काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष अलका पाल के नेतृत्व में उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर सड़कों पर गूंजती नजर आई। काशीपुर में आयोजित कैंडल मार्च के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की। इस मार्च का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं था, बल्कि तीन साल पुराने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सामने आ रहे नए तथ्यों, आरोपों और वायरल ऑडियो के बाद जनभावनाओं को आवाज देना भी था। बड़ी संख्या में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप चौक पर एकत्र होकर नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि जब तक इस जघन्य हत्याकांड की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं के हाथों में मोमबत्तियां थीं और चेहरों पर आक्रोश, जो यह दर्शा रहा था कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल बन चुका है।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह कैंडल मार्च पूरी तरह संगठित और अनुशासित रूप में निकाला गया, जिसमें महानगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। महाराणा प्रताप चौक पर पहुंचते ही वातावरण नारों से गूंज उठा और भाजपा सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है और इसी वजह से आज तक कई सवालों के जवाब सामने नहीं आ पाए हैं। महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि सरकार की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है और अब जब इस मामले में नए आरोप सामने आए हैं, तो सीबीआई जांच को सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराना ही एकमात्र रास्ता बचता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर दोषियों को बचने नहीं देगी और सच्चाई को सामने लाने के लिए सड़क से संसद तक आवाज बुलंद करेगी।
आरोपों की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने भाजपा सरकार पर सीधे-सीधे वीआईपी संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। अलका पाल ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार अंकिता भंडारी के मामले में शुरुआत से ही गंभीर नहीं दिखी और यही कारण है कि आज तक पीड़ित परिवार को पूरा न्याय नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड की बेटियों की अस्मिता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनके बयान के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारे लगाए और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
इस कैंडल मार्च में मौजूद एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश महासचिव अनुपम शर्मा ने भी भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने सार्वजनिक रूप से भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम और विधायक रेनू बिष्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो इसके बावजूद अब तक किसी भी तरह की गिरफ्तारी न होना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार आरोपियों को संरक्षण दे रही है। अनुपम शर्मा ने कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए, लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण कानून को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार वास्तव में निर्दाेष है और उसे सच्चाई पर भरोसा है, तो उसे सीबीआई जांच से क्यों डर लग रहा है।
प्रदेश सचिव एवं कुमाऊँ संयोजक आईटी सेल, उत्तराखंड कांग्रेस रवि पपनई ने हिंदी दैनिक सहर प्रजातंत्र से बातचीत करते हुए बेहद संवेदनशील और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंकिता भंडारी केवल एक नाम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी और प्रदेश की अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिस तथाकथित वीआईपी का नाम सामने आ रहा है, वह भाजपा से जुड़े प्रभावशाली लोगों के बीच से उभरकर आया है, और यही बात इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाती है। रवि पपनई ने कहा कि आज का दिन सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मतिथि से भी जुड़ा है, और इसी संदर्भ में यह याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि सुरेश गौतम वही व्यक्ति हैं, जिनका नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि देहरादून स्थित भाजपा कार्यालय में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसान आंदोलन में शामिल उधम सिंह नगर के किसानों और सिख समुदाय को खालिस्तानी कहकर बदनाम करने का प्रयास किया गया था, जिससे समाज में नफरत फैलाने की राजनीति उजागर होती है।
रवि पपनई ने कहा कि आज जिस स्थान पर वे खड़े हैं, वहीं दिन में हिंदूवादी संगठनों द्वारा बांग्लादेश में हिंदू युवक के मुद्दे को लेकर एक पुतला फूंका गया, लेकिन इसके पीछे भी राजनीतिक प्रपंच साफ दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बुलडोजर की कार्रवाई और जाति के आधार पर दिए जा रहे बयान, सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि असली मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उनका कहना था कि भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार जातिगत भावनाओं को उकसाकर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है, जबकि कांग्रेस का रुख शुरू से स्पष्ट है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना ही सबसे बड़ा उद्देश्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि चाहे जितने भी राजनीतिक हथकंडे अपनाए जाएं, सच्चाई को ज्यादा समय तक दबाया नहीं जा सकता। यदि किसी को जाति से जोड़कर देखा भी जाए, तो अंकिता भंडारी पहाड़ी समाज की बेटी थी, राजपूत समाज से आती थी, लेकिन सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वह एक महिला थी। रवि पपनई ने भावुक होते हुए कहा कि यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है और यही कारण है कि यह लड़ाई केवल किसी एक वर्ग या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटियों के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के लोग जाति, धर्म और राजनीतिक प्रपंचों से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं, जिससे सरकार की नींव हिल गई है।
प्रदेश सचिव ने आरोप लगाया कि पहले मीडिया को दबाने और डराने की कोशिश की गई, ताकि सच्चाई सामने न आ सके। जब मीडिया ने सवाल पूछने शुरू किए, तो अब सोशल मीडिया पर उत्तराखंड की आवाज़ उठाने वाले लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। रवि पपनई ने कहा कि यह साफ संकेत है कि सत्ता पक्ष सच से घबरा चुका है, लेकिन उत्तराखंड की जनता न तो इन दबावों में आएगी और न ही हिंदूदृमुस्लिम या जातीय राजनीति के जाल में फँसेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर अंकिता भंडारी का मुद्दा कमजोर नहीं पड़ने देगी, और जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भाजपा की पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने विधायक रेनू बिष्ट के इशारे पर रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल एक हत्या नहीं बल्कि सबूतों को नष्ट करने का संगठित प्रयास भी है। वक्ताओं का कहना था कि इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अंकिता भंडारी की हत्या किसी सामान्य परिस्थिति में नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने बिना पूरी जांच के रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने की अनुमति कैसे दे दी और किसके आदेश पर यह कार्रवाई हुई।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक राज्य की बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगी। कांग्रेस का यह भी कहना था कि भाजपा सरकार इस मामले में बार-बार सवालों के घेरे में आई है, लेकिन उसने आज तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कैंडल मार्च के दौरान “अंकिता को न्याय दो” और “दोषियों को सजा दो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे, जिससे यह साफ था कि जनआक्रोश धीरे-धीरे और तेज होता जा रहा है।
काशीपुर में निकाले गए इस कैंडल मार्च में कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे, जिनमें विमल गुड़िया, हरीश कुमार सिंह, ब्रह्मपाल, जितेंद्र सरस्वती, मंसूर मंसूरी, राजेश शर्मा एडवोकेट, सुभाष पाल, त्रिलोक सिंह अधिकारी, विनोद होंडा, शुभ्रा शर्मा, अर्जुन रावत और रवि पपने, गोपाल सैनी, टिका सिंह सैनी, पार्षद सरफराज, हनीफ गुड्डू, रशीद फारुकी, मोहम्मद आरिफ, अब्दुल कादिर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगे। नेताओं ने कहा कि यदि सरकार अब भी आंखें मूंदे बैठी रही, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ेगी और सड़कों पर उतरकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेगी।

तीन साल पुराने इस हत्याकांड से जुड़ा एक नया मोड़ तब सामने आया, जब भाजपा के एक पूर्व विधायक का ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में भाजपा के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस मामले में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह ऑडियो इस बात का सबूत है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही थी और अब वह धीरे-धीरे सामने आ रही है। उन्होंने मांग की कि इस ऑडियो की भी निष्पक्ष जांच हो और जिन लोगों के नाम इसमें सामने आए हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। कांग्रेस का कहना था कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे इन आरोपों की जांच से डरना नहीं चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीति की नहीं, बल्कि न्याय और सच्चाई की है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था और आज भी लोग इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कांग्रेस ने दोहराया कि सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच ही इस मामले में विश्वास बहाल कर सकती है। कैंडल मार्च शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन इसमें शामिल लोगों के संदेश साफ थे कि जब तक अंकिता भंडारी को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं और सरकार को हर स्तर पर जवाबदेह बनाया जाएगा।



