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प्रतिभाशाली बेटी अनुश्री भारद्वाज की पुण्यतिथि पर भावुक श्रद्धांजलि सभा

काशीपुर। काशीपुर की मिट्टी पर जन्म लेकर पत्रकारिता, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ने वाली स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज की प्रथम पुण्यतिथि पर शनिवार को एक भावुक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस स्मृति कार्यक्रम की जिम्मेदारी उनकी ही समाजसेवी संस्था “प्रकृति हमारी धरोहर” ने उठाई थी। जसपुर खुर्द स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में शहरभर से समाजसेवी, पत्रकार और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने नम आंखों से इस प्रतिभाशाली बेटी को याद किया। वातावरण ऐसा था मानो हर कोई उनकी यादों में डूबा हुआ हो और अपने शब्दों से उन्हें अमर बनाने की कोशिश कर रहा हो। पुष्प अर्पित करते हुए हर किसी के चेहरे पर अनुश्री भारद्वाज के प्रति गहरी भावनाएं और श्रद्धा साफ झलक रही थी।

जनमानस को गहराई से प्रभावित करने वाले इस आयोजन में उपस्थित समाजसेवियों और पत्रकारों ने माना कि अनुश्री भारद्वाज का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत की अपूरणीय हानि है। बेहद कम उम्र में उन्होंने कठिन परिश्रम और साहस से वह मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसालें दी जाती रहेंगी। साहित्यिक रचनाओं और पत्रकारिता के माध्यम से समाज को जागरूक करने का उनका प्रयास हमेशा याद किया जाएगा। सभा में लोगों ने कहा कि अनुश्री भारद्वाज ने बच्चियों और युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत दी। उनकी कविताओं और लेखों में समाज को दिशा देने की क्षमता थी और यही वजह है कि उनका जाना काशीपुर के लिए गहरी पीड़ा लेकर आया है।

शोकसभा का सबसे मार्मिक क्षण तब सामने आया जब स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज की माता पूरे समय नम आंखों से अपनी बेटी की तस्वीर को निहारती रहीं। उनके चेहरे पर झलकते दर्द ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक हिला दिया। उनकी यह व्याकुलता सभा में एक ऐसी खामोशी छोड़ गई, जिसमें हर किसी ने अपने भीतर अनुश्री की कमी को महसूस किया। इस दौरान उपस्थित लोगों के दिल में एक ही आवाज गूंज रही थी कि ऐसी बेटियां केवल अपने परिवार की धरोहर नहीं होतीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में उत्तराखंड एथलीट चौंपियन समिति के अध्यक्ष विजेंद्र चौधरी भी विशेष रूप से शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज का जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज और पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। विजेंद्र चौधरी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कम उम्र में उन्होंने जिस साहस और समर्पण के साथ साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, वह सचमुच हर युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुश्री भारद्वाज ने अपनी मेहनत, संघर्ष और लगन से यह साबित किया कि किसी भी कठिन परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए। उनके विचारों और लेखनी में समाज को दिशा देने की शक्ति थी और उनकी कविताओं में हमेशा एक गहरा संदेश छिपा होता था। विजेंद्र चौधरी ने यह भी कहा कि काशीपुर की यह प्रतिभाशाली बेटी हमेशा याद की जाएगी और उनकी स्मृतियों को जीवित रखने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि अनुश्री भारद्वाज के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में समाजसेवी और पीसीसी सदस्य अलका पाल भी शामिल रहीं, जिन्होंने भावुक शब्दों में स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज को याद किया। उन्होंने कहा कि अनुश्री भारद्वाज जैसी बेटियां समाज के लिए धरोहर होती हैं और उनका जाना एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया है जिसे भर पाना असंभव है। अलका पाल ने कहा कि कम उम्र में उन्होंने जिस संघर्ष, लगन और समर्पण के बल पर पत्रकारिता और साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाई, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। उनकी कविताएं और लेख समाज को जागरूक करने वाले संदेशों से परिपूर्ण रहते थे और हर मुद्दे को उन्होंने साहसिक ढंग से उठाया। अलका पाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह भी कहा कि अनुश्री का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है, जिसने यह सिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो सफलता निश्चित है। उन्होंने संकल्प लिया कि अनुश्री भारद्वाज की स्मृतियों को जीवित रखने और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए समाज को मिलकर आगे आना होगा। उनकी प्रेरणा और विचार हमेशा लोगों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए काशीपुर मीडिया सेंटर के अध्यक्ष दिलप्रीत सिंह सेठी ने गहरी भावनाओं के साथ कहा कि स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज का जीवन पत्रकारिता जगत के लिए एक मिसाल था। उन्होंने याद करते हुए कहा कि अनुश्री भारद्वाज की पत्रकारिता यात्रा हमारे ही चैनल सुरागीलाल न्यूज़ चौनल से शुरू हुई थी और उसी के साथ उन्होंने अपने करियर की नई पहचान बनाई। दिलप्रीत सिंह सिटी ने कहा कि हमारे चौनल ने हमेशा यह महसूस किया कि अनुश्री भारद्वाज केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने वाली, ईमानदार और समाज की समस्याओं को बेबाकी से उठाने वाली एक सशक्त आवाज थीं। उन्होंने कहा कि अनुश्री ने बेहद कम समय में अपने परिश्रम और लगन से यह साबित किया कि पत्रकारिता सिर्फ खबर देने का काम नहीं, बल्कि समाज को सच दिखाने और उसकी सच्चाई को सामने लाने का माध्यम है। सुरागीलाल न्यूज़ चौनल के लिए यह गर्व की बात है कि इतनी प्रतिभाशाली और समर्पित पत्रकार ने अपनी शुरुआत हमारे साथ की और अपने हुनर से एक अलग मुकाम हासिल किया। दिलप्रीत सिंह सिटी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अनुश्री भारद्वाज की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाजसेवी व पत्रकार एम ए राहुल ने गहरी संवेदनाओं के साथ कहा कि स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज का जाना पत्रकारिता और साहित्य जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अनुश्री ने बहुत कम उम्र में कठिन संघर्षों और अथक परिश्रम से वह मुकाम हासिल किया, जो बड़े-बड़े अनुभवियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। उनकी लेखनी में समाज की सच्चाई को उजागर करने का साहस था और उनकी कविताओं में समाज को जागरूक करने का संदेश झलकता था। एम ए राहुल ने कहा कि अनुश्री ने हमेशा पत्रकारिता को जिम्मेदारी और ईमानदारी से निभाया, जिससे वह हर युवा के लिए प्रेरणा बनीं। उन्होंने यह भी कहा कि अनुश्री भारद्वाज जैसी प्रतिभाशाली बेटी को भुलाया नहीं जा सकता और उनकी स्मृतियां हमेशा समाज को सही दिशा देने का कार्य करती रहेंगी। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संकल्प लिया कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास सभी मिलकर करेंगे।

अनुश्री भारद्वाज के मामा पीयूष गौड़ ने श्रद्धांजलि सभा के दौरान गहरी वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि अनुश्री की मृत्यु आज भी रहस्य बनी हुई है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह सवाल अब तक अनुत्तरित है कि वह घटना वास्तव में एक स्वाभाविक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और कारण छिपा हुआ है। पीयूष गौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परिवार के लिए यह पीड़ा और भी गहरी इसलिए है क्योंकि इस असमय विदाई का सच आज तक सामने नहीं आ पाया। उन्होंने कहा कि अनुश्री जैसी होनहार और संघर्षशील बेटी को खोना केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है। उनकी लेखनी और उनके विचार समाज को हमेशा नई दिशा देते रहेंगे, लेकिन यह सवाल कि उनकी मृत्यु आखिरकार दुर्घटना थी या कोई और सच्चाई, अभी भी परिवार और समाज दोनों के मन में एक गहरी कसक बनकर मौजूद है।

मंच का संचालन श्याम मॉडर्न स्कूल के प्रबंधक अमित शर्मा द्वारा किया गया और उन्होंने पूरे कार्यक्रम के दौरान अपनी संवेदनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया। श्रद्धांजलि सभा का माहौल बेहद भावुक था और अमित शर्मा ने कई बार अपनी बात रखते हुए खुद को भावनाओं से भरपूर पाया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज केवल एक पत्रकार या कवयित्री नहीं थीं, बल्कि वह समाज की जागरूक आवाज थीं, जिन्होंने कम उम्र में अपने संघर्ष और मेहनत से एक विशेष पहचान बनाई। अमित शर्मा ने यह भी कहा कि अनुश्री का जाना समाज के लिए बड़ी क्षति है और उनकी स्मृतियां हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। उन्होंने अपने शब्दों में इस बात पर जोर दिया कि अनुश्री भारद्वाज जैसी बेटियां समाज को नई दिशा देती हैं और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। पूरे संचालन के दौरान उनका भावुक होना वहां मौजूद हर व्यक्ति को गहराई से छू गया।

पत्रकार निखील जाटव, पत्रकार भागीरथ शर्मा, पत्रकार जुगनू खान, पत्रकार मोहम्मद शमी, पत्रकार सुनील कोठारी, पत्रकार बकुल डोनाल्ड, पत्रकार हिमांशु ठाकुर, पत्रकार अनुराग भटनागर, पत्रकार असीम साहनी, पत्रकार सुनील शर्मा, पत्रकार अभिषेक बलोदी, चित्रांश सक्सेना, छात्र सेवक जतिन शर्मा, रिंकु बिष्ट और अंचित शर्मा समेत बड़ी संख्या में महाविद्यालय के छात्र इस श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे और सभी ने गहरी संवेदनाओं के साथ स्वर्गीय अनुश्री भारद्वाज को याद किया। उपस्थित लोगों ने एकमत होकर कहा कि अनुश्री भारद्वाज जैसी बेटियां केवल अपने परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर होती हैं और उनका जाना ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अनुश्री ने पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में अपने अथक परिश्रम, संघर्ष और समर्पण से जो पहचान बनाई, वह वास्तव में हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी लेखनी ने हमेशा समाज को सच दिखाने और जागरूक करने का कार्य किया। छात्रों और पत्रकारों ने यह भी कहा कि अनुश्री भारद्वाज की स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी और उनका संघर्षशील जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा। सभी ने भावुक होकर पुष्प अर्पित किए और संकल्प लिया कि अनुश्री भारद्वाज के अधूरे सपनों को मिलकर पूरा किया जाएगा। सभा में यह साफ झलक रहा था कि अनुश्री का नाम और योगदान सदैव लोगों के दिलों में अंकित रहेगा।

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