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उत्तराखंड में फर्जी बाबाओं पर गिरी गाज, ऑपरेशन ‘कालनेमि’ से मचा हड़कंप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती से कांपे फर्जी साधु, अखाड़ा परिषद ने कहा—आस्था को कलंकित करने वालों की जगह अब जेल में

हरिद्वार। हरिद्वार और देहरादून की सड़कों पर बीते कुछ दिनों में ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने आस्था की आड़ में पनप रहे छल के चेहरे उजागर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर शुरू किए गए ऑपरेशन कालनेमि ने महज कुछ ही घंटों में उत्तराखंड में उन नकली बाबाओं और बहुरूपिए साधुओं की जड़ों को हिला दिया है, जो धर्म और श्रद्धा की पोशाक पहनकर भोली जनता को बरगलाने में जुटे थे। देहरादून से लेकर हरिद्वार तक यह अभियान व्यापक स्तर पर चलाया गया, जिसमें शुक्रवार को देहरादून में एक बांग्लादेशी नागरिक सहित कुल 25 फर्जी बाबाओं की गिरफ्तारी के साथ इसका आगाज़ हुआ, जबकि हरिद्वार में 13 नकली बाबाओं को पकड़ा गया। इन तमाम लोगों का वेश साधु जैसा था, लेकिन उनका कर्म केवल ठगी, भ्रम और अंधविश्वास फैलाना था।

हरिद्वार की पवित्र भूमि पर चल रही इस कार्रवाई ने धर्म के नाम पर हो रहे पाखंड का वह काला चेहरा सामने लाया, जिसे अब तक समाज केवल संदेह की दृष्टि से देखता था। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के नेतृत्व में नगर कोतवाली क्षेत्र में हुई इस कड़ी छानबीन के दौरान यह पाया गया कि ये सभी लोग आम जनता को साधु के वेश में भ्रमित कर लंबे समय से अपने स्वार्थसिद्धि में लगे थे। प्रमेंद्र डोबाल ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अब हरिद्वार की धार्मिक गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कांवड़ यात्रा से पहले यह एक स्पष्ट संदेश है कि राज्य की धरती पर आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और पाखंड अब सहन नहीं किया जाएगा।

यही नहीं, श्यामपुर थाना क्षेत्र में इस अभियान की दूसरी बड़ी कार्रवाई तब हुई जब पुलिस ने 18 बहुरूपिए सपेरे बाबाओं को हिरासत में लिया। ये लोग कांवड़ियों को रास्ते में रोककर तंत्र-मंत्र और जादू-टोने का खेल दिखा रहे थे, जिससे कई जगहों पर अव्यवस्था और भीड़भाड़ का माहौल बन रहा था। पुलिस को अंदेशा था कि यदि इन्हें रोका नहीं गया तो कोई गंभीर विवाद, हिंसा या अपराध हो सकता है। थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, चौकी प्रभारी उप निरीक्षक देवेंद्र तोमर, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार और कांस्टेबल अनिल रावत की टीम ने समय पर कार्रवाई कर इन्हें हिरासत में ले लिया। इन बहुरूपियों की मौजूदगी से धार्मिक यात्रियों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता था, जिसे समय रहते नियंत्रित किया गया।

इस अभूतपूर्व अभियान को साधु-संत समाज से भी पूरा समर्थन प्राप्त हुआ है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने इस पूरी पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम ना केवल उत्तराखंड की धार्मिक शुचिता को बनाए रखने की दिशा में सटीक है, बल्कि यह देशभर में एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवा वस्त्र पहन लेने मात्र से कोई संत नहीं बन जाता और धर्म का चोला पहनकर आम जन की आस्था से खेलना अक्षम्य अपराध है। उन्होंने स्वयं भी इस पाखंड को अनुभव किया है और कहा कि वे लोग ना तो किसी संस्था से जुड़े होते हैं और ना ही किसी अखाड़े सेकृउनका एकमात्र उद्देश्य केवल धन एकत्र करना और जनता को ठगना होता है।

महंत रविंद्र पुरी ने आग्रह किया कि इस तरह की कार्रवाई पूरे भारत में लागू की जानी चाहिए, ताकि धर्म का स्वरूप पवित्र और निष्कलुष बना रहे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आगे चलकर पुलिस इस अभियान को और भी गंभीरता से बढ़ाएगी और शेष छद्म वेशधारियों को भी सलाखों के पीछे भेजेगी। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि इससे समाज को यह स्पष्ट संदेश मिलेगा कि भगवा चोले की आड़ में अब ठगी का व्यवसाय नहीं चलने दिया जाएगा। धर्म के नाम पर लूट और भय फैलाने वालों के लिए उत्तराखंड की भूमि अब शरणस्थली नहीं रह सकती।

इस बीच, देहरादून जिले की सहसपुर थाना पुलिस ने भी चोरखाला क्षेत्र में दो छद्म ज्योतिषाचार्यों को पकड़ा है। यह दोनोंकृपामती नाथ (उम्र 42 वर्ष) और बल्लू (उम्र 22 वर्ष)कृलोगों को झूठे दावे कर भ्रमित कर रहे थे। जब पुलिस ने इनसे ज्योतिष से संबंधित प्रमाण मांगे, तो वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों लक्ष्मीपुर चोरखाला सहसपुर के निवासी हैं और लंबे समय से इस कार्य में संलिप्त थे।

ऑपरेशन कालनेमि उत्तराखंड की धरती पर उस संकल्प का नाम बन चुका है, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का परिचायक है। यह केवल एक पुलिस अभियान नहीं, बल्कि आस्था की रक्षा के लिए एक निर्णायक युद्ध है, जिसमें राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और धर्मगुरुओं ने मिलकर यह साबित कर दिया है कि अब पाखंडियों के लिए कोई स्थान नहीं है। धार्मिक पर्वों और आयोजनों को पवित्र बनाए रखने के लिए इस प्रकार की निर्णायक कार्रवाई समय की मांग हैकृऔर उत्तराखंड इस दिशा में एक साहसी पहल कर चुका है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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