काशीपुर। शनिवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया, जब कांग्रेस पार्टी ने न्याय की मांग को लेकर उपजिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन की अगुवाई महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने की, जिनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, महिलाएं, अधिवक्ता, युवा कांग्रेस और वरिष्ठ नेता कड़ाके की ठंड के बावजूद धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने, मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। हाथों में तख्तियां और नारों के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया कि तीन साल बीत जाने के बाद भी यदि एक पहाड़ की बेटी को न्याय नहीं मिला है, तो यह पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद भावनात्मक और आक्रोशपूर्ण रहा, जहां वक्ताओं ने सरकार की नीयत और कार्यशैली पर तीखे आरोप लगाए।
धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सत्ता, प्रभाव और सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार प्रभावशाली लोगों को बचाने में जुटी हुई है और इसी वजह से मामले की सच्चाई सामने आने में देरी हो रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब एक विधायक की पत्नी स्वयं सार्वजनिक रूप से साक्ष्य होने की बात कह रही है, तो फिर सरकार सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यदि राज्य और केंद्र सरकार के पास तमाम जांच एजेंसियां मौजूद हैं, तो फिर इतने गंभीर हत्याकांड में न्याय क्यों नहीं हो पा रहा। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने अपने संबोधन में सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अंकिता भंडारी के मामले में न्याय की राह में जानबूझकर बाधाएं डाली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड की महिलाएं सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हैं, यह बेहद शर्मनाक स्थिति है। अलका पाल ने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड का निर्माण इसलिए हुआ था कि अपनी बेटियों और बहनों के सम्मान के लिए महिलाओं को सड़कों पर संघर्ष करना पड़े। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जिन महिलाओं ने हाथों में दरांती लेकर उत्तराखंड के निर्माण में योगदान दिया, वे इस सरकार की जड़ों को उखाड़ फेंकने की ताकत भी रखती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने नेताओं और प्रभारी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, जबकि पीड़ित परिवार को लगातार न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
धरने के दौरान ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सदस्य अनुपम शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार पर तीखे शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक विधायक की पत्नी खुलेआम नाम ले रही है, इसके बावजूद सरकार सीबीआई जांच कराने से बच रही है। अनुपम शर्मा ने सवाल किया कि इतना जघन्य अपराध होने के बाद भी दोषियों को फांसी क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कोई जांच एजेंसी नहीं है, लेकिन यदि सरकार के पास सबूत हैं तो फिर उन्हें नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियां इस मामले में नपुंसक साबित हो रही हैं, जिन्हें इतने बड़े हत्याकांड में भी साक्ष्य नहीं मिल पा रहे हैं। अनुपम शर्मा ने कहा कि यदि एक पहाड़ की निर्दाेष बेटी के हत्यारों को खोजने में सरकार असफल है, तो यह उसकी अक्षमता और मंशा दोनों को उजागर करता है।
काशीपुर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए बेहद संवेदनशील और तीखे शब्दों में राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड की महिलाएं सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हैं, और यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है। अलका पाल ने भावुक अंदाज़ में पूछा कि क्या उत्तराखंड का निर्माण इसी दिन को देखने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने राज्य आंदोलन के दौरान बलिदान दिए, क्या उनका सपना यही था कि आज अपनी बेटियों और बहनों की इज्जत बचाने के लिए फिर से सड़कों पर संघर्ष करना पड़े। उन्होंने याद दिलाया कि जिन महिलाओं ने हाथों में दरांती लेकर उत्तराखंड के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई थी, वे अन्याय के खिलाफ खड़े होकर इस सरकार की जड़ों को हिला देने की ताकत भी रखती हैं।
अलका पाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तीन साल बीत जाने के बावजूद आज तक अंकिता को न्याय क्यों नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग अपने नेताओं को बचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि नेता एक-दूसरे के लिए ढाल बन जाते हैं, प्रभारी अपने लोगों को संरक्षण देते हैं और इसी संरक्षण की वजह से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब सत्ता का संरक्षण अपराधियों को मिलता है, तब न्याय की राह सबसे पहले कुचली जाती है और पीड़ित परिवार को इंसाफ के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
महिला खिलाड़ियों के आंदोलन का उदाहरण देते हुए अलका पाल ने कहा कि देश ने जंतर-मंतर पर अपनी खिलाड़ी बेटियों को कड़कड़ाती ठंड में धरने पर बैठे देखा, लेकिन क्या उन्हें समय पर न्याय मिला। उन्होंने कहा कि न्याय न मिलने की हताशा में उन बहनों को अपने मेडल तक गंगा में बहाने पड़े, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार ने उनकी आवाज को कितनी बेरहमी से अनसुना किया। अलका पाल ने कहा कि यही भाजपा सरकार के कार्यकाल की सच्चाई है, जो एक ओर “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” का नारा देती है और दूसरी ओर बेटियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि आज उत्तराखंड की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। राज्य महिला उत्पीड़न के मामलों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां महिलाओं के अपहरण, यौन उत्पीड़न और बलात्कार जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अलका पाल ने कहा कि यह केवल आंकड़ों का सवाल नहीं है, बल्कि हर उस परिवार की पीड़ा है, जो अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर डरा हुआ है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला इस भय और असुरक्षा का सबसे दर्दनाक उदाहरण बन चुका है, जहां लगातार तीन वर्षों से पूरी कांग्रेस पार्टी सड़कों पर संघर्ष कर रही है, लेकिन आज तक वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद न्याय नहीं मिल पाया है।
अंत में अलका पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को मजबूती और एकजुटता के साथ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष सीबीआई जांच नहीं होती और सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से वीआईपी का नाम सामने आया है, उससे साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं सरकार उसे बचाने का प्रयास कर रही है। अलका पाल ने दो टूक कहा कि कांग्रेस न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेगी और इस लड़ाई को पूरी ताकत के साथ अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि भाजपा लगातार अपने नेताओं को बचाने का प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। वक्ताओं ने कहा कि इस लड़ाई को हर स्तर पर लड़ा जाएगा, चाहे वह सड़क हो, विधानसभा हो या न्यायालय। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को फांसी नहीं दी जाती, तब तक आंदोलन थमने वाला नहीं है। धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि चाहे उन्हें कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े, वे न्याय दिलाकर ही दम लेंगे। इस दौरान नारेबाजी के बीच सरकार के इस्तीफे की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
महिला सुरक्षा के मुद्दे को लेकर भी धरने में सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया। वक्ताओं ने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड महिला उत्पीड़न के मामलों में पहले स्थान पर पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं के अपहरण, बलात्कार और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। कांग्रेस नेताओं ने जंतर-मंतर में हुए महिला खिलाड़ियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कड़कड़ाती ठंड में बैठी बहनों को भी न्याय नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि थक-हारकर हताश हुई महिला खिलाड़ियों को अपने मेडल तक गंगा में बहाने पड़े, जो भाजपा सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
धरना स्थल पर उत्तराखंड कांग्रेस विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष उमेश जोशी ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस कथित वीआईपी का नाम बलात्कार और हत्या के मामले में सामने आया है, उसके खिलाफ तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए और गिरफ्तारी की जानी चाहिए। उमेश जोशी ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक प्रक्रिया बाद में चलेगी, लेकिन सबसे पहले कानून के तहत कार्रवाई होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को देहरादून में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।
धरने में मौजूद वरिष्ठ नेताओं और अधिवक्ताओं ने भी एक-एक कर अपने विचार रखे और सरकार की नीतियों की आलोचना की। कांग्रेस नेता मुशर्रफ हुसैन, मनोज जोशी एडवोकेट, उमेश जोशी एडवोकेट, जितेंद्र सरस्वती, हरीश कुमार सिंह एडवोकेट, संजय चतुर्वेदी, सुशील भटनागर, अब्दुल कादिर, अनिल शर्मा, गोपाल सैनी, अजीता शर्मा, रोशनी बेगम, सरित चतुर्वेदी और शुभम उपाध्याय सहित अन्य नेताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि आज एक बेटी को न्याय नहीं मिला, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने इस धरने को और मजबूती दी, जहां आम लोग भी सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते नजर आए। नागरिकों ने कहा कि तीन साल बीत जाने के बाद भी यदि मामले में सच्चाई सामने नहीं आई है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि वे अपनी बेटियों और बहनों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और सरकार की उदासीनता उन्हें डरा रही है। उन्होंने मांग की कि राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पूरे प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बार-बार दोहराया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि न्याय के लिए है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे प्रदेश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और अब चुप बैठना संभव नहीं है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अंत में सभी प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे एकजुट होकर इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाकर ही शांत होंगे।



