काशीपुर। आज छठ महापर्व की आस्था और उल्लास ने शहर को भक्ति के रंगों में रंग दिया। तड़के से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी, जिसने पूरे क्षेत्र को एक अद्भुत धार्मिक परिवेश में बदल दिया। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सजीं, सिर पर पूजा की टोकरी रखे, सूप में प्रसाद सजाए हुए बड़ी श्रद्धा से घाटों की ओर बढ़ती नजर आईं। हर दिशा से “छठ मैया की जय” और “सूर्य देव की जय” के स्वर गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और जल में खड़े होकर लोकगीतों के साथ अपनी मनोकामनाएं मांगीं। परंपरागत पूजा विधि के साथ किए गए इस अनुष्ठान ने धार्मिक वातावरण को और अधिक भव्य बना दिया। सूर्य देव की आराधना और छठ व्रत की पवित्रता ने माहौल को अद्वितीय बना दिया।
सुबह की पहली किरण के साथ ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। व्रतधारी महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी शुरू की। यह दृश्य देखते ही बनता था, जब महिलाएं पूरी श्रद्धा और संकल्प के साथ जल में खड़ी होकर सूर्य को नमन कर रही थीं। घाटों पर बच्चों की चहक, पुरुषों की व्यवस्था में भागीदारी और स्त्रियों की भक्ति से पूरा क्षेत्र जीवंत हो उठा। धार्मिक गीतों की मधुर धुनें वातावरण में गूंजती रहीं, जिनसे भक्तिभाव और भी गहराता चला गया। सूर्यास्त के समय जब जल में दीपों की लौ लहराई, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक हो गया। हर आंख में भक्ति, हर चेहरे पर शांति और हर मन में आस्था का सागर दिखाई दिया।
काशीपुर के प्रमुख घाटों पर आज छठ पर्व का नज़ारा किसी उत्सव से कम नहीं था। घाटों पर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आस-पास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस पवित्र क्षण का साक्षी बनने को आतुर दिखा। नगर के हर कोने में सजावट की गई थी, जगह-जगह रंगीन झालरें और दीपों की पंक्तियाँ रोशनी बिखेर रही थीं। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद वितरित कर आनंद बांटा। आस्था का यह महासंगम सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना, जहां जाति, धर्म और वर्ग से परे सबने मिलकर सूर्य देव की आराधना की।
कार्यक्रम के दौरान काशीपुर के एसडीएम, स्थानीय विधायक और कई जनप्रतिनिधि घाटों पर पहुंचे और श्रद्धालुओं के बीच शामिल होकर छठ पूजा का महत्व साझा किया। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं से उनकी सुविधाओं के बारे में जानकारी भी ली। एसडीएम ने बताया कि यह पर्व काशीपुर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है और प्रशासन हर संभव सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाया, वह शहर की सामाजिक एकजुटता का परिचायक है।
पुलिस प्रशासन ने भी इस मौके पर विशेष भूमिका निभाई। ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और वाहनों के आवागमन को सुव्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार मुस्तैद रहे। प्रशासनिक सतर्कता और पुलिस की तत्परता के कारण पूरा आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रशासन की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस बार घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता के प्रबंध काफी बेहतर रहे।
भक्तों की सुविधा के लिए नगर प्रशासन ने सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। घाटों की नियमित सफाई कराई गई और आसपास की गलियों में भी स्वच्छता अभियान चलाया गया। शाम को प्रकाश व्यवस्था इतनी सुंदर थी कि पूरा क्षेत्र दीपोत्सव जैसा नजर आ रहा था। चिकित्सा सहायता के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात थी, जहां व्रतधारी महिलाओं और श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराई गई। नगर निगम कर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर यह सुनिश्चित किया कि घाटों पर कोई असुविधा न हो। इन व्यवस्थाओं ने काशीपुर के छठ महापर्व को और भी यादगार बना दिया।
महादेव नहर पर बने विभिन्न घाटो पर श्रद्धालुओं ने मन से छठ मैया की आराधना की। महिलाओं ने सूप में गन्ना, ठेकुआ, केला, सिंघाड़ा और नारियल सजाकर सूर्य देव को अर्पित किया। जब उदयीमान सूर्य की पहली किरण जल की लहरों पर पड़ी, तो पूरा घाट भक्तिमय प्रकाश से आलोकित हो उठा। लोगों ने कहा कि छठ पूजा न केवल धार्मिक पर्व है, बल्कि यह सूर्य और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा है।
काशीपुर की गलियों में आज पूरे दिन उत्सव का माहौल बना रहा। घरों से लेकर बाजारों तक छठ गीतों की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालु एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते नजर आए, जबकि बच्चे घाटों पर रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट देखकर खुश हो रहे थे। इस मौके पर लोगों ने कहा कि छठ पर्व आस्था, संयम और सादगी का प्रतीक है, जो समाज को एकजुट करने का संदेश देता है। काशीपुर में आज का दिन न केवल धार्मिक उल्लास का रहा, बल्कि इसने सामाजिक सौहार्द की भी नई मिसाल पेश की। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से भरा छठ महापर्व काशीपुर की सांस्कृतिक आत्मा को नई रोशनी में चमकाता हुआ यादगार बन गया।



