने कहा कि किसान सुखविंदर ने मरने से पहले बेहद चौंकाने वाली बात कही थी। शर्मा के अनुसार, सुखविंदर ने कहा था कि जब वह मर जाए तो उसके अंगों को बेचकर जो पैसा मिले, वह पुलिस अधिकारियों मणिकांत मिश्रा और आईटीआई चौकी के कोतवाल रौतेला को दे दिया जाए। अनुपम शर्मा ने कहा कि यह बयान किसी सामान्य व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस इंसान का है, जो व्यवस्था से पूरी तरह निराश हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब कोई किसान इस तरह की बात कहता है, तो यह सीधे तौर पर सिस्टम पर गंभीर आरोप है। शर्मा ने आरोप लगाया कि जिन पुलिस अधिकारियों के नाम सुखविंदर ने लिए, उन पर पहले से भी भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

AICC सदस्य अनुपम शर्मा ने पुलिस तंत्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में यह आम चर्चा है कि कई पुलिस अधिकारी अपनी पोस्टिंग पाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई अधिकारी पांच-पांच करोड़ रुपये देकर पोस्टिंग हासिल करता है, तो वह यहां आकर बीस करोड़ रुपये वसूलने की मानसिकता से काम करता है। शर्मा ने कहा कि यही वजह है कि आज उत्तराखंड के कई थाने और कोतवाली जनता के लिए न्याय के केंद्र नहीं, बल्कि वसूली के अड्डे बनते जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज उत्तराखंड एक रिकवरी सेंटर बन चुका है, जहां ऊपर मोटी रकम देकर आए अधिकारी नीचे आकर आम जनता को प्रताड़ित करते हैं और जबरन वसूली करते हैं।

अनुपम शर्मा ने अपने बयान में कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अपराध हो या न हो, पुलिस को उससे कोई मतलब नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई अंकिता भंडारी जैसी दर्दनाक घटना हो जाए, पुलिस और प्रशासन की संवेदनशीलता नजर नहीं आती। शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस का पूरा ध्यान केवल पैसों की वसूली पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि संपत्ति विवाद हो, खनन से जुड़ा मामला हो या पैसों का कोई भी विवाद, सब कुछ थाने में बैठकर मोटी रकम लेकर निपटा दिया जाता है। जिन अधिकारियों से आम जनता को न्याय की उम्मीद होती है, वही अधिकारी इस तरह के मामलों में सौदेबाजी करते नजर आते हैं।

अपने वीडियो में AICC सदस्य अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि प्रदेश के कई एसएसपी स्तर के अधिकारी भी इन गतिविधियों में संलिप्त बताए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी यह कहते हैं कि उन्होंने अपनी पोस्टिंग के लिए मोटा पैसा खर्च किया है, तो फिर उनकी रिकवरी कैसे होगी, यह सोच अपने आप में खतरनाक है। शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या देवभूमि उत्तराखंड को जंगलराज और वसूली का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश शांतिप्रिय लोगों का है और यहां इस तरह की अराजकता कभी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस प्रदेश में न तो जंगलराज चलने देगी और न ही वसूली का खेल।

अनुपम शर्मा ने वीडियो में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरा देश देख रहा है कि उत्तराखंड में आखिर हो क्या रहा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि राज्य की सरकार आखिर क्या कर रही है। शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड अपने गठन के बाद से और उससे पहले जब यह उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, तब भी एक शांत और सरल प्रदेश माना जाता था। यहां के लोग स्वभाव से ही शांतिप्रिय हैं, लेकिन अगर इन्हीं लोगों पर अत्याचार किया जाएगा, उन्हें डर और दहशत में रखकर रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो यह प्रदेश इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।

AICC सदस्य अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि प्रदेश में हालात इतने भयावह हो गए हैं कि अब राजनीतिक कार्यकर्ता भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के साथी रवि पपने का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी एक वीडियो जारी कर यह आरोप लगाया है कि उन्हें मणिकांत मिश्रा से जान का खतरा है। शर्मा ने कहा कि जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता यह कहने लगे कि उसे मरवाया जा सकता है, तो यह स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर प्रदेश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है और क्या यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।

अपने बयान के अंत में अनुपम शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को हल्के में नहीं लेगी। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस के लोग कल उस किसान परिवार से मुलाकात करेंगे, जिसने आज अपने सदस्य को खोया है। शर्मा ने कहा कि पीड़ित परिवार से बातचीत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी और प्रदेशभर में इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस इस तरह की लूट, भ्रष्टाचार और जंगलराज को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। शर्मा ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक किसान के लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की आत्मा और सम्मान के लिए है, और इस संघर्ष को आखिरी दम तक लड़ा जाएगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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