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उपभोक्ताओं की मांग स्मार्ट मीटर पहले सरकारी दफ्तरों और बाजारों में लगाए जाएं

बढ़ते बिजली बिलों से आक्रोशित उपभोक्ता बोले घरों पर बोझ डालने से पहले विभाग को सरकारी दफ्तरों और बाजारों में स्मार्ट मीटर लगाने चाहिए थे

काशीपुर। इन दिनों काशीपुर क्षेत्र में बिजली विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और यही कदम अब आम उपभोक्ताओं के लिए नई परेशानी बन गया है। जिन इलाकों में ये स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं वहां के उपभोक्ताओं के बिजली बिल अचानक ही आसमान छूने लगे हैं। जिन घरों के बिल पहले सामान्य सीमा में आते थे वहां अब हजार से पंद्रह सौ रुपये तक अतिरिक्त वसूली दिखाई दे रही है। यह बदलाव उपभोक्ताओं को हतप्रभ कर रहा है और उनके मन में स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर गहरी शंकाएं उठ रही हैं। लोगों का कहना है कि पहले जहां बिजली की खपत एक निश्चित स्तर पर रहती थी, अब अचानक बढ़े बिलों ने उन्हें चौंका दिया है और इस कारण स्मार्ट मीटर लगाने की मंशा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्मार्ट मीटरों की तकनीकी बनावट को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। मीटर पर कुल पांच लाइटें लगी हैं जिनमें चार लाल और एक हरी लाइट शामिल हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि इनमें से दो लाल लाइटें और एक हरी लाइट लगातार जल रही हैं, जबकि बाकी दो लाल लाइटें कभी जलती हैं तो कभी बंद हो जाती हैं। इस तरह का उतार-चढ़ाव उपभोक्ताओं को असमंजस की स्थिति में डाल रहा है। उनका कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर सही ढंग से काम कर रहे हैं तो आखिर ये लाइटें बार-बार क्यों जल-बुझ रही हैं। आम लोगों के लिए इन संकेतों का अर्थ समझना कठिन है और इससे उन्हें यह संदेह हो रहा है कि कहीं मीटर इस तरह से सेट तो नहीं किए गए कि बिजली की खपत अधिक दिखाई दे और बिल ज्यादा बने।

लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भी सामने आ रहा है कि जब स्मार्ट मीटरों की शुरुआत होनी थी तो इसे पहले उन स्थानों पर लागू किया जाना चाहिए था जहां बिजली की खपत अधिक होती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकारी और गैर-सरकारी विभाग, बड़े दफ्तर, मुख्य बाजार, बड़ी दुकानें और शोरूम जैसी जगहें पहले इस व्यवस्था के दायरे में आनी चाहिए थीं। वहां पर प्रतिदिन इतनी ज्यादा बिजली खर्च होती है कि वास्तविक परीक्षण वहीं से हो सकता था। लेकिन विभाग ने इसके विपरीत सीधे घरों में स्मार्ट मीटर लगाने शुरू कर दिए जिससे आम जनता की जेब पर सीधा बोझ बढ़ गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग ने यदि पहले अधिक खपत वाली जगहों पर मीटर लगाए होते तो उनकी पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर लोगों का भरोसा बढ़ता।

अब जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के बिल अचानक बढ़ने लगे हैं तो आम जनता यह सवाल उठा रही है कि स्मार्ट मीटर लगाने का असली उद्देश्य क्या है। लोग कह रहे हैं कि यह व्यवस्था पारदर्शिता और सही खपत का आकलन करने के लिए लागू की गई थी लेकिन इसकी शुरुआत से ही उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। न सिर्फ बिल भारी हो गए हैं बल्कि तकनीकी कारणों से उपभोक्ताओं को बार-बार मीटर देखने की मजबूरी भी पैदा हो गई है। लगातार जलती-बुझती लाल और हरी लाइटें उन्हें इस बात का एहसास कराती हैं कि कहीं न कहीं गड़बड़ी है जिसे समझना उनके लिए कठिन है। लोगों का कहना है कि विभाग को पहले इन मीटरों की तकनीकी खामियों को ठीक करना चाहिए था, फिर इन्हें बड़े पैमाने पर लगाया जाता।

उपभोक्ताओं के अनुसार यह स्थिति इस वजह से और भी गंभीर हो गई है क्योंकि पहले से ही महंगाई के दौर में घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बिजली के बिल अचानक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक बढ़ जाना आम घरों के बजट को और बिगाड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि विभाग ने उपभोक्ताओं से उनकी राय लिए बिना ही स्मार्ट मीटर लगाने शुरू कर दिए और अब इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। इस बीच, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले विभाग को व्यापक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए था ताकि लोग समझ पाते कि इन लाइटों का क्या अर्थ है और बिल क्यों बढ़ सकता है। लेकिन बिना जानकारी के सीधे कार्रवाई करने से जनता की शंका और गहरी हो गई है।

काशीपुर में तेजी से फैल रही यह चर्चा अब बिजली विभाग के लिए चुनौती बन चुकी है। लोग जगह-जगह बैठकों और चर्चाओं में इस मुद्दे को उठा रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी सवाल पूछ रहे हैं। विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस सफाई नहीं दी गई है जिससे उपभोक्ताओं की नाराज़गी और भी बढ़ रही है। लोगों ने मांग की है कि विभाग तुरंत मीटरों की जांच कराए और जहां कहीं गड़बड़ी है उसे दूर करे। साथ ही, यह भी कहा गया है कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक नए मीटर लगाने की प्रक्रिया रोक दी जाए। अब देखना यह है कि उपभोक्ताओं के गुस्से और बढ़ती आलोचना के बीच बिजली विभाग किस तरह इस विवाद का समाधान करता है।

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