spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडआध्यात्मिक संस्कारों से महका सुभाष चंद्र बोस छात्रावास, 50 बच्चों के चेहरों...

आध्यात्मिक संस्कारों से महका सुभाष चंद्र बोस छात्रावास, 50 बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान और उम्मीद

डी-बाली ग्रुप और सामाजिक संगठनों की पहल से काशीपुर छात्रावास में तुलसी पूजन, उपहार, संस्कार और सेवा का संगम, बच्चों को मिला धर्म, अनुशासन, प्रेम और उज्ज्वल भविष्य का प्रेरक संदेश।

काशीपुर। सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय छात्रावास का वातावरण उस समय पूरी तरह बदल गया, जब वहां आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और बच्चों की मुस्कान से भरा एक विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। गोद लिए गए 50 बच्चों को जीवन के नैतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक पक्षों से परिचित कराने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम डी-बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाज सेविका उर्वशी दत्त बाली के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। हॉस्टल वार्डन ज्योति राणा तथा छात्रावास के समस्त स्टाफ की सक्रिय भूमिका से परिसर में अनुशासन, प्रेम और उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर उल्लास साफ झलक रहा था और पूरा छात्रावास परिसर संगीत, भजन, आरती और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि बच्चों के मन में संस्कार, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी के बीज बोने का एक सशक्त माध्यम भी बना।

इस विशेष अवसर पर गुरुकुल फाउंडेशन से नीरज कपूर अपने बच्चों एवं लगभग 30 स्टाफ सदस्यों के साथ छात्रावास पहुंचे और उन्होंने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ उपहार भेंट किए। यह क्षण बच्चों के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था, जिसने उनकी खुशी को कई गुना बढ़ा दिया। उपहार पाकर बच्चों की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। छात्रावास का आंगन हंसी, उल्लास और अपनत्व के भाव से भर गया, जहां हर बच्चा खुद को विशेष महसूस कर रहा था। इस पहल ने बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत किया। गुरुकुल फाउंडेशन की इस सहभागिता को सभी ने सराहा, क्योंकि इस प्रकार के प्रयास बच्चों को यह एहसास दिलाते हैं कि समाज उनके साथ खड़ा है और उनके भविष्य को संवारने के लिए अनेक हाथ आगे बढ़ रहे हैं।

पावन वातावरण को और अधिक सार्थक बनाते हुए सनातन धर्म के गौरवशाली मूल्यों को समर्पित “तुलसी पूजन” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को सरल और सहज भाषा में बताया गया कि हिंदू धर्म में ईश्वर को सर्वव्यापक माना गया है, जो केवल मंदिरों या मूर्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सृष्टि के हर कण में विद्यमान है। बच्चों को यह समझाया गया कि इसी भावना के कारण प्रकृति, पेड़-पौधों, जल, पशु-पक्षियों और समस्त जीव-जगत में ईश्वर का वास माना जाता है। तुलसी पूजन के माध्यम से बच्चों ने प्रकृति के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और संरक्षण का भाव सीखा। कार्यक्रम के दौरान मंत्रोच्चार, आरती और पूजा विधि ने वातावरण को अत्यंत शांत और आध्यात्मिक बना दिया, जिससे बच्चों के मन में श्रद्धा और जिज्ञासा दोनों का विकास हुआ।

आयोजन के दौरान यह भी विस्तार से समझाया गया कि हिंदू धर्म में पेड़-पौधों, पक्षियों, जल, पत्थर और अग्नि की पूजा क्यों की जाती है। बच्चों को बताया गया कि पूरी पृथ्वी पंचमहाभूतकृअग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाशकृसे निर्मित है और इन सभी तत्वों के संतुलन से ही जीवन संभव है। जब हम इन तत्वों का सम्मान करते हैं, तो हम स्वयं जीवन का सम्मान करना सीखते हैं। बच्चों को करुणा, अहिंसा और सभी प्राणियों के प्रति प्रेम का संदेश दिया गया। उन्हें यह भी सिखाया गया कि यदि कोई हमारे धर्म या आस्था की निंदा करता है, तो प्रतिक्रिया में हिंसा, गाली-गलौज या आक्रोश उचित मार्ग नहीं है। संस्कार और शिक्षा यही सिखाते हैं कि गलत बातों से दूरी बनाई जाए, लेकिन प्रेम, शांति और संयम को कभी न छोड़ा जाए।

इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव आनंद तिवारी एवं प्रदेश अध्यक्ष रुचिन शर्मा के नेतृत्व में किया गया। संगठन की ओर से पूरे कार्यक्रम के लिए भोजन और प्रसाद की सुंदर व्यवस्था की गई, जिससे बच्चों और अतिथियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अनुशासन और व्यवस्था के साथ संपन्न हुए इस आयोजन में संगठन के कार्यकर्ताओं की भूमिका भी सराहनीय रही। बच्चों ने प्रसाद ग्रहण करते समय अनुशासन, धैर्य और सहभागिता का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें जीवन में संस्कारों के महत्व और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के बारे में भी प्रेरित किया, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक न रहकर एक शिक्षाप्रद अनुभव में परिवर्तित हो गया।

तुलसी माता की संपूर्ण साज-सज्जा प्रदेश अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ) श्रीमती पूजा अरोड़ा के नेतृत्व में संगठन की महिलाओं, स्कूल के बच्चों और मिनी इवेंट्स के सहयोग से की गई। आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगे फूल और पारंपरिक स्वरूप ने तुलसी पूजन को और अधिक भव्य बना दिया। वहीं छात्रावास परिसर में स्थापित मंदिर की साज-सज्जा आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक राज राणा द्वारा की गई, जिसमें उनकी रचनात्मकता और कला स्पष्ट दिखाई दी। मंदिर की आवश्यक सामग्री और अन्य सहयोग श्रीमती सुधा जिंदल द्वारा प्रदान किया गया, जिससे आयोजन को पूर्ण स्वरूप मिल सका। इस सामूहिक प्रयास ने यह दिखाया कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो किसी भी आयोजन को सफल और यादगार बनाया जा सकता है।

इसी दौरान सोनी सेठ ने छात्रावास पहुंचकर तुलसी पूजन के अवसर पर बच्चों को योग कार्पेट और अन्य उपयोगी उपहार प्रदान किए। इन उपहारों ने बच्चों को न केवल खुशी दी, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली और योग के महत्व की ओर भी प्रेरित किया। बच्चों को बताया गया कि नियमित योग और प्रार्थना से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। आयोजन से पहले बच्चों को छह दिनों तक आरती और प्रार्थना का अभ्यास कराया गया था, जिससे वे पूरे आत्मविश्वास और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में सहभागी बन सके। उन्हें यह जानकारी भी दी गई कि तुलसी जी में लक्ष्मी का वास माना जाता है और घर में सुख-समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा के लिए तुलसी का विशेष महत्व है।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों के भीतर संस्कार, अनुशासन और धर्म के प्रति श्रद्धा का भाव और अधिक प्रबल होता दिखाई दिया। उन्हें यह संदेश दिया गया कि जहां जीवन है, वहीं ईश्वर का वास है और यही सनातन धर्म की सच्ची शिक्षा है। इस आयोजन ने बच्चों के मन में न केवल धार्मिक ज्ञान का संचार किया, बल्कि उन्हें प्रकृति, समाज और मानवता के प्रति संवेदनशील भी बनाया। सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय छात्रावास में आयोजित यह कार्यक्रम लंबे समय तक बच्चों और उपस्थित सभी लोगों की स्मृतियों में रहेगा। यह पहल यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच से बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल दिशा दी जा सकती है।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!