काशीपुर। बुनियादी ढांचे की खस्ताहाल स्थिति को लेकर नगर की जनता की पीड़ा अब सीधे जिम्मेदार विभागों तक पहुंचाई गई है। नगर निगम क्षेत्र में आते हुए भी राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी वाले हिस्सों पर लंबे समय से उपेक्षा का आलम छाया है, जिसके चलते आम लोगों का जीना दूभर हो गया है। इसी समस्या को गंभीरता से उठाते हुए महापौर दीपक बाली ने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के हल्द्वानी कार्यालय तथा लोक निर्माण विभाग काशीपुर को अलग-अलग पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि नगर के मुख्य मार्गों और सर्विस रोड की टूट-फूट के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और नाले बंद पड़े रहने से दुकानदारों से लेकर राहगीरों और आसपास की बस्तियों में रहने वालों तक सबको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यह क्षेत्र भले ही नगर निगम की सीमा में दिखाई देते हों लेकिन वास्तविकता में यह एनएच और लोक निर्माण विभाग के दायरे में आते हैं, लिहाजा सुधार की जिम्मेदारी इन्हीं विभागों की है।
फ्लाईओवर के दोनों ओर की सर्विस रोड की हालत बेहद खराब बताई गई है, जहां जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़कें वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए खतरा बन चुकी हैं। महापौर दीपक बाली ने लिखा है कि इस वजह से आए दिन दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आ रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यहां के नाले पूरी तरह से जाम पड़े हुए हैं, जिससे जल निकासी नहीं हो पा रही और बारिश के समय जलभराव की स्थिति और भयावह हो जाती है। दुकानदारों के प्रतिष्ठान, मार्ग से गुजरने वाले लोग और आसपास रहने वाले नागरिक इस समस्या के कारण बहुत परेशान हैं। उन्होंने विभाग से यह आग्रह किया है कि जहां पुराने नालों की मरम्मत आवश्यक है, वहां तुरंत काम किया जाए और जहां नए नालों की जरूरत है, वहां तत्काल निर्माण कराया जाए ताकि जलभराव की समस्या से स्थायी समाधान निकल सके। महापौर ने साफ कहा है कि जनता को राहत देने के लिए यह कार्यवाही बिना विलंब किए की जानी चाहिए क्योंकि नगरवासियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
मानपुर रोड की स्थिति का जिक्र करते हुए महापौर दीपक बाली ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र में अवगत कराया है कि इस मार्ग पर पानी का जमाव तीन से चार फीट तक हो जाता है। इस कारण आमजन को यातायात में कठिनाई का सामना करना पड़ता है और आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों के घरों तक पानी घुस जाता है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम रोड से मानपुर तिराहा होते हुए गैबिया नहर तक दोनों ओर नाले बनाए जाने से इस समस्या का स्थायी समाधान होगा और वार्ड संख्या 35, 39 और 40 के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। इन वार्डों के पार्षद और स्थानीय लोग लगातार नालों के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। महापौर ने यह भी कहा कि जिन जगहों पर पहले से नाले बने हैं, वहां अतिक्रमण के कारण उन्हें ढक दिया गया है, जिसके चलते उनकी सफाई नहीं हो पा रही और यही जलभराव का मुख्य कारण बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अतिक्रमण हटाए बिना सफाई संभव नहीं है और विभाग को इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे।
गुरुद्वारा रोड पर एक रिसॉर्ट के सामने की स्थिति का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है। यहां गैबिया से होकर ढेला नदी में पानी की निकासी होती है, लेकिन संकरी जगह होने के कारण पानी का दबाव सीधे सड़क पर आ जाता है और आसपास की बस्तियों में भर जाता है। नतीजतन स्थानीय लोगों को हर बरसात में भयंकर जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। महापौर दीपक बाली ने विभाग से कहा है कि इस जगह को चौड़ा कर पानी के निकास की सही व्यवस्था की जाए ताकि सड़क और मोहल्लों में पानी न भरे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समस्या वर्षों से ज्यों की त्यों बनी हुई है और जनता इसकी पीड़ा बार-बार उठाती रही है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले हैं। अब समय आ गया है कि विभाग तुरंत कार्यवाही करे और जनता को इस त्रासदी से मुक्ति दिलाए।
जनहित में उठाए गए इन मुद्दों पर महापौर दीपक बाली ने संबंधित विभागों से यह भी आग्रह किया है कि उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी उन्हें भी उपलब्ध कराई जाए ताकि नगर निगम स्तर पर भी स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल कागजी कार्यवाही का विषय नहीं है बल्कि हजारों नागरिकों के जीवन से जुड़ी हुई गंभीर समस्या है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नगर के व्यापारी, राहगीर और स्थानीय बाशिंदे बार-बार इन हालात से गुजर रहे हैं और प्रशासन से केवल ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और लोक निर्माण विभाग इस दिशा में कितनी तत्परता दिखाते हैं और काशीपुर की जनता को इस लंबे समय से चली आ रही मुश्किलों से राहत कब तक मिल पाती है।



