काशीपुर। सिक्ख समाज के 9वें गुरू श्री तेगबहादुर साहब जी एवं उनके साथ शहीद हुए भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक शहीदी नगर कीर्तन काशीपुर पहुँचेगा। यह नगर कीर्तन असाम से चलकर लगभग 2500 किलोमीटर की यात्रा के बाद दिनांक 08.09.2025 को काशीपुर श्री ननकाना साहब गुरूद्वारे में विश्राम करेगा और अगले दिन 09.09.2025 को प्रातः 8 से 9 बजे के बीच दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा। नगर कीर्तन के दौरान जगह-जगह सिक्खों के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रुककर श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। काशीपुर के आसपास के जसपुर, बाजपुर और अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में संगत गुरू ग्रन्थ साहब के दर्शन करने के लिए पहुंचेंगी। अनुमान है कि हजारों की संख्या में सिक्ख और अन्य समाज के लोग इस ऐतिहासिक नगर कीर्तन में शामिल होंगे और अपने श्रद्धा भाव से गुरू ग्रन्थ साहब को नमन करेंगे।
इतिहास में दर्ज है कि यह नगर कीर्तन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। मुस्लिम शासनकाल में औरंगजेब ने यह आदेश दिया कि पूरे हिन्दुस्तान में हर हिन्दू को मुसलमान बनाया जाए। कश्मीर के पंडितों ने अपनी कठिन परिस्थिति और अन्याय के बारे में गुरू तेगबहादुर साहब जी को बताया। पंडितों की इस प्रार्थना पर गुरू साहब ने कहा कि इसके लिए एक बड़ी संत आत्मा को बलिदान देना होगा। उनके साथ श्री गुरु गोविन्द सिंह जी ने भी समर्थन दिया। श्री गुरू तेगबहादुर साहब जी ने पांच साथियों के साथ दिल्ली की ओर प्रस्थान किया और औरंगजेब के सामने धर्म परिवर्तन की चुनौती स्वीकार करने से इनकार किया। इस साहसिक कार्य और बलिदान ने हिन्दू धर्म के लोगों की रक्षा की और इतिहास में अमर हो गया।
इस ऐतिहासिक नगर कीर्तन में उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति इसे और विशेष बना देगी। मुख्यमंत्री श्री धामी काशीपुर में रात्रि विश्राम करने के बाद 09 सितम्बर को प्रातः 8 से 9 बजे के बीच गुरूद्वारा साहब में संगत के दर्शन करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी गुरू ग्रन्थ साहब को मत्था टेकेंगे और सिक्ख समाज के साथ अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारियों और समाज के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री की यह उपस्थिति नगर कीर्तन के महत्व को और बढ़ा देगी और संगत में उत्साह की लहर दौड़ जाएगी।
गुरू साहब के शहीदी दिवस के प्रतीक इस नगर कीर्तन की यात्रा में सुरक्षा, सुविधा और आयोजन के सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। आयोजक कमेटी ने कहा कि नगर कीर्तन का प्रत्येक पड़ाव धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। संगत को दर्शन और श्रद्धा का अवसर प्रदान करने के लिए नगर कीर्तन के मार्ग में विशेष इंतजाम किए गए हैं। काशीपुर के स्थानीय लोगों ने भी पूरे उत्साह के साथ स्वागत की तैयारी कर रखी है। इस दौरान विभिन्न समाजिक और धार्मिक संगठनों के लोग भी मिलकर नगर कीर्तन में सहयोग करेंगे।
नगर कीर्तन की यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि सिक्ख समाज की वीरता, साहस और बलिदान की गाथा को याद करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। गुरू तेगबहादुर साहब जी ने धर्म और मानवाधिकार की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी शहादत आज भी अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस नगर कीर्तन के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके बलिदान और इतिहास की जानकारी मिलती है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर को और गरिमामय बना देगी और राज्य में धार्मिक तथा सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करेगी।
इस ऐतिहासिक आयोजन में काशीपुर के अलावा आस-पास के कस्बों और जिलों से बड़ी संख्या में लोग जुड़ेंगे। नगर कीर्तन की यात्रा के दौरान संगत को संगठित तरीके से दर्शन कराए जाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सुरक्षा बल, स्वयंसेवक और स्थानीय प्रशासन पूरी सतर्कता से कार्य करेंगे। नगर कीर्तन का उद्देश्य केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रदर्शन नहीं बल्कि समाज में भाईचारा, मानवता और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाना भी है। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठन नगर कीर्तन का सहयोग कर रहे हैं, जिससे यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक बन सके।
सिक्ख धर्म के अनुयायी और अन्य समाज के लोग इस ऐतिहासिक नगर कीर्तन में शामिल होकर अपने श्रद्धा भाव और सम्मान को व्यक्त करेंगे। गुरू ग्रन्थ साहब के दर्शन, शहीदी दिवस की याद और मुख्यमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन को बेहद महत्वपूर्ण और चर्चित बनाएगी। काशीपुर के लोग भी इस नगर कीर्तन में शामिल होने वाले संगत का स्वागत करेंगे और इसे ऐतिहासिक बनाएंगे। नगर कीर्तन की यह यात्रा 350 साल पहले हुए बलिदान को स्मरण कराती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है।



