रामनगर। देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में सामाजिक संगठन नेकी की दीवार ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप की मांग करते हुए अपनी चिंता सार्वजनिक की है। संगठन के संयोजक तारा घिल्डियाल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किया जा रहा अनशन केवल एक संगठन अथवा कुछ व्यक्तियों का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह देशभर के लाखों युवाओं, विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में उठ रहे सवालों का प्रतीक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य को लेकर लगातार चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि सरकार इन मुद्दों को केवल विरोध प्रदर्शन के रूप में देखने के बजाय व्यापक जनभावनाओं के रूप में स्वीकार कर संवाद स्थापित करे तो अनेक समस्याओं का समाधान निकल सकता है। तारा घिल्डियाल ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि देश के भविष्य की नींव है, इसलिए इससे जुड़े प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना था कि युवाओं का विश्वास किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है और यदि वही विश्वास कमजोर पड़ने लगे तो उसका प्रभाव केवल वर्तमान पर नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस पूरे विषय को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे के रूप में देखा जाए और सभी संबंधित पक्षों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित कर समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाए।
प्रेस वक्तव्य में तारा घिल्डियाल ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा प्रारंभ कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद, परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और युवाओं की लगातार सामने आ रही चिंताओं ने लाखों परिवारों को प्रभावित किया है। उनके अनुसार प्रत्येक छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है और उसके सपनों से पूरा परिवार जुड़ा होता है। यदि किसी भी स्तर पर परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो इसका सीधा असर युवाओं के मनोबल और उनके भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि नेकी की दीवार का मानना है कि सरकार को किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति में पारदर्शी जांच, स्पष्ट संवाद और समयबद्ध निर्णय की नीति अपनानी चाहिए ताकि युवाओं का विश्वास मजबूत बना रहे। तारा घिल्डियाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि इस प्रकार के संवेदनशील मामलों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की जाती तो असंतोष का दायरा और अधिक बढ़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के करोड़ों विद्यार्थी केवल निष्पक्ष अवसर चाहते हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिसमें प्रत्येक प्रतिभाशाली युवा को समान अवसर और न्यायपूर्ण वातावरण मिल सके। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखना किसी भी विकसित लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है और यही विश्वास राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला बनता है।
अपने बयान में तारा घिल्डियाल ने केंद्र सरकार से यह मांग भी की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि नेकी की दीवार का मत है कि यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या संस्थागत जवाबदेही बनती है तो उसके अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने तथा उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग भी संगठन की ओर से उठाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संगठन की मांग है और इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। तारा घिल्डियाल ने कहा कि संगठन चाहता है कि पूरे मामले की जांच ऐसी प्रक्रिया के तहत हो, जिस पर सभी पक्षों का विश्वास कायम रह सके और भविष्य में इस प्रकार के विवाद दोबारा उत्पन्न न हों। उनके अनुसार यदि शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे प्रश्नों का समाधान पारदर्शी ढंग से किया जाएगा तो इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि इस विषय पर शीघ्र पहल करती है तो इससे अनावश्यक विवादों पर विराम लग सकता है और देश के युवाओं को सकारात्मक संदेश मिलेगा कि उनकी आवाज सुनी जा रही है। समाचार लिखे जाने तक तारा घिल्डियाल द्वारा उठाई गई इन मांगों पर केंद्र सरकार अथवा संबंधित मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
अपने प्रेस वक्तव्य में तारा घिल्डियाल ने आगे कहा कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं करती और जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक सहित अन्य आंदोलनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया जाता, तो स्थिति और अधिक व्यापक जनचर्चा का विषय बन सकती है। उन्होंने कहा कि नेकी की दीवार का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से युवाओं की भावनाओं और जनहित से जुड़े विषयों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संवाद की प्रक्रिया प्रारंभ कर समयबद्ध समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे देशभर के विद्यार्थियों और अभिभावकों में सकारात्मक संदेश जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संगठन द्वारा उठाए गए मुद्दों और अनशनकारियों की मांगों की लगातार अनदेखी की जाती रही, तो नेकी की दीवार की प्रहरी विंग पूरे उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध जनजागरण अभियान और लोकतांत्रिक आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है और संगठन उसी संवैधानिक अधिकार के अंतर्गत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहता है। तारा घिल्डियाल के अनुसार युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर देरी से लिया गया निर्णय अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सरकार को इस मामले में त्वरित और प्रभावी पहल करनी चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता बनी रहे।
नेकी की दीवार के संयोजक ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि संगठन का प्रत्येक कार्यक्रम संविधान और कानून के दायरे में रहकर पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा से सामाजिक सरोकारों, जनहित के मुद्दों और युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर सकारात्मक भूमिका निभाता आया है और आगे भी इसी दिशा में कार्य करता रहेगा। तारा घिल्डियाल ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था को अस्थिर करना नहीं होना चाहिए, बल्कि जनभावनाओं को जिम्मेदार तरीके से शासन तक पहुंचाना और समाधान का मार्ग प्रशस्त करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी प्रकार की हिंसा, अव्यवस्था या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों का समर्थन नहीं करता तथा भविष्य में यदि कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाता है तो वह पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होगा। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषय किसी एक राज्य या एक संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध देश के करोड़ों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से है। इसलिए इस विषय पर व्यापक संवाद, पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के मन में यदि व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहेगा तो देश की विकास यात्रा और अधिक सशक्त होगी तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
प्रेस को जारी अपने विस्तृत बयान के अंत में तारा घिल्डियाल ने दोहराया कि नेकी की दीवार युवाओं के भविष्य, पारदर्शी व्यवस्था और जनहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि संगठन का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी विषय पर पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार समय रहते सकारात्मक संवाद स्थापित कर सभी पक्षों के साथ चर्चा करती है तो अधिकांश विवादों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा सकता है। तारा घिल्डियाल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार विद्यार्थियों की चिंताओं, जनभावनाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए जा रहे सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा आवश्यक निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था में विश्वास को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन भविष्य में भी युवाओं के हित, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर अपनी आवाज उठाता रहेगा। समाचार लिखे जाने तक तारा घिल्डियाल द्वारा जारी इस प्रेस वक्तव्य पर केंद्र सरकार अथवा संबंधित मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई थी।





