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काशीपुर बार चुनाव 2025–26 में गैर प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता तय करेंगे प्रत्याशियों की किस्मत:सिन्धु आकाश

सहारा प्रजातंत्र से बातचीत में सिन्धु आकाश ने बार चुनाव की बदलती तस्वीर पर चिंता जताई, कहा सक्रिय अधिवक्ताओं से अधिक प्रभाव इस बार उन सदस्यों का दिखेगा जो नियमित प्रैक्टिस में शामिल नहीं हैं, जिससे नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।

काशीपुर। बार एसोसिएशन के चुनाव 2025-26 को लेकर अधिवक्ताओं के बीच चर्चा तेज होती जा रही है और इसी क्रम में पूर्व उप-सचिव सिन्धु आकाश ने ‘‘हिन्दी दैनीक सहारा प्रजातंत्र’’ से बातचीत करते हुए चुनावी व्यवस्था पर कई अहम सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन का चुनाव केवल पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि संगठन की दिशा आने वाले वर्षों में किस ओर जाएगी। उनका कहना था कि बीते कुछ वर्षों में बार के भीतर जो परिस्थितियां बनी हैं, उनसे यह स्पष्ट है कि अब चुनाव केवल सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के हाथ में नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में ऐसे अधिवक्ता, जो नियमित रूप से न्यायालय में प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं, चुनावी गणित को प्रभावित करने की स्थिति में आ गए हैं। यही वर्ग इस बार प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेगा, जो बार की कार्यशैली और विश्वसनीयता के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

चुनावी प्रक्रिया पर आगे बोलते हुए सिन्धु आकाश ने कहा कि बार एसोसिएशन मूल रूप से उन अधिवक्ताओं का संगठन है, जो प्रतिदिन न्यायालय में उपस्थित रहकर मुवक्किलों के मामलों की पैरवी करते हैं और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। ऐसे में यदि गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की संख्या अधिक होकर चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है, तो यह बार के मूल उद्देश्य के विपरीत होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं है, बल्कि एक वस्तुस्थिति है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार चुनाव में मताधिकार का अधिकार सभी सदस्यों को है, लेकिन जब वही सदस्य सक्रिय रूप से बार की गतिविधियों से जुड़े न हों, तब उनके निर्णय से संगठन की दिशा तय होना कई तरह की असमानताएं पैदा कर सकता है। यह स्थिति आने वाले समय में बार के आंतरिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।

सहारा प्रजातंत्र से बातचीत में सिन्धु आकाश ने यह भी कहा कि काशीपुर बार एसोसिएशन कुमाऊं क्षेत्र की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित बार एसोसिएशनों में से एक है। इसकी गरिमा और परंपरा को बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि चुनाव केवल गुटबाजी, प्रभाव और संख्या बल पर आधारित हो जाएंगे, तो संगठन की साख को नुकसान पहुंचेगा। उनके अनुसार बीते चुनावों में भी यह देखा गया है कि कई बार मुद्दों की जगह व्यक्तिगत समीकरण हावी हो जाते हैं, जिससे योग्य और सक्रिय अधिवक्ता पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव इस मायने में बेहद अहम है कि यह तय करेगा कि बार एसोसिएशन अपने मूल सिद्धांतों पर चलेगी या फिर केवल औपचारिक संस्था बनकर रह जाएगी।

अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की भूमिका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन जब उनकी संख्या निर्णायक हो जाए, तब समस्या उत्पन्न होती है। सिन्धु आकाश का कहना था कि चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों को इस सच्चाई को समझना होगा और अपनी रणनीति उसी अनुसार बनानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रत्याशी इस वर्ग को साधने में लगे हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव का रुख किस ओर जा रहा है। यह प्रवृत्ति स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए शुभ संकेत नहीं कही जा सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बार के सक्रिय सदस्यों को भी इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अपने मत का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।

बातचीत के दौरान सिन्धु आकाश ने बार एसोसिएशन की आंतरिक राजनीति पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय अक्सर ऐसे मुद्दे उछाले जाते हैं, जिनका बार के वास्तविक हितों से कोई सीधा संबंध नहीं होता। विकास, सुविधाएं और अधिवक्ताओं की समस्याओं की जगह व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप हावी हो जाते हैं। उनका मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो बार एसोसिएशन का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं का झुकाव अक्सर उन प्रत्याशियों की ओर होता है, जो उन्हें व्यक्तिगत लाभ या भविष्य के वादे देते हैं, न कि बार के सामूहिक हित की बात करते हैं। यही कारण है कि इस बार चुनाव परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं।

आने वाले चुनाव को लेकर उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से विशेष अपील भी की। सिन्धु आकाश ने कहा कि युवा वर्ग को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी, क्योंकि वही बार का भविष्य है। यदि युवा अधिवक्ता चुप रहेंगे और निर्णय दूसरों पर छोड़ देंगे, तो संगठन की दिशा तय करने का अवसर उनके हाथ से निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन केवल चुनावी संस्था नहीं है, बल्कि यह अधिवक्ताओं की आवाज और उनके अधिकारों की रक्षा का मंच है। ऐसे में हर सदस्य को यह समझना होगा कि उसका एक-एक मत कितना महत्वपूर्ण है। गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की बढ़ती भूमिका को संतुलित करने के लिए सक्रिय अधिवक्ताओं को संगठित होकर सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।

अपने बयान में सिन्धु आकाश ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव समिति निष्पक्ष तरीके से पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी और किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जाएगा। उनका कहना था कि यदि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे, तो इसका सीधा असर बार एसोसिएशन की साख पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सहारा प्रजातंत्र जैसे समाचार पत्रों की भूमिका इस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि मीडिया के माध्यम से ही अधिवक्ताओं तक सही जानकारी पहुंचती है। पारदर्शी रिपोर्टिंग से चुनावी माहौल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

अंत में सिन्धु आकाश ने कहा कि काशीपुर बार एसोसिएशन का यह चुनाव केवल पदों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह संगठन की आत्मा और भविष्य की दिशा तय करने वाला है। गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर गंभीर मंथन की जरूरत है। उन्होंने दोहराया कि यदि इस मुद्दे को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में बार के सामने और भी जटिल समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। उनका मानना है कि सभी सदस्यों को मिलकर ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं की भूमिका मजबूत हो और संगठन अपने मूल उद्देश्यों पर खरा उतर सके। यही इस चुनाव की सबसे बड़ी परीक्षा है और यही काशीपुर बार एसोसिएशन के भविष्य की असली कसौटी भी।

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