रामनगर।लखनपुर स्थित राधेश्याम आस्थान मॉल में आगामी दिनों में कला के अनूठे रंगों की एक ऐसी भव्य और आकर्षक महफिल सजने जा रही है, जो पूरे उत्तराखंड के कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। देवभूमि के इस शांत और सुरम्य अंचल में रचनात्मकता का एक नया सैलाब उमड़ने वाला है, क्योंकि हर वर्ष की गरिमामयी परंपरा को जीवंत रखते हुए इस बार भी पुष्कर सोसाइटी द्वारा एक अत्यंत वृहद एवं अद्वितीय चित्रकला प्रतियोगिता का शंखनाद कर दिया गया है। इस भव्य सांस्कृतिक महाकुंभ का पूरा खाका तैयार हो चुका है, जिसे धरातल पर उतारने के लिए सोसाइटी की कर्मठ और ऊर्जावान अध्यक्ष पूनम गुप्ता अपनी पूरी समर्पित टीम के साथ दिन-रात एक कर रही हैं ताकि इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाया जा सके। रामनगर के लखनपुर में स्थित उत्तराखंड कॉर्बेट हाट (Uttrakhand Corbett Hatt) का प्रांगण कलात्मक अभिव्यक्तियों का साक्षी बनेगा, जहाँ न केवल बच्चों बल्कि युवाओं और कला के प्रति अगाध प्रेम रखने वाले प्रतिभावान हुनरों को अपनी अंतरात्मा की आवाज को कागज़ पर उकेरने का एक स्वर्णिम अवसर प्राप्त होने वाला है। इस पूरे आयोजन को लेकर संपूर्ण क्षेत्र के कलात्मक गलियारों में जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है और लोगों में इस ऐतिहासिक दिन का हिस्सा बनने की होड़ मची हुई है।
इस वर्ष आयोजित होने वाली इस विशेष कलात्मक महाप्रतिस्पर्धा का मुख्य केंद्र बिंदु या कहें कि आकर्षण का सबसे बड़ा विषय ‘भगवान श्री जगन्नाथ जी चलचित्र’ निर्धारित किया गया है, जो अपने आप में आध्यात्मिक चेतना और कला के अद्भुत संगम को प्रदर्शित करता है। भगवान जगन्नाथ की महिमा, उनकी रथयात्रा के जीवंत दृश्य, और उनके मनमोहक स्वरूप को अपनी कल्पनाओं के जरिए कैनवास पर उतारने की यह चुनौती किसी भी कलाकार के लिए बेहद रोमांचक और दिल को छू लेने वाली साबित होगी। श्रीमति पूनम गुप्ता एवं उनकी समस्त टीम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनके भीतर छिपी हुई चित्रकारी की विलक्षण प्रतिभा को एक वैश्विक और प्रतिष्ठित मंच प्रदान करना है। इस विषय की घोषणा होते ही रामनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों के कलाकारों ने प्रभु जगन्नाथ के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को रंगों के माध्यम से जीवंत करने के लिए अपनी मानसिक तैयारियां और अभ्यास अभी से पूरी शिद्दत के साथ शुरू कर दिया है। यह प्रतियोगिता केवल एक साधारण मुकाबला मात्र नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, भक्ति, और कला के अद्भुत सामंजस्य का एक ऐसा जीवंत उत्सव होने जा रहा है जो दर्शकों को भी मंत्रमुग्ध कर देगा।
इस महामुकाबले के लिए आगामी 19 जुलाई, 2026, दिन रविवार की पावन तिथि को पूरी तरह से सुनिश्चित किया गया है, जब सुबह की पहली किरण के साथ ही कलाकारों का हुजूम उमड़ पड़ेगा। समय की पाबंदी को लेकर आयोजकों ने अत्यंत कड़े नियम बनाए हैं, जिसके अंतर्गत यह पूरी सृजनात्मक जंग प्रातः 10:00 बजे से प्रारंभ होकर ठीक दोपहर 12:00 बजे तक अनवरत रूप से संचालित की जाएगी। प्रतियोगियों को अपने हुनर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए मात्र 2 घंटे का ही सीमित और बेहद मूल्यवान समय दिया जाएगा, जिसमें उन्हें अपनी पूरी एकाग्रता और गति का परिचय देना होगा। इस निर्धारित समयावधि के भीतर ही प्रत्येक प्रतिभागी को अपनी कल्पना के सागर में गोते लगाकर भगवान जगन्नाथ जी के चलचित्र को एक मुकम्मल और मनमोहक रूप देना होगा जो निर्णायकों को प्रभावित कर सके। रविवार का दिन होने के कारण न केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कला प्रेमी, अभिभावक और दर्शक इस रोमांचक कला संग्राम के गवाह बनने के लिए उत्तराखंड कॉर्बेट हाट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिससे वहाँ का माहौल बेहद ऊर्जावान रहेगा।
आयोजन समिति ने प्रतिभागियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह विशेष घोषणा की है कि चित्रकला के लिए उपयोग में लाया जाने वाला मुख्य ड्राइंग पेपर खुद पुष्कर सोसाइटी द्वारा आयोजन स्थल पर ही पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, कलाकारों को अपनी विशिष्ट शैली और पसंद के अनुसार चित्र को निखारने के लिए अन्य सभी आवश्यक सहायक सामग्रियां जैसे विभिन्न प्रकार के रंग, ब्रश, पेंसिल, इरेज़र, और कलर पैलेट जैसी चीजें खुद अपने साथ लानी होंगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि प्रत्येक कलाकार अपनी सुविधानुसार उन माध्यमों का उपयोग कर सके जिसमें उसकी पकड़ सबसे मजबूत है, चाहे वह वॉटर कलर हो, पोस्टर कलर हो, या फिर ऑयल पेस्टल्स। श्रीमति पूनम गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सोसाइटी केवल आधार प्रदान करेगी, लेकिन उसमें रंग भरने और उसे उत्कृष्ट कृति बनाने की पूरी जिम्मेदारी और रचनात्मक स्वतंत्रता स्वयं कलाकारों की ही होगी। बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराकर सोसाइटी ने कलाकारों के मार्ग को सुगम बना दिया है ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के केवल अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

इस पूरे महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण, संवेदनशील और ध्यान देने योग्य पहलू इसकी पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया है, जिसके लिए समय सीमा को बेहद सीमित और कड़ाई से तय किया गया है। इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीकरण की खिड़की 5 जुलाई से विधिवत रूप से खोली जा चुकी है जो आगामी 15 जुलाई तक ही खुली रहेगी, जिसके बाद किसी भी परिस्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सहभागिता करने के लिए आयोजकों द्वारा बेहद मामूली और सुलभ शुल्क निर्धारित किया गया है, जो कि मात्र 100 रुपए रखा गया है ताकि समाज के हर वर्ग का प्रतिभावान कलाकार इसमें बिना किसी आर्थिक संकोच के भाग ले सके। सीट प्रबंधन को बेहद व्यवस्थित रखने के उद्देश्य से आयोजकों ने कुल सीटों की संख्या केवल 150 (एक सौ पचास) तक ही सीमित रखी है, जिसका सीधा मतलब है कि जो कलाकार पहले आवेदन करेंगे उन्हें ही इस महामुकाबले में अपनी कला का जादू बिखेरने का अवसर प्राप्त हो सकेगा। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की इस नीति के कारण पंजीकरण काउंटरों और ऑनलाइन माध्यमों पर सीट बुक करने के लिए कलाकारों और अभिभावकों के बीच भारी गहमागहमी और कशमकश देखी जा रही है।
डिजिटल युग की आधुनिक सुविधाओं को आत्मसात करते हुए पुष्कर सोसाइटी ने पंजीकरण के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रकार के सरल रास्तों को खुला रखा है ताकि किसी भी कला प्रेमी को परेशानी न हो। जो लोग घर बैठे ही अपनी सीट सुरक्षित करना चाहते हैं, वे तुरंत मोबाइल नंबर 9639583933 पर संपर्क करके ऑनलाइन माध्यम से अपना पंजीकरण शुल्क जमा कर पावती प्राप्त कर सकते हैं। इसके विपरीत, जो लोग व्यक्तिगत रूप से मिलकर या सीधे कार्यालय जाकर अपना आवेदन जमा करना चाहते हैं, उनके लिए ऑफलाइन मोड की व्यवस्था Pushker Society, Classic brakers thenga line (पुष्कर सोसाइटी, क्लासिक ब्रेकर्स ठेंगा लाइन) में की गई है। इन दोनों ही माध्यमों से कलाप्रेमी 15 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले अपनी सीट पक्की कर सकते हैं, क्योंकि इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से बंद और वर्जित कर दिया जाएगा। आयोजकों ने साफ शब्दों में यह चेतावनी भी जारी की है कि प्रतियोगिता वाले दिन यानी 19 जुलाई को कार्यक्रम स्थल पर किसी भी प्रकार का नया पंजीकरण बिल्कुल नहीं किया जाएगा, इसलिए समय रहते कार्रवाई करना ही एकमात्र विकल्प है।
उत्तराखंड के रामनगर में आयोजित होने वाला यह रंगारंग और ऐतिहासिक कला उत्सव न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने का काम करेगा, बल्कि समाज में कला और संस्कृति की गरिमा को भी एक नया आयाम देगा। पुष्कर सोसाइटी की सम्मानित अध्यक्ष पूनम गुप्ता ने समस्त क्षेत्रवासियों, कला प्रेमियों, अभिभावकों और होनहार कलाकारों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वे सभी समय से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर इस गरिमामयी आयोजन की शोभा और भव्यता को बढ़ाएं। इस तरह के आयोजनों से न केवल बच्चों का बौद्धिक और रचनात्मक विकास होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का संचार भी बड़ी तेजी से होता है। सीमित सीटों और कड़े नियमों के बीच होने वाली यह ‘भगवान श्री जगन्नाथ जी चलचित्र’ आधारित प्रतियोगिता निश्चित रूप से नैनीताल जिले के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगी, जिसकी गूंज आने वाले लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी। कला के इस महाकुंभ का हिस्सा बनने के लिए बस अब कुछ ही दिनों का समय शेष है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कौन से वो 150 खुशकिस्मत कलाकार होंगे जो इस ऐतिहासिक कैनवास पर अपनी कला की अमिट छाप छोड़ेंगे।





