नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के गलियारों में अचानक एक ऐसा भूचाल आ गया है जिसने सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक हर जगह भारी खलबली मचा दी है। देश की सुरक्षा, देशभक्ति और सेना के सर्वाेच्च बलिदान पर केंद्रित यह पूरा विवाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के इर्द-गिर्द सिमट गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस संवेदनशील विषय को सीधे राष्ट्र के आत्मसम्मान से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में वायरल हुए इन गंभीर पोस्ट ने इस बड़े राजनीतिक संग्राम को देश के कोने-कोने तक फैला दिया है। इन तथ्यों के सार्वजनिक होते ही पूरे देश में यह बहस छिड़ गई है कि आखिर इतिहास के पन्नों में दफन इतने बड़े सच को इतने लंबे समय तक क्यों छिपाया गया और अचानक इन वीर जवानों के नाम सामने आने के पीछे की असली कहानी क्या है।
देश की जनता इस समय स्तब्ध है क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत मां की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 6 जांबाज शहीदों के नाम इतिहास में पहली बार पूरी तरह से सार्वजनिक किए गए हैं। इन वीर सपूतों में सेना और वायुसेना के अत्यंत जांबाज सैनिक शामिल हैं जिनके नाम क्रमशः सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफ़लमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मुरड़ मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार बताए जा रहे हैं। इन पराक्रमी नायकों की वीरगाथा और उनके पावन नाम अब तक सरकारी फाइलों में क्यों दबे रहे, इसे लेकर कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन और तीखे सवालों की बौछार कर दी है। मुख्य विपक्षी दल ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे देश के साथ एक बड़ा विश्वासघात और वीर शहीदों के साथ-साथ उनके गौरवान्वित परिवारों का घोर अपमान करार दिया है।
इस बड़े राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देश के लिए वीरगति प्राप्त करने वाले इन 6 जांबाज जवानों के नामों का उजागर होना संपूर्ण भारतवर्ष के लिए अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। पार्टी का कहना है कि वे इन अमर सपूतों की शहादत को कोटि-कोटि नमन करते हैं और इस दुखद तथा गौरवमयी घड़ी में उनके परिवारों के साथ चट्टान की तरह पूरी मजबूती से खड़े हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट लहजे में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह संपूर्ण मामला किसी भी प्रकार की हल्की राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्र की सुरक्षा, अस्मिता और देश की अखंडता से जुड़ा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

विपक्ष ने सरकार के कामकाज और उसकी कथित ‘पारदर्शिता’ की नीति को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा करते हुए कई कड़वे सवाल दागे हैं। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान सरकार हर मंच से पारदर्शिता और ईमानदारी की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन जब बात इन 6 वीर शहीदों के नाम देश को बताने की आई, तो आखिर ऐसी कौन सी बड़ी मजबूरी या रणनीतिक दबाव था जिसके कारण इन्हें इतने सालों तक पूरी दुनिया से छुपा कर रखा गया। कांग्रेस ने इसे सरकार की घोर संवेदनहीनता और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से भागने की प्रवृत्ति बताया है। उनका आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का केवल एक बहाना बना रही है, जबकि हकीकत में वह अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और चुनावी फायदा उठाने के लिए इन वीर शहीदों के बलिदान को पीछे धकेलती आई है।
इस पूरे विवाद में सबसे दर्दनाक पहलू उन पीड़ित परिवारों का है जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को, अपने वीर लाडलों को देश की वेदी पर हमेशा के लिए न्यौषावर कर दिया। कांग्रेस ने इस बात पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है कि जिन परिवारों ने देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ खो दिया, उन्हें भी अपने बच्चों को सार्वजनिक मान्यता और राजकीय सम्मान दिलाने के लिए इतने लंबे समय तक केवल इंतजार और अंतहीन मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। पार्टी ने सवाल उठाया है कि क्या किसी भी लोकतांत्रिक देश में शहीदों के सर्वाेच्च बलिदान का सम्मान करने का यही तरीका होता है। इस गंभीर विसंगति को लेकर अब पूरा देश सरकार से सीधे तौर पर जवाब मांग रहा है कि आखिर इन वीर जवानों के नाम पहले क्यों नहीं बताए गए और क्या सत्ता में बैठे लोग देश के जवानों की शहादत पर भी गंदी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार की कथित विफलताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि यह ऑपरेशन वाकई इतना बड़ा और पूरी तरह सफल था, तो फिर इस दौरान हमारे 26 अनमोल लोगों की जान कैसे चली गई और उन्हें अपनी जान क्यों गंवानी पड़ी। क्या यह सीधे तौर पर हमारी खुफिया एजेंसियों की एक बहुत बड़ी और अक्षम्य विफलता नहीं थी, जिसके कारण देश को इतना भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही कांग्रेस ने पूछा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी च्वज्ञ में छिपे बैठे खूंखार आतंकवादियों के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर सरकार की ठोस और स्पष्ट रणनीति क्या है और अब तक कुल कितने आतंकियों को पकड़ा या मार गिराया गया है, इसका पूरा ब्यौरा देश के सामने तत्काल रखा जाना चाहिए।

शहीदों के प्रति सम्मान और उनकी यादों को संजोने में की गई प्रशासनिक देरी को लेकर भी सरकार को बुरी तरह घेरा जा रहा है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक या श्रोल ऑफ ऑनरश् में इन 6 अमर शहीदों के पावन नामों को शामिल करने में इतनी लंबी और अनुचित देरी क्यों की गई, इस पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर गहरे सवाल उठाए हैं। विपक्षी दल ने मांग की है कि इस पूरे मामले पर सरकार की चुप्पी को तोड़ने के लिए तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए, जहां सभी राजनीतिक दल एक साथ बैठकर सर्वसमावेशी नीति के तहत इन जांबाज शहीदों को अपनी भावभीनी और आधिकारिक श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने मांग की है कि शहीदों के आश्रित परिवारों को बिना किसी देरी के उचित और सम्मानजनक वित्तीय मुआवजा, पक्की सरकारी नौकरी और दीर्घकालिक सामाजिक व आर्थिक सहयोग तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
राष्ट्र की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय से एक श्वेत पत्र यानी ‘White Paper’ जारी करने की मांग कर डाली है। पार्टी का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद मजबूत और दीर्घकालिक सर्वदलीय राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में हमारे जवानों को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े। इसके साथ ही, PoK और भारत की सीमाओं की वर्तमान सुरक्षा स्थिति पर पूरी पारदर्शिता के साथ एक विस्तृत श्वेत पत्र देश की संसद और जनता के सामने रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि देश की सेना और देश के वीर शहीदों के सर्वाेच्च बलिदान पर राजनीति करना पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सच्ची देशभक्ति केवल खोखले भाषणों में नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की पारदर्शिता और पूर्ण जवाबदेही में दिखाई देती है।
भारतीय राजनीति के इस गरमाए माहौल में कांग्रेस ने सीधे तौर पर नारा दिया है कि श्जय जवानश् का केवल नारा लगा देने भर से कोई देशभक्त नहीं हो जाता, बल्कि इस नारे का सम्मान सरकार की असल नीतियों, निर्णयों और क्रियान्वयन में साफ तौर पर दिखना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि देशहित के मुद्दों पर सरकार को हमेशा विपक्ष को साथ लेकर चलना चाहिए, क्योंकि जब बात राष्ट्र की सुरक्षा और स्वाभिमान की आती है, तो विपक्ष हर कदम पर देश और देश की सेना के साथ पूरी मजबूती से खड़ा रहता है। कांग्रेस ने देश की जनता को एक बेहद साफ और कड़ा संदेश भेजा है कि वे न तो इस मुद्दे पर चुप थे और न ही भविष्य में कभी चुप रहेंगे, और राष्ट्र की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का कोई समझौता कभी नहीं किया जाएगा।
इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच कांग्रेस ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि देश की सुरक्षा, भारतीय सेना का अटूट सम्मान और देश के वीर शहीदों का सर्वाेच्च बलिदान उनकी पार्टी के लिए राजनीति के संकीर्ण दायरे से बहुत ऊपर है। पूरे देश के नागरिकों के नाम अपना दृढ़ संकल्प साझा करते हुए विपक्षी दल ने कहा है कि पूरा देश आज इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकजुट है, उनके इरादे बेहद मजबूत हैं और वे हर परिस्थिति में राष्ट्र के साथ खड़े हैं। जय हिंद, जय जवान, जय भारत के गगनभेदी उद्घोष के साथ कांग्रेस ने देश की जनता से यह अंतिम और अटूट वादा किया है कि वे सच्चाई, सम्मान और सुरक्षा के अपने इस राष्ट्रीय वादे से कभी पीछे नहीं हटेंगे और वीर शहीदों के अपमान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





