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काशीपुर में रामनगर रोड का भीषण जाम बना यातायात व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी

चीमा चौराहे से रामनगर रोड तक घंटों ठप यातायात बढ़ते वाहन, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण ने शहर को जाम की पकड़ में जकड़ा प्रशासन की नाकामी से लोगों की रोजमर्रा जिंदगी पर गहरा असर

काशीपुर(सुनील कोठारी)। शहर में ट्रैफिक अव्यवस्था अब ऐसी स्थिति में पहुँच चुकी है कि लोगों का रोजमर्रा का सफर एक चुनौती बन गया है। धीरे-धीरे बढ़ते वाहन दबाव, अवैध तरीके से खड़े किए गए ऑटो और कारें, सड़क किनारे पसरते दुकानों के अस्थायी ढांचे और कहीं-कहीं बिना सोचे लगाए गए स्पीड ब्रेकर ने पूरे शहर के यातायात तंत्र को चरमराकर रख दिया है। फ्लाईओवर और बाईपास जैसे बड़े प्रोजेक्ट तो तैयार कर दिए गए, लेकिन शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या उससे बिल्कुल भी कम नहीं हुई। हालात यह हो चुके हैं कि लोग कुछ ही किलोमीटर की दूरी तय करने में आधा घंटा से अधिक समय गंवा देते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने का दावा करने वाले अधिकारी भी यह मानते हैं कि शहर की सड़कें अपने वर्तमान बोझ को संभालने में अब सक्षम नहीं रहीं। ऐसे माहौल में वाहन चालकों के बीच तनाव, झुंझलाहट और दिनभर की भागदौड़ में समय की लगातार बर्बादी एक सामान्य दृश्य बन गया है।

दोपहर के समय चीमा चौराहे के आसपास की स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिसकी ताज़ा मिसाल आज देखने को मिली जब रामनगर रोड पर लंबी कतारों में फँसे वाहन एक-एक इंच सरकने को भी मोहताज रहे। ऑटो, ई-रिक्शा, बसें, ट्रक और छोटे वाहन सब एक-दूसरे से लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन सड़क पर इतनी भीड़ जमा हो चुकी थी कि किसी भी दिशा में कोई रास्ता नहीं बचा था। कई दोपहिया वाहन चालक बीच सड़क मोटरसाइकिल को हाथ से पकड़कर निकालने की कोशिश करते दिखे, लेकिन जगह न होने की वजह से उनकी कोशिश भी विफल होती रही। जाम में खड़े लोग लगातार समय देखते रहे और कुछ लोग फोन पर अपनी देरी की मजबूरी बताते रहे। स्थिति इस हद तक बिगड़ गई कि आसपास के दुकानदार भी सड़क पर खड़े होकर रास्ता खुलने का इंतजार करते दिखाई दिए। किसी को अस्पताल पहुँचने की जल्दी थी, कोई अपने ऑफिस और दुकान देर से खुलने पर परेशान था, जबकि कुछ स्कूली बच्चे धूप में खड़े-खड़े थकते देखे गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम की समस्या बढ़ने के पीछे शहर की योजना विहीन विकास शैली सबसे बड़ा कारण है। उनका कहना है कि वर्षों से ट्रैफिक का दबाव बढ़ता गया, लेकिन उसी अनुपात में सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग स्थलों की व्यवस्था या वैकल्पिक मार्गों का सही प्रबंधन नहीं हो पाया। फ्लाईओवर भले ही बन गया हो, लेकिन शहर के भीतर रोजाना लगने वाली भीड़ उसी गति से जारी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क किनारे बढ़ता अतिक्रमण यातायात अवरोध का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस इस दिशा में सिर्फ औपचारिक कदम उठाते दिखते हैं। कई बार तो फुटपाथ पर चलने की जगह भी नहीं बचती, जिससे पैदल यात्री भी सड़क पर उतरने को मजबूर होते हैं और जाम की समस्या और अधिक गंभीर बन जाती है। शहर के बीचोंबीच खड़े हो जाने वाले भारी वाहन भी एक बड़ी दिक्कत बन चुके हैं, जो नियमों को ताक पर रखकर जहां-तहाँ रुक जाते हैं।

यातायात नियंत्रण में तैनात पुलिसकर्मी भी कई बार इस भीड़ के सामने असहाय नजर आते हैं। आज भी चीमा चौराहे के पास कुछ जवान व्यवस्था संभालने की कोशिश करते दिखे, लेकिन वाहनों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। कई वाहन चालक इस बात की शिकायत करते दिखे कि पुलिस सिर्फ सिग्नल पर डंडा लेकर खड़ी रहती है, लेकिन वास्तविक समस्याकृयानी अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और जगह-जगह खड़े रिक्शों को हटाने की दिशा में उनकी सक्रियता कम ही दिखाई देती है। कई लोग यह भी सवाल उठाते हैं कि जब शहर छोटा है और रास्ते सीमित हैं, तो ट्रैफिक पुलिस को जाम वाले समय पर अतिरिक्त बल तैनात करना चाहिए। इसके बावजूद, कई बार भीड़ अपने आप ही छँटती है और लोग घंटों की देरी के बाद राहत की सांस लेते हैं।

लोगों में अब यह धारणा बनने लगी है कि काशीपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान शायद निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता। हर नए दिन के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि सड़कें वही पुरानी चौड़ाई लिए खड़ी हैं। ऐसे में जाम का बोझ दिन-ब-दिन और अधिक बढ़ना स्वाभाविक है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन अभी भी सख्त रणनीति नहीं बनाता तो आने वाले दिनों में स्थिति और बदतर हो जाएगी। शहरवासी यह उम्मीद जरूर करते हैं कि शासन और प्रशासन मिलकर कोई ऐसी दीर्घकालिक योजना तैयार करे, जिससे मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण हटे, पार्किंग व्यवस्था सुधरे और ट्रैफिक पुलिस सक्रिय भूमिका निभाए। फिलहाल, काशीपुर का यातायात तंत्र अपनी सीमाओं के अंतिम छोर पर खड़ा दिखाई देता है, और रोजाना सड़क पर उतरने वाला हर व्यक्ति यही सोचता है कि आखिर कब शहर को इस भीषण जाम से राहत मिलेगी।

गुजरते दिन के साथ यह संकट लोगों के जीवन, समय और धैर्य—तीनों पर भारी पड़ रहा है। शहर की वर्तमान स्थिति इस ओर संकेत करती है कि यदि अब भी ठोस, सख्त और दूरदर्शी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में काशीपुर का यातायात एक ऐसे बोझ में बदल जाएगा, जिसे संभालना प्रशासन के लिए भी मुश्किल होगा। यह केवल ट्रैफिक का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के विकास, व्यवस्था और नागरिक जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा संकट है।

जनता की उम्मीदें अब प्रशासन की अगली चाल पर टिकी हैं। लोग चाहते हैं कि कागज़ों में नहीं, जमीन पर उतरने वाले समाधान आएं—ऐसे समाधान जो सड़कें चौड़ी करने से लेकर अवैध पार्किंग हटाने, ट्रैफिक कर्मियों की संख्या बढ़ाने, स्मार्ट सिग्नल लगाने और मुख्य मार्गों पर सख्त निगरानी जैसे बदलावों को तुरंत लागू करें। काशीपुर की सड़कों पर बढ़ता दबाव हमें यह याद दिलाता है कि शहरों की पहचान सिर्फ इमारतों और फ्लाईओवर से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि लोग कितनी सहजता से चल-फिर सकते हैं।

अब वह दौर आ चुका है जब काशीपुर को बदलते हालात और बढ़ते दबाव को देखते हुए ट्रैफिक अव्यवस्था को खत्म करने के लिए कठोर और स्पष्ट निर्णय लेने ही होंगे। लगातार बढ़ते वाहनों, कमजोर प्रबंधन और अव्यवस्थित सड़क ढांचे ने शहर की रफ्तार को जिस तरह जकड़ रखा है, उसे अनदेखा करना अब संभव नहीं रहा। यदि प्रशासन सच में काशीपुर को भविष्य के लिए तैयार देखना चाहता है, तो उसे सड़कों को सुचारू करने, अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था सुधारने और आधुनिक यातायात नियंत्रण प्रणाली लागू करने जैसे कदमों को प्राथमिकता देनी होगी। शहर की प्रगति का रास्ता तभी खुल पाएगा जब उसकी सड़कें बोझमुक्त होंगी और लोग बिना जाम में फँसे सहजता से अपने गंतव्य तक पहुँच सकेंगे। काशीपुर का विकास उसी क्षण गति पकड़ेगा जब उसकी सड़कें वाकई खुलेंगी।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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