spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडअलका पाल की नई तैनाती से काशीपुर कांग्रेस में जागी संगठन पुनर्गठन...

अलका पाल की नई तैनाती से काशीपुर कांग्रेस में जागी संगठन पुनर्गठन की तेज़ लहर

अलका पाल के नेतृत्व में वर्षों से बिखरी काशीपुर कांग्रेस को नयी मजबूती देने की कोशिशें तेज़, गुटबाज़ी खत्म कर हर कार्यकर्ता को फिर से एकजुट करने की पहल में संगठन में नई ऊर्जा लौटती दिखी

काशीपुर(सुनील कोठारी)। काफी समय से सुस्ती और आंतरिक खींचतान में उलझी काशीपुर महानगर कांग्रेस ने अब एक बार फिर से करवट लेनी शुरू कर दी है। शहर संगठन की बागडोर अलका पाल के हाथों में आने के बाद पार्टी के भीतर हलचल बढ़ी है और एक लंबे अंतराल के बाद कार्यकर्ताओं में उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है। हालांकि असली परीक्षा अब उनके सामने खड़ी है—एक ऐसा संगठन पुनर्जीवित करना, जिसे वर्षों की खेमेबाजी, उदासीनता और नेतृत्वहीनता ने भीतर से कमजोर कर दिया। कांग्रेस हाईकमान ने उन पर भरोसा जताकर बड़े बदलाव की जिम्मेदारी सौंप दी है, और अलका पाल भी इस विश्वास को निभाने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट गई हैं। मगर चुनौती इसलिए कठिन है क्योंकि काशीपुर कांग्रेस सिर्फ चुनावी हारों की मार ही नहीं झेलती रही, बल्कि अंदरूनी मतभेदों ने भी उसे लंबे समय तक जकड़े रखा।

पार्टी के अंदर कई वर्षों से चले आ रहे ठहराव और निराशा के बीच अब अलका पाल की नियुक्ति एक नए आरंभ की तरह देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारी का बोझ भी बेहद बड़ा है। काशीपुर के संगठन को मजबूत आधार देना, पुराने कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ना, निष्क्रिय पड़े यूनिट्स को फिर से सक्रिय करना और बूथ स्तर की कमजोरियों को दूर करना—ये सभी कार्य किसी छोटे लक्ष्य का हिस्सा नहीं, बल्कि लम्बे राजनीतिक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत है। कांग्रेस के पुराने धड़ों के बीच उपजे मनमुटाव को पाटना और सभी पक्षों को एक दिशा में खड़ा करना अलका पाल के सामने सबसे कठिन दीवार है। शहर के कई बूथों का दौरा करते हुए उन्होंने न सिर्फ संगठन की वास्तविक स्थिति को समझा, बल्कि वहां मौजूद अनियमितताओं और कमियों पर भी गंभीरता से बात की।

कार्यभार संभालने के बाद शुरू हुए शुरुआती मतभेदों ने यह भी साफ कर दिया कि अलका पाल के लिए सफर इतना आसान नहीं होने वाला। बावजूद इसके वे एक-एक कार्यकर्ता से व्यक्तिगत संवाद बनाकर हालात सुधारने में जुट गई हैं। उनका मानना है कि राजनीतिक संगठन सिर्फ चुनावी संरचना नहीं होता, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और सामूहिक सहभागिता पर टिका रहता है। इसलिए वे लगातार बैठकों, वार्ताओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से उस पुल को खड़ा कर रही हैं, जिसमें हर कार्यकर्ता को अपनी भूमिका का महत्व महसूस हो। पार्टी के अंदर जो लोग वर्षों से निष्क्रिय थे, वे भी अब दोबारा सक्रियता दिखाने लगे हैं—जो संकेत देता है कि अंदरूनी ऊर्जा धीरे-धीरे संगठन में वापस लौट रही है।

आने वाले विधानसभा चुनावों पर नज़र रखते हुए अलका पाल ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए लक्ष्य केवल संगठन को फिर से व्यवस्थित करना नहीं, बल्कि आगामी चुनावों में कांग्रेस को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना है। इसी वजह से वे दिन-रात बैठकें कर रही हैं, क्षेत्रवार दौरे कर रही हैं और वरिष्ठ नेताओं से लगातार विचार-विमर्श कर रही हैं। कार्यकर्ताओं में उत्साह जगाने के लिए उन्हें नई जिम्मेदारियाँ दी जा रही हैं, ताकि टीम में सक्रियता और प्रक्रियागत अनुशासन दोनों का निर्माण हो सके। शहर के रणनीतिक क्षेत्रों में बूथ प्रभारियों की तैनाती पर भी विचार चल रहा है, जिससे चुनावी समीकरणों को समय रहते मजबूत किया जा सके।

पार्टी के भीतर नए जोश का सबसे बड़ा कारण यह है कि अलका पाल केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे जमीन पर उतरकर काम कर रही हैं। बूथों पर छोटी-छोटी टीमों से मिलना हो या महिला कार्यकर्ताओं के बीच संवाद स्थापित करना—उनकी यह मेहनत संगठन में नई ऊर्जा का संचार कर रही है। कई पुराने सदस्य, जो वर्षों से किनारे हो चले थे, अब फिर से सक्रिय होने की इच्छा जता रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार आने वाले कुछ महीनों में संगठन में बड़े बदलाव संभव हैं और नई टीम की घोषणा भी होने की उम्मीद है।

काशीपुर कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही सबसे बड़ी समस्या—अंदरूनी टूट—आज भी एक वास्तविक चुनौती है। कई पुराने पदाधिकारी और क्षेत्रीय टीमों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं, जो संगठन को कमजोर करते रहे। यह वही बिंदु है जिसे सुलझाए बिना कांग्रेस की ताकत वापस नहीं लौट सकती। अलका पाल की रणनीति साफ है कि वे किसी भी गुट को अलग-थलग नहीं होने देंगी और हर पक्ष को साथ लेकर ही आगे बढ़ेंगी। उनका कहना है कि मजबूत संगठन की पहली शर्त आपसी विश्वास है, और इस विश्वास को स्थापित करने के लिए वे लगातार व्यक्तिगत संवाद और खुले कार्यक्रमों पर जोर दे रही हैं।

महिला शक्ति और युवाओं की भागीदारी को लेकर भी वे बेहद गंभीर हैं। अलका पाल का मानना है कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं और युवाओं के बिना कोई भी पार्टी ताकतवर नहीं बन सकती। यही कारण है कि वे हर वार्ड में छोटे स्तर की महिला बैठकों में खुद उपस्थित होकर कार्यप्रणाली को मजबूत कर रही हैं। इसके साथ ही युवा कांग्रेस को फिर से सक्रिय करने के लिए अलग योजनाएँ भी तैयार की जा रही हैं, ताकि पार्टी के पास जमीनी स्तर पर एक मजबूत कैडर उपलब्ध हो।

कुल मिलाकर काशीपुर कांग्रेस जिस पुनरुत्थान की उम्मीद वर्षों से कर रही थी, उसकी पहल अब मजबूत कदमों के साथ दिखाई दे रही है। लेकिन आगे की जंग आसान नहीं होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि संगठन तभी खड़ा होगा, जब पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ेगी। अलका पाल का स्पष्ट संदेश है—“सबका सहयोग, सबकी जिम्मेदारी—यही जीत तक पहुंचने का रास्ता है।” उनकी सक्रियता, गंभीरता और संवाद शैली को देखते हुए यह साफ झलक रहा है कि वे संगठन के लंबे सूखे को खत्म करने के लिए पूरी क्षमता और समर्पण के साथ मैदान में उतर चुकी हैं।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!