spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडबदरीनाथ चढ़ावा विवाद ने बदली सियासत की दिशा चुनावी रण में भाजपा...

बदरीनाथ चढ़ावा विवाद ने बदली सियासत की दिशा चुनावी रण में भाजपा कांग्रेस आमने सामने

उत्तराखंड। प्रदेश की शांत वादियों में इन दिनों एक ऐसा सियासी भूचाल आया हुआ है, जिसने सूबे की राजनीतिक सरगर्मियों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। देवभूमि की सियासत में लंबे समय से अंकिता भंडारी हत्याकांड, लचर कानून व्यवस्था, अनियंत्रित अपराध, लगातार सामने आते भ्रष्टाचार के संगीन मामले और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक जैसे ज्वलंत विषय मुख्यधारा की खबरों में बने हुए थे। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इन तमाम संवेदनशील मुद्दों को मुख्य ढाल बनाकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को चौतरफा घेरने का लगातार प्रयास कर रही थी, जिससे सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही थी। हालांकि, जैसे-तैसे भाजपा इन गंभीर और चौकाने वाले आरोपों का प्रबंधन करने और जनता के बीच अपनी छवि को सुधारने की जद्दोजहद में जुटी ही थी कि चुनावी सरगर्मियों के बीच विपक्ष के हाथ एक ऐसा अचूक और बेहद संवेदनशील हथियार लग गया, जिसने पूरी बाजी पलट कर रख दी है। बदरीनाथ धाम मंदिर में श्रद्धा के रूप में आने वाले चढ़ावे की कथित चोरी का यह ताजातरीन सनसनीखेज मामला न केवल एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है, बल्कि इसने देश-विदेश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था को भी बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। अब यह यक्ष प्रश्न हर जुबान पर तैर रहा है कि क्या यह बेहद भावनात्मक और ज्वलंत मुद्दा आगामी चुनावी महासंग्राम में सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदलने में निर्णायक साबित होगा।

धार्मिक स्थलों पर चंदे की हेराफेरी और घपलों का यह सिलसिला देशव्यापी स्तर पर उस वक्त बेहद गर्म हुआ जब मई 2026 के आखिरी सप्ताह में समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता अखिलेश यादव ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर से करोड़ों रुपये गायब होने के बेहद गंभीर और चौकाने वाले सार्वजनिक आरोप लगाए। इन सनसनीखेज आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने अपनी जांच तेज कर दी। इस पूरे हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया और अब तक हुई बड़ी कार्रवाइयों के तहत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कद्दावर महामंत्री चंपत राय और प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है और जांच एजेंसियों द्वारा किए जा रहे खुलासों में चंदा चोरी के नए-नए और बेहद शातिर तौर-तरीके सामने आ रहे हैं, जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस अभूतपूर्व मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाकर भाजपा के खिलाफ एक अभेद्य किलेबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

अयोध्या का यह भीषण विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि जुलाई 2026 के शुरुआती दिनों में ही उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम से भी चढ़ावे में भारी हेराफेरी और चोरी के संगीन आरोपों ने सूबे की सियासत में आग लगा दी। हालांकि, देश भर में बन रहे दबावपूर्ण माहौल और वर्तमान परिस्थितियों की संवेदनशीलता को भांपते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) और राज्य सरकार ने इस बार जरा भी ढिलाई या लापरवाही नहीं बरती। सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया और प्राथमिक स्तर पर संलिप्तता पाए जाने के कारण एक आरोपी कर्मचारी को नौकरी से सस्पेंड कर दिया है। इस पूरे महाघोटाले की आंतरिक जांच वर्तमान में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसके वास्तविक तथ्य और बेहद बारीक जानकारियां अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही सामने आ पाएंगी। लेकिन चुनावी वर्ष की इस नाजुक चौखट पर एक के बाद एक हुए इन बैक-टू-बैक विवादों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार को एक जबरदस्त और अप्रत्याशित मनोवैज्ञानिक दबाव के घेरे में ला खड़ा किया है।

उत्तराखंड के वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषकों और जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि बदरीनाथ धाम में सामने आया यह महाघोटाला अब महज विभागीय जांच एजेंसियों या फाइलों की कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनाव को फतह करने की एक बहुत बड़ी और प्रभावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस पूरे घृणित घटनाक्रम को सीधे तौर पर भाजपा सरकार की नैतिक जवाबदेही और विफलता से जोड़ते हुए इसे सूबे के सुदूरवर्ती गांवों से लेकर बड़े-बड़े शहरों की गलियों तक पहुंचाने की एक बेहद आक्रामक और व्यापक योजना पर दिन-रात काम कर रही है। उत्तराखंड के भीतर जिस तरह से कांग्रेस आलाकमान ने अपने पूरे सांगठनिक ढांचे को अचानक से अत्यधिक सक्रिय और आक्रामक मोड में डाल दिया है, उससे यह साफ-साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले चुनावी दंगल में बदरीनाथ चढ़ावा चोरी का यह मामला भाजपा के राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के एजेंडे के खिलाफ कांग्रेस का सबसे मारक और अचूक राजनीतिक अस्त्र बनने जा रहा है।

इस पूरे मामले की गूंज अब देवभूमि की वादियों से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली के सत्ता गलियारों तक बहुत प्रखरता से सुनाई देने लगी है क्योंकि कांग्रेस ने इस स्थानीय स्तर के विरोध को एक राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील करने का पूरा मन बना लिया है। देहरादून से लेकर दिल्ली तक पार्टी के सर्वोच्च और बेहद वरिष्ठ रणनीतिकार इस गंभीर विषय पर लगातार तीखे और हमलावर बयान जारी कर रहे हैं, जिससे सत्तापक्ष पूरी तरह से असहज नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे तीर चलाते हुए कहा कि हमारे परम पावन आस्था के केंद्रों की सुरक्षा और उनकी गरिमा बनाए रखना केवल एक सामान्य प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों सनातन प्रेमियों की अटूट भावनाओं और अंतरात्मा से जुड़ा एक बेहद पावन विषय है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में मांग की है कि ऐसे गंभीर मामलों में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए, दोषियों को अविलंब चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए और दोनों ही पवित्र धामों की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराकर सच देश के सामने लाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति कभी न हो सके।

वास्तव में देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी वर्तमान में भाजपा सरकार को जनभावनाओं के कटघरे में खड़ा करने का कोई भी छोटा या बड़ा मौका अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती है, और इसीलिए उसने इस मुद्दे को आर-पार की लड़ाई बना लिया है। विपक्षी नेताओं का यहां तक सनसनीखेज आरोप है कि शासन-प्रशासन के ऊंचे पदों पर बैठे लोग इस पूरे घोटाले की कड़ियों को दबाने और रफा-दफा करने की पुरजोर कोशिशों में लगे हुए हैं ताकि ऊंचे रसूखदार दोषियों को कानून के शिकंजे से बचाया जा सके। यही मुख्य वजह है कि उत्तराखंड कांग्रेस के प्रांतीय नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय स्तर के बड़े-बड़े चेहरे इस मामले को लेकर सड़क से लेकर सदन तक पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कांग्रेस का रणनीतिक उद्देश्य बिल्कुल शीशे की तरह साफ है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील विषय को सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का मुख्य आधार बनाकर भाजपा को लगातार चौतरफा दबाव में रखा जाए। पूर्व में भाजपा जिन धार्मिक मुद्दों पर हमेशा फ्रंटफुट पर रहकर विपक्ष को पस्त करती थी, आज ठीक उसी पिच पर कांग्रेस बेहद आक्रामक नजर आ रही है और उसके नेता धरना, आमरण अनशन, उपवास और मौन व्रत जैसे गांधीवादी तरीकों से इसे सीधे जनभावनाओं से जोड़ रहे हैं।

इस महासंग्राम को और अधिक धार देते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के साथ जिस शर्मनाक और सुनियोजित ढंग से पहले अयोध्या के राम मंदिर में खिलवाड़ किया गया, ठीक वैसी ही घृणित तस्वीर अब हमारे पावन श्री बदरीनाथ धाम से भी सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के शीर्ष गलियारों द्वारा सोची-समझी रणनीति के तहत मंदिरों के प्रबंधन में नियुक्त किए गए लोगों पर ही पावन मंदिरों में चोरी करने, बहुमूल्य हीरे-जवाहरात गायब करने और चढ़ावे की राशि में करोड़ों की हेराफेरी करने के अत्यंत संगीन आरोप लगे हैं। गणेश गोदियाल ने इस पूरे गंभीर प्रकरण की दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए तत्काल एक संयुक्त विधानसभा समिति (JPC) के गठन अथवा उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की देखरेख में न्यायिक जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई है, जिसमें निष्पक्षता के लिए विपक्ष के सदस्यों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए क्योंकि यह एक अत्यंत जघन्य और अक्षम्य सामाजिक अपराध है जिसका जवाब सरकार को देना ही होगा।

सरकार को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश देने के लिए हाल ही में बदरीनाथ धाम के ऐतिहासिक सिंह द्वार पर कांग्रेस के स्थानीय विधायक लखपत सिंह बुटोला और ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा रखा गया मौन व्रत केवल एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह विपक्ष की ओर से सरकार को यह साफ चेतावनी थी कि पार्टी इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। कांग्रेस के ये जमीनी नेता वर्तमान में बीकेटीसी प्रशासन और राज्य सरकार पर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का खुला आरोप लगा रहे हैं और इसके लिए सीधे तौर पर हाई कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। धरने के दौरान प्रखरता से अपनी बात रखते हुए बदरीनाथ के विधायक लखपत सिंह बुटोला ने कहा था कि यदि हमारे सर्वोच्च और सबसे पवित्र धार्मिक संस्थानों में आने वाला भक्तों का चढ़ावा भी सुरक्षित नहीं है, तो यह केवल एक साधारण आर्थिक या वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास और आस्था की हत्या है। कांग्रेस पार्टी इसी मर्म को आम जनता के दिलों तक पहुंचाकर भाजपा के खिलाफ एक अभूतपूर्व और मजबूत राजनीतिक माहौल तैयार करने में पूरी शिद्दत से जुटी हुई है।

इस मुद्दे को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देने के लिए कांग्रेस ने राज्य के चप्पे-चप्पे पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जिसके तहत रुद्रपुर, घनसाली, देहरादून, ज्योतिर्मठ जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों में सरकार के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं ताकि इस विवाद को एक राज्यव्यापी क्रांति की शक्ल दी जा सके। इसी कड़ी में रुद्रपुर में नगर कांग्रेस कमेटी के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर और उत्तराखंड के बदरीनाथ-केदारनाथ धाम से जुड़े इस कथित चढ़ावा महाविवाद के विरोध में एक दिवसीय सामूहिक उपवास रखकर जनता का ध्यान खींचा, तो वहीं दूसरी ओर घनसाली की सड़कों पर कांग्रेस के दिग्गजों ने भाजपा सरकार के पुतले फूंकते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की पुरजोर मांग उठाई। इस पूरे राष्ट्रव्यापी और राज्यव्यापी सियासी ड्रामे का एकमात्र ध्येय केवल अपना विरोध दर्ज कराना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की धर्मपरायण जनता के बीच यह गहरा संदेश स्थापित करना है कि कांग्रेस पार्टी हमारे देवस्थानों की पवित्रता, गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने और सरकार को घुटनों पर लाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

इस पूरे सियासी बवंडर को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के लिए दिल्ली से विशेष तौर पर उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने भी मोर्चा संभाल लिया है और उन्होंने इस पूरे विवाद को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार के स्तर पर उठाने का प्रयास किया है। उन्होंने बदरीनाथ धाम में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों का सिलसिलेवार ब्यौरा पेश करते हुए इस अति-संवेदनशील मामले पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रहस्यमयी चुप्पी पर बड़े सवाल खड़े किए हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि संबंधित भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल पद से बर्खास्त कर उनके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। कांग्रेस आलाकमान ने साफ लफ्जों में यह संकेत दे दिया है कि धार्मिक आस्था के इन पावन केंद्रों में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनैतिक कृत्य को सत्ता का संरक्षण मिलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि सरकार की आगामी कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही, तो आने वाले दिनों में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और पूरे उत्तराखंड राज्य में एक ऐसा विराट जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा जिसे संभालना सरकार के बस में नहीं होगा।

दूसरी तरफ, विपक्ष के इन तीखे और तीक्ष्ण हमलों से बेपरवाह भारतीय जनता पार्टी इस पूरे विवाद को कांग्रेस का एक सोचा-समझा, मनगढ़ंत और पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित दुष्प्रचार अभियान करार दे रही है। सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही सार्वजनिक मंचों से बेहद कड़े लहजे में साफ कर दिया है कि किसी भी पावन धार्मिक स्थल के भीतर चोरी या हेराफेरी करना कोई सामान्य प्रशासनिक अपराध नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत अक्षम्य और घोर पाप है और इसमें संलिप्त किसी भी दोषी या अपराधी को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढकर सख्त से सख्त सजा दी जाएगी, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा के तमाम शीर्ष रणनीतिकारों और मंत्रियों का दावा है कि उनकी सरकार ने जैसे ही इस मामले की भनक लगी, बिना एक पल गंवाए तुरंत स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है ताकि सच सामने आ सके।

इस राजनैतिक युद्ध में सरकार का बचाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने विपक्ष पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा सनातन धर्म की अटूट आस्था, उसकी मान-प्रतिष्ठा और जन-विश्वास के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ या समझौता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपने शासनकाल में ऐसे दागी आरोपियों को सरकारी तंत्र में स्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया, आज जनता ऐसे घोर सनातन विरोधियों और ढोंग करने वालों के बहकावे में कभी नहीं आएगी। महेंद्र भट्ट ने जनता के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि देवभूमि की समझदार जनता इस बात को बहुत अच्छे से समझ रही है कि बदरीनाथ का यह पूरा प्रकरण कांग्रेस के लिए केवल चुनाव जीतने का एक घटिया राजनीतिक हथकंडा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए यह करोड़ों लोगों की अटूट आस्था और अटूट विश्वास का सर्वोच्च मुद्दा है।

इसी क्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता, पार्टी प्रवक्ता और सम्मानित विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस का पूरा राजनीतिक सफरनामा हमेशा से ही भगवान श्री राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने और भव्य राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने का रहा है। उन्होंने कहा कि जो दल हमेशा सनातन परंपराओं को ठेस पहुंचाता आया है, आज उसका इस बेहद संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर बोलने का कोई भी नैतिक या चारित्रिक आधार नहीं रह गया है और वह पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है। विनोद चमोली ने पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की प्रबुद्ध जनता धामी सरकार द्वारा की गई त्वरित दंडात्मक कार्रवाई और राज्य में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्यों दोनों को अपनी आंखों से साक्षात देख रही है, इसलिए विपक्ष इस पूरी मनगढ़ंत नौटंकी के जरिए कोई भी राजनीतिक लाभ या चुनावी माइलेज हासिल नहीं कर पाएगा।

अब सबसे बड़ा और मुख्य सवाल यह उठता है कि क्या यह प्रचंड विवाद आगामी विधानसभा चुनावों के मतदान के दिन तक इसी तरह जिंदा और प्रभावी रहेगा या वक्त के साथ ठंडा पड़ जाएगा। देश के जाने-माने राजनैतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि आम आर्थिक या बुनियादी मुद्दों की तुलना में धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था से जुड़े विवाद आम जनता के मानस पटल पर बहुत गहरा और लंबे समय तक रहने वाला भावनात्मक असर छोड़ते हैं। चूंकि चुनाव बेहद करीब हैं, इसलिए अयोध्या से लेकर बदरीनाथ धाम तक के चढ़ावे और चंदे से जुड़े ये तमाम तीखे विवाद अब आने वाले समय में हर छोटी-बड़ी चुनावी जनसभा, नुक्कड़ नाटकों और नेताओं के भाषणों में मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे। उत्तराखंड जैसे अत्यंत धार्मिक, शांत और गहरी आस्था वाले राज्य में यह ज्वलंत मुद्दा विशेष रूप से गढ़वाल मंडल और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों की पारंपरिक राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को बहुत गहराई से प्रभावित कर सकता है, जहां लोग अपने आराध्य के प्रति अटूट निष्ठा रखते हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को एक ऐसा मनमाफिक और मजबूत विषय मिल गया है जिसे वह चुनाव संपन्न होने तक किसी भी कीमत पर छोड़ने वाली नहीं है, जबकि दूसरी ओर सत्ताधारी भाजपा के सामने यह अग्निपरीक्षा होगी कि वह अपनी त्वरित जांच, कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही के दम पर जनता के बीच अपने खोए हुए विश्वास को कैसे बरकरार रखती है।

अगर इस पूरे विवाद की जड़ में जाएं, तो इस सनसनीखेज महाघोटाले का भंडाफोड़ सबसे पहले भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने किया था, जिन्होंने पुख्ता सबूतों के साथ बदरीनाथ धाम के भीतर चढ़ावे की भारी चोरी होने के बेहद गंभीर आरोप सार्वजनिक किए थे। इस विस्फोटक मामले के प्रकाश में आते ही और चारों तरफ से घिरने के बाद, बदरीनाथ धाम की संपूर्ण व्यवस्था और देखरेख का जिम्मा संभालने वाली बदरी-केदार मंदिर समिति ने आनन-फानन में आंतरिक स्तर पर एक चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया था। हालांकि, जब बाद में इस मुद्दे ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया और सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया में सरकार की किरकिरी होने लगी, तो सूबे के मुखिया को खुद कमान संभालनी पड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन कर दिया, साथ ही इस मामले में संलिप्त पाए गए बीकेटीसी के मुख्य आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ तत्काल संबंधित थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराते हुए उसे सरकारी सेवा से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!