काशीपुर। आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों के अमर संदेशवाहक संत कबीर दास जी की जयंती के पावन अवसर पर शहर में आयोजित गोष्ठी, समीक्षा एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर दीपक बाली ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने संत कबीर दास जी के जीवन, उनके विचारों और समाज सुधार में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी वाणी आज भी पूरे समाज का मार्गदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल एक महान संत और कवि ही नहीं थे, बल्कि ऐसे युगदृष्टा समाज सुधारक थे जिन्होंने अपने निर्भीक विचारों और सशक्त संदेशों से समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया।
महापौर दीपक बाली ने कहा कि उनके दोहे और शिक्षाएं सदियों बाद भी लोगों को सत्य, समानता, भाईचारे और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस समाज में संत कबीर जैसे महापुरुष जन्म लेते हैं, वह समाज सदैव जागरूक, संस्कारित और प्रगतिशील बना रहता है। वर्तमान समय में भी यदि उनके विचारों को आत्मसात किया जाए तो सामाजिक विषमताओं, भेदभाव और कटुता जैसी अनेक समस्याओं का समाधान सहज रूप से संभव हो सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से संत कबीर के बताए आदर्शों को केवल पढ़ने तक सीमित न रखकर उन्हें अपने व्यवहार और जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में महापौर दीपक बाली ने कहा कि संत कबीर दास जी ने अपने जीवनकाल में किसी भी प्रकार के सामाजिक भेदभाव, ऊंच-नीच, जात-पात, अंधविश्वास और पाखंड को कभी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने हमेशा मानवता को सर्वाेच्च स्थान देते हुए समाज को प्रेम, सद्भाव और समानता का संदेश दिया। यही कारण है कि आज भी उनके लिखे दोहे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान के साथ पढ़े और समझे जाते हैं। उन्होंने कहा कि संत कबीर का साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला अमूल्य ज्ञान है। उनकी वाणी व्यक्ति को आत्मचिंतन करने, सच्चाई के मार्ग पर चलने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज अनेक प्रकार की सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। यदि नई पीढ़ी उनके विचारों को अपनाएगी तो निश्चित रूप से एक समरस, सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

समारोह के दौरान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर महापौर दीपक बाली के पहुंचने पर आयोजकों ने उनका गर्मजोशी और आत्मीयता के साथ स्वागत किया। इसके पश्चात आयोजित गोष्ठी में संत कबीर दास जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित सम्मानित अतिथियों, समाजसेवियों और प्रबुद्धजनों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संत कबीर का दर्शन समाज को जोड़ने और लोगों के बीच प्रेम तथा सौहार्द स्थापित करने की सबसे बड़ी शक्ति है। क्ताओं ने कहा कि संत कबीर ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मनुष्य की पहचान उसके विचारों, कर्मों और चरित्र से होती है, न कि उसके जन्म या सामाजिक स्थिति से। उन्होंने समाज में बढ़ती वैमनस्यता और विभाजनकारी सोच से ऊपर उठकर कबीर की मानवीय विचारधारा को अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल कानूनों से नहीं बल्कि महान विचारों और संस्कारों से आता है तथा संत कबीर का जीवन इसी सत्य का सबसे बड़ा उदाहरण है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे समारोह को उत्साह और उल्लास से भर दिया। नन्हे-मुन्ने बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का दिल जीत लिया तथा पूरे परिसर में तालियों की गूंज सुनाई देती रही। कार्यक्रम में गोष्ठी, समीक्षा एवं सम्मान समारोह के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों के योगदान की भी सराहना की गई। आयोजन के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों ने डॉ भीम राव अंबेडकर जन्मोत्सव समारोह समिति द्वारा किए गए इस आयोजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ युवाओं और बच्चों को अपने महान संतों एवं महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्रीमती चंद्रप्रभा, कार्यक्रम अध्यक्ष सुकलेश आजाद, जिला समाज कल्याण अधिकारी विश्वनाथ गौतम, कार्यक्रम संचालक जितेंद्र देवान्तक, पूर्व प्रधानाचार्य इंद्र सिंह, धर्मपाल सिंह, शंकर सिंह, महिलाल गौतम सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में प्यारे बच्चे मौजूद रहे। सभी ने संत कबीर दास जी के विचारों को वर्तमान समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया और विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।





