काशीपुर। शहर का कुंडेश्वरी रोड बुधवार को उस समय सनसनी से भर उठा जब गुरू नानक स्कूल के भीतर हुई अप्रत्याशित गोलीबारी की घटना ने शिक्षा के शांत वातावरण को पूरी तरह से झकझोर दिया। विद्यालय की चारदीवारी के भीतर जहां सामान्यतः ज्ञान का प्रकाश फैलता है, वहां अचानक उठी गोली की आवाज ने सभी को स्तब्ध कर दिया। खबर आई कि शिक्षक गगन सिंह पर उसी स्कूल के एक छात्र ने गोलियां दाग दीं। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम ने क्षेत्र में भय और अविश्वास का वातावरण पैदा कर दिया। घायल गगन सिंह को तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सक उनकी स्थिति पर सतत नजर रखे हुए हैं। हालांकि इस हमले के पीछे की असली वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है, लेकिन इतना जरूर तय है कि इस वारदात ने लोगों की सोच और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं और आसपास के इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
तेजी से फैली इस घटना की सूचना ने पूरे क्षेत्र को अशांत कर दिया और विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के दिलों में गहरी चिंता का भाव उत्पन्न कर दिया। जिस स्थान को अब तक शिक्षा और अनुशासन का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा, वही जगह अचानक हिंसा का मंच बन जाएगी, यह किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। पुलिस बल मौके पर तत्काल पहुंचा और पूरे घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि वे हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि गोली चलाने के पीछे छात्र की मानसिकता और परिस्थिति क्या थी। इस दौरान स्कूल प्रबंधन भी गहरे सदमे में है और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कठोर सवालों का सामना कर रहा है। इस चौंकाने वाली वारदात ने सामान्य शिक्षा व्यवस्था की जड़ों तक को हिला दिया है।
इस मामले के उजागर होते ही स्थानीय जनमानस के भीतर असुरक्षा की भावना और भय का माहौल साफ झलकने लगा। माता-पिता के मन में यह आशंका घर कर गई है कि यदि विद्यालय जैसे स्थान पर ऐसी घटनाएं हो सकती हैं तो उनके बच्चों की सुरक्षा आखिर किस पर छोड़ी जा सकती है। बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनका सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना अभिभावकों की सबसे बड़ी अपेक्षा होती है और इसी वजह से पूरे क्षेत्र में बेचौनी और अविश्वास गहराता जा रहा है। हर कोई प्रशासन से यह उम्मीद कर रहा है कि दोषी छात्र की पहचान कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और आने वाले समय में इस तरह की वारदात की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। गुरू नानक स्कूल की यह घटना अब न केवल स्थानीय चर्चा का मुद्दा बन चुकी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रश्नचिह्न छोड़ गई है।
काशीपुर गोलीकांड के असर ने शिक्षा जगत को गहन संकट की ओर धकेल दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए CBSE और मान्यता प्राप्त स्कूलों की कार्यकारिणी ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें बढ़ती असुरक्षा और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर मंथन किया गया। लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अगले दिन काशीपुर के सभी ब्ठैम् और मान्यता प्राप्त स्कूल पूरी तरह बंद रहेंगे। साथ ही सभी स्कूल सामूहिक रूप से शांति के समर्थन में धरना भी देंगे, ताकि यह संदेश समाज और शासन तक पहुंचे कि विद्यालयों के भीतर अब सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस सामूहिक निर्णय ने पूरे क्षेत्र को संकेत दिया कि शिक्षा संस्थान अब चुपचाप खड़े होकर ऐसी घटनाओं को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
बैठक के बाद शिक्षकों और प्रबंधन समितियों ने प्रशासन और राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से मांग रखी कि अब समय आ गया है जब विद्यालयों की सुरक्षा को लेकर कठोर नियम और नीतियां लागू की जाएं। उनका कहना था कि शिक्षकों को केवल अध्यापन तक सीमित समझना उचित नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा भी उतनी ही अहम है जितनी शिक्षा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून और दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाने चाहिए ताकि कोई भी छात्र या बाहरी तत्व इस तरह का दुस्साहस करने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर हो। साथ ही स्कूलों के भीतर सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करना अब समय की जरूरत बन गया है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को भयमुक्त वातावरण मिल सके।
शिक्षकों और प्रबंधकों का कहना है कि उनका यह आंदोलन किसी तरह का विरोध नहीं बल्कि एक शांति और सुरक्षा की अपील है। उनका स्पष्ट मत है कि विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि सुरक्षा का भी सुदृढ़ गढ़ होना चाहिए। गगन सिंह पर गोली चलाने की इस सनसनीखेज घटना ने न केवल समाज को झकझोरा है बल्कि यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब शिक्षा संस्थानों और वहां कार्यरत शिक्षकों की सुरक्षा के लिए विशेष नियम और कानून बनाए जाने चाहिए। काशीपुर की इस भयावह वारदात ने जिस बहस को जन्म दिया है, उसने समाज के हर वर्ग को यह सोचने के लिए विवश कर दिया है कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के बिना शिक्षा का वास्तविक अर्थ अधूरा है और अब पूरे देश की निगाहें पुलिस जांच के नतीजों और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई हैं।



