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डिजिटल ठगों पर पुलिस का बड़ा प्रहार एसएसपी अजय गणपति ने सिखाए साइबर सुरक्षा के अचूक मंत्र

बजाज कंपनी पंतनगर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में एसएसपी अजय गणपति ने ओटीपी, बैंकिंग जानकारी और संदिग्ध लिंक से सतर्क रहने की अपील करते हुए 1930, 1090, 1098, 112 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।

पंतनगर। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया ने जहां लोगों के जीवन को पहले से अधिक आसान और सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर अपराधों का बढ़ता दायरा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई और गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठग भी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे समय में आम नागरिकों को जागरूक करना ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत माध्यम माना जा रहा है। इसी उद्देश्य को लेकर ऊधम सिंह नगर पुलिस ने साइबर सुरक्षा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पंतनगर स्थित बजाज कंपनी परिसर में व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने कर्मचारियों, अधिकारियों तथा उपस्थित लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रत्येक पहलू से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आधुनिक समय में केवल स्मार्टफोन या इंटरनेट का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सुरक्षित उपयोग की जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों की मेहनत की कमाई कुछ ही मिनटों में हड़प लेते हैं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहना और डिजिटल सुरक्षा के मूलभूत नियमों का पालन करना चाहिए। जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से यह भी बताया गया कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई बार लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण पुलिस लगातार विभिन्न संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, उद्योगों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का अभियान चला रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक ने जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। बैंकिंग सेवाओं से लेकर खरीदारी, निवेश, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और व्यक्तिगत संवाद तक अधिकांश गतिविधियां अब ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रही हैं। ऐसे में साइबर अपराधियों ने भी लोगों की छोटी-सी असावधानी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को फोन कॉल, व्हाट्सएप संदेश, सोशल मीडिया लिंक, ई-मेल अथवा किसी अन्य ऑनलाइन माध्यम से आने वाले संदिग्ध संदेशों पर बिना जांच-परख के विश्वास नहीं करना चाहिए। अजय गणपति ने विशेष रूप से सभी कर्मचारियों को सावधान करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, बैंक खाते का विवरण, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या किसी भी प्रकार की गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के अधिकारी, बैंक कर्मचारी, आरबीआई, आयकर विभाग या किसी भी सरकारी संस्था का प्रतिनिधि कभी भी फोन पर इस प्रकार की गोपनीय जानकारी नहीं मांगता। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को किसी संस्था का अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानते हुए बातचीत समाप्त कर देनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि किसी भी लालच, पुरस्कार, लॉटरी, निवेश पर अत्यधिक लाभ, नौकरी, केवाईसी अपडेट या बैंक खाता बंद होने जैसी बातों के बहाने आने वाले कॉल और संदेशों से विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि अधिकांश साइबर अपराध इन्हीं तरीकों के माध्यम से किए जाते हैं।

अपने संबोधन के दौरान एसएसपी अजय गणपति ने साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो समय पर उठाया गया एक कदम उसकी धनराशि वापस मिलने की संभावना को काफी बढ़ा सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि ऐसी किसी भी घटना के तुरंत बाद बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में प्रारंभिक कुछ मिनट और शुरुआती घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान संबंधित बैंकिंग प्रणाली में धनराशि को ट्रैक करने और आवश्यक कार्रवाई करने की संभावना सबसे अधिक रहती है। अजय गणपति ने यह भी कहा कि साइबर अपराध की जानकारी छिपाने या देर से शिकायत करने के कारण कई पीड़ितों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए किसी भी प्रकार की झिझक छोड़कर तत्काल पुलिस और संबंधित एजेंसियों को सूचित करना चाहिए। उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से अपील की कि यदि उनके परिवार, मित्र या परिचित भी किसी साइबर ठगी का शिकार होते हैं तो उन्हें भी तत्काल हेल्पलाइन और पोर्टल का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि समय रहते लोगों को जागरूक कर ऐसे अपराधों को होने से पहले ही रोकना भी है।

साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम के दौरान एसएसपी अजय गणपति ने केवल ऑनलाइन वित्तीय सुरक्षा तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी विस्तार से साझा की। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए संचालित 1090 हेल्पलाइन तथा गौरा शक्ति ऐप अत्यंत उपयोगी माध्यम हैं, जिनका उपयोग किसी भी प्रकार की परेशानी या आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसी प्रकार बच्चों से जुड़े मामलों में 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण, उत्पीड़न, लापरवाही अथवा किसी अन्य प्रकार की समस्या सामने आती है तो इसकी सूचना तुरंत इस हेल्पलाइन पर दी जानी चाहिए। उन्होंने आम नागरिकों को यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में 112 नंबर पर संपर्क कर पुलिस, चिकित्सा अथवा अन्य आवश्यक सहायता तत्काल प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध फोन कॉल, अनजान लिंक, फर्जी संदेश, सोशल मीडिया धोखाधड़ी या ऑनलाइन ठगी से जुड़ी गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, क्योंकि जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधियों के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि डिजिटल युग में तकनीक का सुरक्षित उपयोग ही सबसे बड़ी सतर्कता और सुरक्षा की कुंजी है।

कार्यक्रम में उपस्थित कर्मचारियों और अधिकारियों ने भी साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका एसएसपी अजय गणपति तथा पुलिस अधिकारियों ने सरल और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से विस्तार से समाधान किया। लोगों को बताया गया कि आजकल साइबर अपराधी केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सोशल मीडिया प्रोफाइल, फर्जी मोबाइल एप्लीकेशन, क्यूआर कोड, डिजिटल लोन, निवेश योजनाओं, ऑनलाइन खरीदारी, नौकरी के झांसे, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और वीडियो कॉल जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग कर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, मोबाइल में संदिग्ध एप डाउनलोड करने अथवा किसी अपरिचित व्यक्ति द्वारा भेजे गए दस्तावेजों को बिना जांचे खोलने से भी साइबर अपराधी मोबाइल फोन और व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी संदेश या कॉल को लेकर जरा भी संदेह हो तो उसकी पुष्टि किए बिना कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। कार्यक्रम में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर अपने मोबाइल फोन, बैंकिंग एप और डिजिटल खातों के पासवर्ड बदलते रहना चाहिए तथा दो-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि छोटी-सी सावधानी भविष्य में होने वाले बड़े आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान से बचा सकती है। उपस्थित कर्मचारियों ने इस जागरूकता कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें कई ऐसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी मिली, जिनसे वे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और परिचितों को भी साइबर ठगी से सुरक्षित रखने में सक्षम होंगे।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस या किसी एक सरकारी एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि जब तक लोग स्वयं जागरूक नहीं होंगे और दूसरों को भी जागरूक करने का प्रयास नहीं करेंगे, तब तक साइबर अपराधियों के लिए नए-नए तरीके अपनाना आसान बना रहेगा। उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों, महिलाओं, विद्यार्थियों और उन लोगों को विशेष रूप से डिजिटल सुरक्षा की जानकारी दें, जो तकनीक का उपयोग तो करते हैं, लेकिन साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि साइबर ठग अक्सर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें डिजिटल सुरक्षा की सीमित जानकारी होती है। इसलिए प्रत्येक जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास के लोगों को भी ओटीपी साझा न करने, बैंकिंग गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखने, संदिग्ध लिंक से बचने और किसी भी ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज और पुलिस मिलकर कार्य करें तो साइबर अपराधों की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। पुलिस की ओर से समय-समय पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का उद्देश्य भी यही है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के साथ-साथ अपराध होने से पहले ही लोगों को सतर्क कर सुरक्षित बनाया जाए।

समापन अवसर पर एसएसपी अजय गणपति ने दोहराया कि डिजिटल युग में सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम केवल अत्याधुनिक तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता और सतर्कता है। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, साइबर अपराधी भी उसी गति से नए तरीके अपना रहे हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को समय के साथ स्वयं को भी अपडेट रखना होगा। उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग पूरी जिम्मेदारी के साथ करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना बिना विलंब पुलिस को दें। उन्होंने कहा कि 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन, राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल, 1090, गौरा शक्ति ऐप, 1098 और 112 जैसी सेवाएं केवल आपात स्थिति में सहायता के लिए नहीं हैं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रभावी माध्यम हैं, जिनका समय पर उपयोग कई गंभीर घटनाओं को रोक सकता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कर्मचारियों ने साइबर सुरक्षा के प्रति अधिक सजग रहने तथा अपने परिवार, सहकर्मियों और समाज के अन्य लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि तकनीक का उपयोग सावधानी, सतर्कता और सही जानकारी के साथ किया जाए तो साइबर अपराधियों की अधिकांश साजिशों को विफल किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि ऊधम सिंह नगर को साइबर अपराधों के विरुद्ध और अधिक सुरक्षित तथा जागरूक जनपद बनाया जा सके।

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