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अनुपम शर्मा बोले कांग्रेस का फैसला पारदर्शी अलका पाल की नियुक्ति पार्टी की नई शुरुआत

काशीपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही महानगर और जिला इकाइयों की नियुक्तियों ने सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। काशीपुर में अलका पाल को महानगर अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जो विवाद उभरा, उसने कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस निर्णय के विरोध में पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और माने जाने वाले प्रभावशाली नेताओं ने खुलकर असहमति जताते हुए कहा कि यह फैसला “थोपा गया निर्णय” है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में संगठनात्मक राय को नजरअंदाज किया गया है। बैठक में मौजूद अनेक कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिस तरीके से संगठन सृजन अभियान चलाया गया था, उसके अनुसार नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। वहीं दूसरी ओर कई अनुभवी नेता इसे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का सुविचारित और सकारात्मक फैसला बता रहे हैं।

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनुपम शर्मा’ ने ‘हिन्दी दैनीक सहर प्रजातंत्र’ के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि अलका पाल की नियुक्ति को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह निराधार और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने बहुत सोच-समझकर, संगठन की गहराई और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होने कहा कि ‘‘मैं अपने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने एक कर्मठ, निष्ठावान और ओबीसी समाज से आने वाली महिला कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।’’ यह निर्णय कांग्रेस की सामाजिक समरसता की सोच को दर्शाता है। अनुपम शर्मा ने यह भी जोड़ा कि संगठन सृजन अभियान एक बेहद पारदर्शी प्रक्रिया रही, जिसे किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रभावित करना संभव नहीं था।

उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी को यह भ्रम है कि वह केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को प्रभावित कर सकता है, तो वह पूरी तरह गलतफहमी में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ’’शक्ति सिंह गोहिल’’ जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता ने की थी, जो राज्यसभा सांसद होने के साथ ही गुजरात में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। शर्मा ने कहा कि यह वही गोहिल साहब हैं, जिन्होंने नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में गुजरात में विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज उठाई थी। उनकी निगरानी में जो नियुक्ति हुई है उस पर सवाल उठाना संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

संदीप सहगल द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुपम शर्मा ने कहा कि यह वही संदीप हैं जिन्होंने नगर निगम चुनाव में हार के बाद पहले प्रशासन को दोषी बताया, फिर अधिकारियों, एसडीएम, एसपी और यहां तक कि नगर निगम मेयर तक को कटघरे में खड़ा किया। आज जब उन्हें अपनी असफलता का कारण खुद में तलाशना चाहिए, तब वे कांग्रेस संगठन और उसके निर्णय पर उंगली उठा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर चार लोगों की तथाकथित चौकड़ी किसी उम्मीदवार को हराने में सक्षम थी, तो इसका अर्थ है कि वह उम्मीदवार स्वयं कमजोर था।

अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि मुझे आश्चर्य है कि जो व्यक्ति खुद अपनी हार का ठीकरा कभी प्रशासन पर और कभी संगठन पर फोड़ता रहा वह आज मुझे दोषी ठहरा रहा है। यह राजनीति नहीं, मानसिक बेचैनी का संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि काशीपुर कांग्रेस के भीतर कुछ लोग ऐसे हैं, जो काम करने के बजाय क्लबों में बैठकर राजनीति करने के आदी हैं। उन्हें हर उस कार्यकर्ता से समस्या होती है जो जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत करने का काम करता है। “जहाँ तक ‘बाहरी’ कहे जाने की बात है, तो यह हास्यास्पद आरोप है,” शर्मा ने कहा। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो दशक से काशीपुर में रह रहे हैं, उनका घर, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड सब यहीं के हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति 20 साल से यहाँ जनता के बीच रह रहा है, समाज सेवा कर रहा है, और पार्टी के हर कार्यक्रम में सक्रिय है, तो उसे बाहरी कहना सिर्फ राजनीतिक हताशा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि “कांग्रेस में ‘वासुधैव कुटुंबकम’ की विचारधारा चलती है, न कि गली-मोहल्ले की राजनीति।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी सर्वधर्म संभव में विश्वास रखती है, न कि किसी जाति या वर्ग की राजनीति में। “जिन लोगों को ओबीसी समाज से आई एक महिला की अध्यक्षता से परेशानी है, वे दरअसल कांग्रेस की मूल भावना को नहीं समझते। शर्मा ने तीखे अंदाज़ में कहा कि यही लोग पहले मुस्लिम अध्यक्ष मुशर्रफ हुयैन के खिलाफ थे, फिर अब ओबीसी महिला अध्यक्ष अलका पाल के खिलाफ हैं। ऐसा लगता है कि इनकी राजनीति विरोध के सहारे चलती है। उन्होंने यह भी बताया कि काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत आबादी ओबीसी समुदाय की है, और ऐसे में इस वर्ग से आने वाली महिला को नेतृत्व देना कांग्रेस की सामाजिक न्याय की नीति का हिस्सा है।

अनुपम शर्मा ने यह भी खुलासा किया कि जिस बैठक को “कांग्रेस की आधिकारिक बैठक” बताया जा रहा है, उसमें पार्टी के कई बाहरी और निष्क्रिय लोग लाए गए थे। उन्होंने कहा कि “जो लोग वर्षों से किसी भी कांग्रेस कार्यक्रम में नहीं दिखे, वे अचानक इस बैठक में बुलाए गए। यह सब केवल भीड़ दिखाने का प्रयास था। मैंने खुद बीस साल के राजनीतिक जीवन में उन चेहरों को कभी कांग्रेस के किसी मंच पर नहीं देखा। उन्होंने आगे कहा कि “शक्ति सिंह गोहिल ने खुद उस दिन कहा था कि किसी भी गैर-कांग्रेस व्यक्ति को मंच पर बुलाना कांग्रेस की गंभीरता को ठेस पहुँचाने जैसा है। यह बात उस समय भी सबके सामने कही गई थी।

उन्होंने यह भी बताया कि जो कुछ लोग इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल पहले से अपने-अपने “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” पाल बैठे थे कि उनका ही समर्थक अध्यक्ष बनेगा। अब जब पार्टी ने किसी और को जिम्मेदारी दे दी, तो वही लोग नाराज़ हो गए। शर्मा ने कहा कि पार्टी में काम की जगह अब कुछ लोग केवल टिकट की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘‘मैं पिछले बीस सालों से काशीपुर में लगातार काम कर रहा हूँ, और आज भी वही जोश है। लेकिन कुछ लोग तो हर बात में टिकट, टिकट, टिकट ही ढूंढते हैं। समाज सेवा का मतलब सिर्फ टिकट नहीं होता।” अनुपम शर्मा ने कटाक्ष भरे लहजे में कहा कि कुछ लोग पार्टी के मंच को छोड़कर मीडिया के ज़रिए अपनी असंतुष्टि जाहिर कर रहे हैं। अगर उन्हें कोई आपत्ति थी, तो कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं के पास जाकर बात रख सकते थे। लेकिन प्रेस बुलाकर संगठन की छवि को नुकसान पहुँचाना अनुशासनहीनता है। पार्टी ऐसे आचरण को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने आगे कहा कि अलका पाल की नियुक्ति से संगठन को नया जोश मिला है। कल से लेकर आज तक सैकड़ों कार्यकर्ता उन्हें बधाई देने पहुंचे हैं। यह दर्शाता है कि वास्तविक कांग्रेस कार्यकर्ता उनके साथ हैं। जनता और कार्यकर्ता संगठन के निर्णय से प्रसन्न हैं, केवल वही लोग नाराज़ हैं जो वर्षों से जनता के बीच दिखाई नहीं दिए।

अंत में अनुपम शर्मा ने कहा कि अलका पाल जैसी कर्मठ, जुझारू और मेहनती महिला के हाथों में महानगर कांग्रेस की कमान सौंपना एक सराहनीय कदम है। वह निश्चित रूप से संगठन को नई दिशा देंगी और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करेंगी। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि कुछ लोगों ने कहा था कि यह नियुक्ति कांग्रेस परिवार के अंत की शुरुआत है, लेकिन मैं कहता हूँ कि यह नई ऊर्जा, नई सोच और नई एकता की शुरुआत है।

काशीपुर की इस राजनीतिक हलचल ने कांग्रेस के भीतर चल रहे पुराने बनाम नए नेतृत्व के टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया है। लेकिन अनुपम शर्मा का यह बयान पार्टी के भीतर स्थिरता और संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी विचारधारा, अनुशासन और सामूहिकता की पार्टी है। कुछ लोग असहमति रख सकते हैं, परंतु कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करने वालों के लिए संगठन में कोई स्थान नहीं है। इस बयान के साथ यह तो तय हो गया कि काशीपुर की कांग्रेस राजनीति अभी और उबाल लेगी, लेकिन अनुपम शर्मा के सधे और सधे हुए जवाबों ने पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कांग्रेस का निर्णय अब विवाद नहीं, बल्कि दिशा तय करेगा।

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