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बिजली विभाग और जेई की मनमानी से बेहाल ग्रामीणों में फूटा प्रचंड आक्रोश

भीषण गर्मी में बिना पूर्व सूचना घंटों अघोषित रोस्टिंग से जनजीवन अस्त-व्यस्त, संवेदनहीन अधिकारियों और जिम्मेदार जेई की कार्यप्रणाली पर जनता ने उठाए तीखे सवाल, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी।

काशीपुर। भीषण धूप और उमस से झुलसते मौसम के बीच उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर के देहाती अंचलों में ऊर्जा निगम की घोर लापरवाही ने आम नागरिकों का जीवन नर्क बनाकर रख दिया है। ग्रामीण इलाकों में बिना किसी पूर्व चेतावनी या आधिकारिक घोषणा के लगातार कई-कई घंटों तक की जा रही अघोषित बिजली रोस्टिंग ने समूचे क्षेत्र में हाहाकार मचा रखा है। इस दमघोंटू गर्मी में जब इंसान को सांस लेने तक के लिए हवा की जरूरत महसूस हो रही है, तब विद्युत वितरण खंड की इस मनमानी ने लोगों को खून के आंसू रुलाने पर मजबूर कर दिया है। देहात के कोने-कोने में जैसे ही दिन ढलता है या दोपहर की प्रचंड किरणें बरसती हैं, वैसे ही बिना किसी तकनीकी खराबी की जानकारी दिए बिजली गुल कर दी जाती है। इस भयानक अंधेरगर्दी से साफ जाहिर होता है कि संबंधित बिजली विभाग को न तो जनता की तकलीफों से कोई सरोकार रह गया है और न ही अपनी जिम्मेदारियों का लेशमात्र अहसास है।

अघोषित रूप से थोपी जा रही इस अंधाधुंध कटौती की सबसे ज्यादा मार अब मासूम नौनिहालों, बीमार लाचारों और बुजुर्गों पर पड़ रही है, जो पूरी-पूरी रात पसीने से तर-बतर होकर तड़पने को विवश हैं। रात के अंधेरे में घंटों तक बत्ती गायब रहने के कारण न केवल ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं, बल्कि मच्छर और कीड़े-मकोड़ों के खौफ के बीच अंधेरे के साए में जीने के लिए अभिशप्त हो चुके हैं। यही नहीं, दिनभर बिजली न रहने के कारण पीने के पानी से लेकर खेती-किसानी और दैनिक कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं, जिससे घरों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। ग्रामीण बार-बार इस बात का दुखड़ा रो रहे हैं कि उन्हें यह तक मालूम नहीं हो पाता कि अचानक बंद हुई यह बिजली आखिर कितनी देर में वापस बहाल होगी। ऊर्जा आपूर्ति के इस घटिया और अनियमित प्रबंधन ने देहात के जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है, लेकिन महकमे के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक और भड़काऊ पहलू यह है कि जब भी परेशान नागरिक अपनी शिकायत लेकर बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचते हैं या संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) से संपर्क करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें केवल निराशा, टालमटोल और उपेक्षा ही हाथ लगती है। क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर (जेई) और मातहत कर्मचारियों की कार्यशैली इस कदर संवेदनहीन हो चुकी है कि वे जनता के फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझते। यदि गलती से कोई फोन उठ भी जाए तो तकनीकी खराबी या ऊपर से रोस्टिंग का घिसा-पिटा बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। जेई और विभाग के आला अफसरों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया इस बात का पुख्ता सबूत है कि उन्हें जनसमस्याओं के समाधान से ज्यादा अपनी आरामपरस्ती अजीज है। जब जिम्मेदार ओहदेदार ही फोन बंद करके बैठ जाएं, तो फिर ग्रामीण अपनी गुहार लगाने किसके पास जाएं?

स्थानीय निवासियों का आक्रोश इस बात को लेकर सबसे ज्यादा उफान पर है कि आखिर किसी भी प्रकार की रोस्टिंग या शटडाउन से पहले सार्वजनिक सूचना जारी करने की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी से बिजली विभाग क्यों भाग रहा है? यदि किसी तकनीकी व्यवधान, मरम्मत कार्य या ट्रांसफॉर्मर सुधार के चलते बिजली बंद करना बेहद अनिवार्य भी होता है, तो उसकी अग्रिम जानकारी समाचार पत्रों, मुनादी या मैसेजिंग के जरिए जनता तक पहुंचाई जानी चाहिए। मगर काशीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए बिना बताए बिजली का स्विच बंद कर देना विभाग की तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है। शहरों में तो फिर भी कुछ हद तक समय-सारणी का ध्यान रखा जाता है, लेकिन देहाती इलाकों को पूरी तरह से भाग्य के भरोसे छोड़ दिया गया है। पारदर्शी सूचना तंत्र के अभाव में आम जनता खुद को ठगा और असहाय महसूस कर रही है।

विभाग की इस घोर कार्यप्रणाली ने अब ग्रामीणों के सब्र का बांध पूरी तरह से तोड़ दिया है और पूरे इलाके में विभागीय तंत्र के खिलाफ प्रचंड जनाक्रोश पनप रहा है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों और जेई की सांठगांठ तथा कामचोरी के कारण ही ग्रामीण क्षेत्रों को जानबूझकर इस भयानक बिजली संकट की भट्टी में झोंका जा रहा है। कई बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुई की नोक बराबर भी सुधार न होना इस बात की तस्दीक करता है कि नीचे से लेकर ऊपर तक पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार और निकम्मेपन का शिकार हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने वाली वैध बिजली कटौती के नाम पर कहां गोलमाल की जा रही है, यह भी एक बड़ा सवाल बन चुका है। विद्युत आपूर्ति के नाम पर सिर्फ बिलों की वसूली के लिए तत्पर रहने वाला यह विभाग सुविधाएं देने के समय पूरी तरह से हाथ खड़े कर लेता है।

अब समूचे काशीपुर ग्रामीण क्षेत्र की जनता ने ऊर्जा निगम के शीर्ष अधिकारियों, शासन और प्रशासन के सामने सीधे तीखे सवाल दागे हैं और इस तानाशाही के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। क्या देहाती क्षेत्रों में अघोषित कटौती का कोई नियम-कानून है या फिर यह सब केवल स्थानीय जेई और अधिकारियों की मनमर्जी का खेल है? आखिर जनता को अपने ही हक की बिजली की कटौती का रोस्टर जानने का अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इस भयानक रोस्टिंग के नरक से ग्रामीण जनता को आखिरकार कब तक मुक्ति मिलेगी? उग्र हो चुके ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि काशीपुर के बेपरवाह जेई और संबंधित लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा इस मनमानी रोस्टिंग पर तुरंत पूर्ण विराम लगाया जाए, अन्यथा उग्र आंदोलन ही अंतिम रास्ता बचेगा।

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