काशीपुर। काशीपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा के आवास पर पहुंचे उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने मीडिया से विस्तृत बातचीत करते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया “वोट चोर, गद्दी छोड़ अभियान” केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है, जिसका मकसद सड़क से लेकर संसद तक जनता की आवाज़ बुलंद करना है। करन माहरा ने कहा कि मौजूदा हालात लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक हैं, क्योंकि जब कांग्रेस या आम नागरिक चुनाव आयोग से सवाल पूछते हैं तो जवाब भाजपा के प्रवक्ताओं की ओर से सामने आते हैं, जबकि सरकार से सवाल करने पर चुनाव आयोग के अधिकारी आगे आ जाते हैं। उन्होंने इसे संस्थाओं की निष्पक्षता पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि इससे पूरी व्यवस्था पर संदेह पैदा होता है। करन माहरा ने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में संवैधानिक संस्थाएं अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाने में विफल हो रही हैं, जिसका नुकसान सीधे जनता के विश्वास और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पहुंच रहा है।
लोकतंत्र की जड़ों पर हो रहे प्रहार का जिक्र करते हुए करन माहरा ने महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के उदाहरण सामने रखे। उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति का कई राज्यों में मतदाता होना, एक छोटे से कमरे में अस्सी लोगों का दर्ज होना और एक व्यक्ति के नाम पर दर्जनों मतदाता जुड़े होने जैसी घटनाएं सामान्य नहीं कही जा सकतीं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कैसे एक व्यक्ति पांच राज्यों में वोटर बन सकता है और कैसे बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के उत्तराखंड में मतदाता सूची से जुड़े अभियान शुरू हो जाते हैं। करन माहरा ने कहा कि जब मतदाता सूची में नाम जोड़े और हटाए जा रहे हों तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, क्योंकि इससे आम नागरिक के मताधिकार पर सीधा असर पड़ता है।
मतदाता सूची की प्रक्रिया पर विस्तार से बात करते हुए करन माहरा ने कहा कि पहले लोगों को मतदान के अधिकार के प्रति जागरूक किया जाता था, रेडियो और प्रचार माध्यमों से वोट डालने की अपील होती थी, लेकिन आज स्थिति उलट हो गई है। उन्होंने कहा कि लोग अपने नाम खोजने के लिए भटक रहे हैं और कई मामलों में सही मतदाता सूची से बाहर हो रहे हैं। उनका कहना था कि चुनाव आयोग को ऐसा पारदर्शी तंत्र बनाना चाहिए, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से यह जांच सके कि वह पहले कब और कहां मतदाता था, ठीक उसी तरह जैसे आधार कार्ड बनाते समय मोबाइल टीम घर-घर जाकर सत्यापन करती थी। करन माहरा ने आरोप लगाया कि बिना नियम लागू हुए ही उत्तराखंड में SIR कि प्रक्रियाएं शुरू हो गईं, जिससे संदेह और गहराता है।
राज्य की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर भी करन माहरा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उत्तरकाशी समेत कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने 2022 के भर्ती घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय इस्तीफा तो दिया गया, लेकिन बाद में फिर वही घटनाएं दोहराई गईं और अब किसी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली जा रही। करन माहरा ने सवाल किया कि जब इतने गंभीर मामले सामने आए हैं तो प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा कि खनन, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के मुद्दे संसद तक उठे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
धार्मिक स्थलों और विकास परियोजनाओं के नाम पर हुए कथित घोटालों का उल्लेख करते हुए करन माहरा ने केदारनाथ मंदिर से जुड़े सोने के दान और कर कॉरिडोर के मुद्दे को सामने रखा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अखबारों में यह खबर छपती रही कि सैकड़ों किलो सोना दान में दिया गया, लेकिन जब कांग्रेस नेताओं गणेश गोदियाल और करन माहरा ने सवाल उठाए तो सरकार का जवाब बदल गया। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने खंडन तक नहीं किया और बाद में कहा गया कि केवल 27 किलो सोना था, जिस पर पानी की परत चढ़ाई गई। करन माहरा ने इसे जनता के साथ छल बताते हुए कहा कि आपदा के समय हुए खर्च और दान की पारदर्शी जानकारी आज तक सामने नहीं आई।
चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए करन माहरा ने केदारनाथ, बद्रीनाथ और मंगलौर उपचुनावों के आंकड़े गिनाए। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद शायद ही ऐसा हुआ हो कि पांच से सात प्रतिशत वोट बढ़ने के बावजूद कोई प्रत्याशी हार गया हो, लेकिन केदारनाथ में ऐसा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि चार महीनों के भीतर हजारों वोट काटे गए और नए वोट जोड़े गए, जो सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती। मंगलौर में पत्रकारों की मौजूदगी और अनुपस्थिति के आधार पर मतदान प्रतिशत में अंतर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को मतदान से रोके जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए, जो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक हैं।
मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर भी करन माहरा ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में नेहरू और इंदिरा गांधी के खिलाफ तीखी आलोचना होती थी, लेकिन तब भी पत्रकारों को सम्मान और सुरक्षा मिलती थी। आज स्थिति यह है कि उत्तराखंड में पत्रकारों को जेल भेजा जा रहा है और सरकार की आलोचना करने वालों पर कार्रवाई का डर बना हुआ है। करन माहरा ने सवाल किया कि जब मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तो उनकी फुटेज देने से क्यों मना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों की देश-विदेश के पत्रकारों ने तारीफ की, फिर भी चुनाव आयोग जवाब देने से बच रहा है।
उत्तराखंड की बुनियादी समस्याओं का जिक्र करते हुए करन माहरा ने पहाड़ों में पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बदहाली पर बात रखी। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ, शिक्षकों और डॉक्टरों की कमी से आम जनता परेशान है। कोरोना काल में जिन नर्सों को फूल बरसाकर सम्मान दिया गया, आज वही सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं और उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। करन माहरा ने कहा कि भाजपा की नीतियों ने युवाओं के सपने तोड़ दिए हैं और रोजगार के अवसर खत्म कर दिए हैं।
नर्सिंग आंदोलन को लेकर पूछे गए सवाल पर उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने बेहद संवेदनशील और तीखे शब्दों में सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन आज का नहीं है, बल्कि लंबे समय से कभी सिडकुल वाले, कभी उपनल वालेओी अब नर्सिंग वाले अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है।उन्होने कहा कि दुखद पहलू यह है कि पुलिस की सख्ती के जरिए इन आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जा रही है। करन माहरा ने याद दिलाया कि कोरोना काल के सबसे कठिन दौर में जब स्थायी कर्मचारी पीछे हटे थे, तब इन्हीं नर्सिंग कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की थी। उस समय सरकार और समाज ने उन पर फूल बरसाए, गुलाब की पंखुड़ियां डालीं और उन्हें “कोरोना योद्धा” कहा गया, लेकिन जैसे ही हालात सामान्य हुए, वही योद्धा आज लाठियों और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भाजपा सरकार का असली चेहरा है, जो ज़रूरत पड़ने पर सम्मान देती है और बाद में हक़ मांगने पर दमन करती है। करन माहरा ने साफ कहा कि कांग्रेस ऐसे अन्याय के खिलाफ पूरी मजबूती से खड़ी है और संघर्ष जारी रहेगा।
अंत में करन माहरा ने कहा कि कांग्रेस किसी एक चेहरे के बजाय सामूहिक नेतृत्व में संघर्ष कर रही है और यह दिशा मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा तय की गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डरने वालों की राजनीति अब नहीं चलेगी और कांग्रेस “अटैक इज द बेस्ट डिफेंस” की नीति पर आगे बढ़ेगी। करन माहरा ने भरोसा जताया कि यदि जनता को सच्चाई समझ में आ गई तो लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस की लड़ाई रंग लाएगी।



