काशीपुर। परंपरा, संस्कृति और आस्था के संगम के रूप में विख्यात उत्तरायणी मकर संक्रांति मेले के आयोजन को लेकर तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। आगामी 14 जनवरी 2026 को मां चामुंडा मंदिर प्रांगण में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक मेले को लेकर उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक काशीपुर में संपन्न हुई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में समिति पदाधिकारियों और सदस्यों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि यह मेला किसी भी प्रकार से व्यावसायिक नहीं बल्कि पूरी तरह सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। गौरतलब है कि काशीपुर में यह मेला पिछले 28 वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है और इस वर्ष इसका 29वां आयोजन होने जा रहा है, जिसे लेकर नगरवासियों और पर्वतीय समाज में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बैठक के दौरान मेले को और अधिक भव्य, अनुशासित और जनसहभागिता से परिपूर्ण बनाने पर जोर दिया गया, ताकि यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति का जीवंत उदाहरण बन सके।
मां चामुंडा मंदिर के पावन प्रांगण में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता ज्ञानेन्द्र जोगी ने की, जिसमें उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला समिति से जुड़े अनेक वरिष्ठ और सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि 14 जनवरी को मेले के आयोजन से एक दिन पूर्व, जागेश्वर से आने वाली प्रसिद्ध छोलिया नृत्य टीम मोहल्ला किला से नगर भ्रमण करेगी। ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वेशभूषा में सजे छोलिया नृतक नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे पूरे शहर में मेले का उत्सवपूर्ण वातावरण निर्मित हो सके। समिति का मानना है कि यह नगर भ्रमण न केवल लोगों को मेले से जोड़ता है बल्कि उत्तरायणी की सांस्कृतिक आभा को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य भी करता है। बैठक में नगर भ्रमण की व्यवस्थाओं, सुरक्षा और समय-सारिणी पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि यह आयोजन सुव्यवस्थित और आकर्षक ढंग से संपन्न हो सके।
मेले के सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने मीडिया से बातचीत में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला 14 जनवरी 2026 को प्रातः 8 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के साथ आरंभ होगा। इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान की भूमिका आनंद कुमार एडवोकेट निभाएंगे, जो पूर्व में जसपुर रोड क्षेत्र के प्रधान रह चुके हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने बताया कि पूजा-अर्चना के पश्चात हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद एपण और रंगोली प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। उन्होंने बताया कि यह प्रतियोगिताएं विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को अपनी पारंपरिक कला प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती हैं और हर वर्ष इनमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी भाग लेते हैं। समिति का उद्देश्य है कि उत्तराखंड की लोककला और पारंपरिक चित्रकला को प्रोत्साहन मिले और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने मीडिया को बताया कि दोपहर 1 बजे से मेले का विधिवत उद्घाटन नगर निगम काशीपुर के महापौर दीपक बाली के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ होगी। सांस्कृतिक सचिव दीपक पांडे ने बताया कि इस वर्ष मेले का मुख्य आकर्षण पिथौरागढ़ की प्रसिद्ध प्रकाश रावत एंड पार्टी के कलाकारों की प्रस्तुति होगी, जो अपनी लोकधुनों और पारंपरिक नृत्य के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ ही जागेश्वर से आने वाली भुवन राम एंड पार्टी की छोलिया नृतक टोली भी अपने ऊर्जावान और वीर रस से ओतप्रोत नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी। उन्होंने कहा कि छोलिया नृत्य उत्तराखंड की पहचान है और इसे देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग दूर-दूर से काशीपुर पहुंचते हैं। इस बार भी इन प्रस्तुतियों को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।
सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने आगे बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से इस बार स्कूलों और कॉलोनियों की टीमों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जानकारी दी गई कि इस वर्ष लगभग 10 स्कूलों की टीमें और करीब 30 कॉलोनियों की टीमें अपने-अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी। उन्होने ने बताया कि पहले जहां कॉलोनी की टीमों की संख्या सीमित रहती थी, वहीं इस बार इसमें अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जो समाज में बढ़ते उत्साह और सहभागिता का प्रमाण है। समिति द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले प्रत्येक बच्चे को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, ताकि उनका मनोबल बढ़े और वे भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों में उत्साहपूर्वक भाग लें। इसके अलावा, प्रतिभागियों के लिए नाश्ते की समुचित व्यवस्था भी पैकेट के रूप में की जाएगी।
सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने बताया कि मेले के दौरान आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को विशेष सम्मान देने की भी व्यवस्था की गई है। कॉलोनी स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को अलग-अलग पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, वहीं स्कूल स्तर पर भी प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों के लिए अलग से पुरस्कार रखे गए हैं। सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने बताया समिति का कहना है कि इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों तथा युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित होगी। सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने स्पष्ट किया कि यह मेला केवल पर्वतीय या गढ़वाली समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के सभी क्षेत्रों और विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों के लोगों की सहभागिता से इसे एक व्यापक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दिया गया है।
सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने बताया कि खान-पान की व्यवस्था को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि मंदिर के पीछे निर्धारित स्थान पर उचित मूल्य पर स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खान-पान के स्टॉल लगाए जाएंगे। समिति का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं और आगंतुकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और वे पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ सुरक्षित भोजन का आनंद ले सकें। इसके लिए स्टॉल लगाने वालों को साफ-सफाई और गुणवत्ता के निर्देश दिए जाएंगे। समिति ने यह भी दोहराया कि मेले का स्वरूप पूरी तरह सांस्कृतिक रहेगा और इसे किसी भी सूरत में व्यावसायिक मेले में परिवर्तित नहीं होने दिया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी शासन, प्रशासन, मीडिया और पत्रकार बंधुओं के सहयोग से मेले को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति की पूरी टीम मिलजुल कर कार्य कर रही है। व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अलग-अलग सदस्यों को सौंपी गई है, ताकि हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दिया जा सके। सुनील टंडन द्वारा मेले की समग्र व्यवस्थाओं की देखरेख की जाएगी, जबकि टेंट, खान-पान स्टॉल और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पंडितों के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। महेश चन्द्र पांडे, मनोज भंडारी, जतिन कान्डपाल, आदित्य पांडे, निर्मला काण्डपाल और लता काण्डपाल, पुष्पा रौतेला सहित पूरी टीम आपसी समन्वय और सहयोग से इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी हुई है। समिति का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीम के सामूहिक प्रयासों से यह मेला हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
अंत में सांस्कृतिक सचिव दीपक पाण्डे ने कहा कि उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह मेला समाज की परंपराओं, लोककला, लोकनृत्य और सामूहिक एकता को सहेजने का माध्यम है। 29वें वर्ष में प्रवेश कर रहा यह आयोजन हर साल और अधिक भव्य होता जा रहा है, जो समाज के सहयोग और आस्था का परिणाम है। उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में मां चामुंडा मंदिर प्रांगण में पहुंचकर इस सांस्कृतिक पर्व का हिस्सा बनें और अपनी उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली परंपरा को गर्व के साथ आगे बढ़ा सकें।
काशीपुर में आयोजित होने वाला उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जीवंत संस्कृति, लोकपरंपराओं और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बन चुका है। 29वें वर्ष में प्रवेश कर रहा यह आयोजन हर वर्ष अपनी भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ नई पहचान गढ़ रहा है। मां चामुंडा मंदिर प्रांगण में होने वाला यह मेला लोकनृत्य, लोकसंगीत, एपण, रंगोली और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है। समिति, प्रशासन और नगरवासियों के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन केवल पर्वतीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बन गया है। उत्तरायणी मेला आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है, जो काशीपुर को सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



