काशीपुर। नगर में दिवाली के त्यौहार के बाद नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गई है। नगर के प्रमुख इलाकों में जगह-जगह कूड़े के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं, जिससे नागरिकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। कटोरा ताल, चौकी मुंशी राम चौराहा, किला चौराहा और अन्य क्षेत्रों में कूड़े के ढेर शहर की छवि को पूरी तरह बिगाड़ रहे हैं। शहर की गलियों और प्रमुख बाजारों में गंदगी का यह हाल यह संकेत दे रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की यहां धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल उठता है कि आखिर काशीपुर नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में क्यों नाकाम साबित हो रहा है और क्या महापौर ’’दीपक बाली’’ के निर्देशों की कोई अहमियत नगर निगम प्रशासन के लिए बची है।
नगरवासियों का कहना है कि त्योहार के मौके पर सफाई व्यवस्था का पूरी तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए था, लेकिन अब पूरे शहर में दुर्गंध और गंदगी का साम्राज्य देखने को मिल रहा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर निगम ने दिवाली से पहले क्या तैयारी की थी और इतनी बड़ी संख्या में कूड़े के ढेर शहर के प्रमुख चौराहों पर क्यों जमा हो गए। क्या नगर निगम की टीम समय पर सफाई नहीं कर रही है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने दायित्वों को नजरअंदाज किया है? नागरिकों का यह भी सवाल है कि महापौर ’’दीपक बाली’’ के आदेशों के बावजूद नगर निगम कर्मचारियों ने काम में लापरवाही क्यों दिखाई।

कटोरा ताल क्षेत्र में स्थिति सबसे गंभीर नजर आ रही है, जहां कूड़े के ढेर इतने बड़े हैं कि आमजन को वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा चौकी मुंशी राम चौराहा और किला चौराहा पर भी कूड़े का प्रकोप दिखाई दे रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि नगर निगम ने शहर की सफाई और सुंदरता के लिए क्या कदम उठाए हैं। क्या नगर निगम अधिकारियों को अपने शहर की सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व का एहसास नहीं है? क्या यह ठीक है कि शहर के लोगों को त्यौहार के बाद गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़े?
नगर के व्यापारी और दुकानदार भी इस स्थिति से परेशान हैं। उनका कहना है कि त्योहार के बाद कूड़े के ढेर से ग्राहक कम आने लगे हैं और व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। कई दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर महापौर ’’दीपक बाली’’ के निर्देशों के बावजूद निगम ने सफाई के लिए क्या किया और क्यों यह व्यवस्था पूरी तरह से चौपट नजर आ रही है। क्या नगर निगम की टीम अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह है या फिर संसाधनों की कमी इस स्थिति का कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या नगर निगम के पास पर्याप्त वाहन और कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं, जिनकी वजह से सफाई नहीं हो रही।
नगरवासियों का यह भी सवाल है कि शहर की रैंकिंग और स्वच्छता के लिए जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों निष्क्रिय हैं। क्या काशीपुर नगर निगम को प्रधानमंत्री ’’स्वच्छ भारत अभियान’’ की महत्ता का एहसास नहीं है? क्या निगम यह सोच रहा है कि कोई यह गंदगी नोटिस नहीं करेगा? जनता को यह जानने की जरूरत है कि आखिर कब तक नगर निगम महापौर ’’दीपक बाली’’ के निर्देशों की अवहेलना करता रहेगा और शहरवासियों की समस्याओं को हल करने के लिए सक्रिय होगा।
कहा जा सकता है कि शहर के कई इलाकों में यह स्थिति आम जनता के लिए खतरा भी बन सकती है। गंदगी के ढेर से संक्रमण और रोग फैलने का खतरा बढ़ता है। नागरिक यह सवाल उठाते हैं कि क्या नगर निगम इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है या फिर सिर्फ कागजों तक ही कार्रवाई सीमित है? क्या नगर निगम के अधिकारी जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सचेत हैं? और क्या महापौर ’’दीपक बाली’’ इस गंदगी की समस्या का समाधान करने के लिए किसी ठोस योजना पर काम कर रहे हैं?

शहरवासियों ने यह भी मांग की है कि नगर निगम को तुरंत सफाई अभियान शुरू करना चाहिए और त्योहार के बाद शहर के प्रमुख क्षेत्रों से कूड़े को हटाया जाना चाहिए। कई लोगों ने सवाल किया कि क्या निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी? क्या उन्हें भविष्य में ऐसी लापरवाही के लिए सजा दी जाएगी? और क्या नगर निगम इस प्रकार की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए लंबे समय तक इंतजार करने वाला है या तुरंत कार्रवाई करेगा?
इस पूरी स्थिति को देखते हुए सवाल उठता है कि आखिर काशीपुर नगर निगम अपने स्वच्छता और प्रशासनिक कर्तव्यों के प्रति कितनी गंभीर है। क्या महापौर ’’दीपक बाली’’ अपने निर्देशों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करेंगे? क्या नगर निगम शहरवासियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना बंद करेगा? और क्या काशीपुर नगर निगम अगले त्योहार से पहले पूरे शहर की सफाई और सुंदरता सुनिश्चित कर पाएगा? इन सवालों के जवाब शहरवासियों के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि केवल अच्छे शब्द और निर्देश से काम नहीं चलेगा, ठोस और त्वरित कार्रवाई ही नगर के लिए राहत और स्वच्छता सुनिश्चित कर सकती है।



