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अलका पाल का बड़ा हमला पेपर लीक से बर्बाद हो रहा युवाओं का भविष्य

प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा। शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए छात्रों के अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग तेज की।

काशीपुर। देश के भीतर सरकारी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे करोड़ों परिवारों की रातों की नींद हराम हो चुकी है। इसी ज्वलंत मुद्दे पर तीखा प्रहार करते हुए ‘‘एस पी न्यूज’’़ से विशेष बातचीत के दौरान कांग्रेस की महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने केंद्र की वर्तमान सत्तासीन पार्टी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने बातचीत की शुरुआत प्रेस प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए की और कहा कि आज पूरा मुल्क एक ऐसे मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है जहां देश के होनहारों की तकदीर अधर में लटकी हुई दिखाई दे रही है। महानगर अध्यक्ष ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा का उल्लेख करते हुए साफ शब्दों में कहा कि यह सामान्य विषय नहीं है बल्कि यह तो सीधे तौर पर पूरे देश के तकरीबन छब्बीस लाख छात्र-छात्राओं के सुनहरे कल को पूरी तरह बर्बाद करने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने देश की मौजूदा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षाओं की इस बदहाली ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है।

अलका पाल ने कहा कि राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच इस वक्त प्रतियोगी परीक्षाओं की साख को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी माहौल के बीच अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अलका पाल ने आंकड़ों का हवाला देकर सत्ता पक्ष को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि पिछले तकरीबन बारह वर्षों के कालखंड पर अगर नजर डाली जाए तो साफ पता चलता है कि युवाओं की आकांक्षाओं के साथ खिलवाड़ करने का एक निरंतर सिलसिला चल पड़ा है। इस लंबी अवधि के दौरान लगभग अस्सी से भी अधिक बड़ी और महत्वपूर्ण परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने के सनसनीखेज मामले लगातार सामने आए हैं जो इस देश की पूरी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ियों के बावजूद हुक्मरानों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जो कि लोकतंत्र के लिए एक बेहद डरावनी और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बन चुकी है।

सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की कार्यप्रणाली और उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति पर तीखे बाण छोड़ते हुए कांग्रेस नेता ने देश के शिक्षा तंत्र की वर्तमान दुर्दशा का विस्तृत खाका खींचा। अलका पाल का स्पष्ट मानना है कि भाजपा की मौजूदा हुकूमत और देश का समूचा शिक्षा विभाग कहीं न कहीं पूरी तरह से घुटने टेक चुका है क्योंकि इस वक्त देश के भीतर पूरी तरह से शिक्षा माफिया का राज कायम हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठित अपराधियों और माफिया तंत्र के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें कानून का जरा भी डर नहीं रह गया है और वे देश की पूरी व्यवस्था को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं। सबसे अचरज की बात तो यह है कि शासन की तरफ से इन अपराधियों के खिलाफ आज तक कोई भी ऐसी सख्त और नजीर बनने वाली दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई जिससे इनका नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो सके। इस लचर रवैये की वजह से ही साल दर साल इन गिरोहों का मनोबल आसमान छू रहा है और वे बिना किसी खौफ के हर नई परीक्षा को अपना शिकार बना रहे हैं।

हाल ही में पूरे देश में मचे भारी बवाल के मुख्य केंद्र बिंदु यानी मेडिकल प्रवेश परीक्षा का जिक्र आते ही महानगर अध्यक्ष का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मामले की तह तक जाते हुए दावा किया कि नीट की परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पर्चा लीक होने का जो नया वाकया सामने आया है, उसने करोड़ों परिवारों की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। इस परीक्षा के आयोजन और इसके लीक होने के पीछे एक बहुत बड़ा खेल खेला गया है जिसमें भारी मात्रा में पैसों के अवैध लेनदेन की बात भी निकलकर आ रही है। अलका पाल ने इस महाघोटाले के विरोध में अपनी पार्टी की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि इन पीड़ित परीक्षार्थियों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने एक बेहद व्यापक और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। कांग्रेस पार्टी अब छात्रों के स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए ‘छात्रों के नाम’ नामक एक बहुत बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से इस सोए हुए तंत्र को जगाया जाएगा।

इस बड़े अभियान की सफलता और सरकार की मनमानी को जनता के सामने उजागर करने के लिए विपक्षी दल सामूहिक प्रयास पर जोर दे रहा है। कांग्रेस नेता ने एस पी न्यूज़ से मुखातिब होते हुए कहा कि इस लड़ाई में आप मीडिया की सहायता और सहयोग बेहद अनिवार्य है क्योंकि मीडिया ही लोकतंत्र का वह प्रहरी है जो सच को सामने ला सकता है। आज देश का जो शिक्षा विभाग पूरी तरह से पारदर्शिता की कसौटी पर फेल हो चुका है, वह वास्तव में भ्रष्टाचार की गहरी दलदल में पूरी तरह से समा चुका है। ंअलका पाल ने अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह पूरा महकमा शिक्षा देने के बजाय महज एक संगठित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का कुख्यात तंत्र बनकर रह गया है, जहां मेधावी बच्चों की प्रतिभा को दरकिनार कर केवल पैसों के दम पर डिग्रियां और सीटें बेची जा रही हैं। इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ देशव्यापी आवाज बुलंद करने का बीड़ा अब विपक्ष ने पूरी तरह से उठा लिया है।

देश के युवाओं की इस पीड़ा को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस में बदलने का पूरा श्रेय अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को देते हुए ंअलका पाल ने राहुल गांधी के प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे नेता राजस्थान के दौरे पर गए थे जहां उन्होंने इस परीक्षा घोटाले से सीधे तौर पर प्रभावित और मानसिक तनाव से गुजर रहे लगभग तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ आमने-सामने बैठकर बेहद विस्तार से संवाद स्थापित किया। उन्होंने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस पूरे संवाद के दौरान राहुल गांधी जी ने इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर रत्ती भर भी राजनीति का इस्तेमाल नहीं किया, जो कि उनकी उच्च राजनीतिक शुचिता को दर्शाता है। वे वहां किसी वोट बैंक या सियासी फायदे के लिए नहीं गए थे बल्कि एक अभिभावक की तरह उन हताश और परेशान युवाओं की गंभीर अंतरात्मा की आवाज और उनकी बुनियादी समस्याओं को बेहद करीब से समझने का सच्चा प्रयास कर रहे थे।

छात्रों और विपक्ष के बीच हुए इस गहन वैचारिक मंथन से जो कड़वी सच्चाई निकलकर सामने आई है, उसने देश के रोजगार मॉडल की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह से नंगा कर दिया है। महानगर अध्यक्ष ने उस बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि राहुल गांधी जी ने युवाओं के साथ इस ज्वलंत समस्या पर चर्चा करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह आंकड़ा देश के सामने रखा है। उन्होंने बताया कि हमारी मौजूदा शिक्षा प्रणाली इस कदर खोखली और अप्रासंगिक हो चुकी है कि जहां हर साल लाखों की तादाद में नौजवान पूरी लगन के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं, लेकिन चयन की दर इतनी बदतर है कि एक हजार अभ्यर्थियों में से मुश्किल से महज बारह छात्रों को ही अंतिम रूप से सफलता मिल पाती है और उन्हें रोजगार से जुड़ने का वास्तविक अवसर मिल पाता है। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि देश में किस कदर भयंकर मंदी और बेरोजगारी का दौर चल रहा है।

पिछले कुछ सालों के आर्थिक और सामाजिक हालातों का विश्लेषण करते हुए अलका पाल ने देश की युवा पीढ़ी के सामने मौजूद दोहरे संकट का सजीव चित्रण किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समूचा देश इस बात का गवाह है कि पिछले सालों के दौरान बेरोजगारी का ग्राफ अप्रत्याशित रूप से ऊपर की तरफ भागा है, जिसने आजादी के बाद के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आज का युवा एक तरफ आसमान छूती बेतहाशा महंगाई की मार झेल रहा है और दूसरी तरफ उसके पास आजीविका चलाने के लिए नौकरी का कोई साधन मौजूद नहीं है। ऐसी विकट परिस्थितियों में जब लगातार परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आते हैं, तो उन युवाओं को अपना पूरा भविष्य अंधकार में डूबा हुआ नजर आने लगता है। जो छात्र दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं, वे इस प्रशासनिक विफलता के कारण मानसिक अवसाद की तरफ धकेले जा रहे हैं।

व्यवस्था के इस लगातार गिरते स्तर और परीक्षा कराने वाली राष्ट्रीय एजेंसियों की अक्षमता ने देश के भीतर एक बेहद खौफनाक और चिंताजनक माहौल को जन्म दे दिया है। ंअलका पाल ने अत्यंत भावुक और गंभीर होते हुए कहा कि परीक्षा के नाम पर आज देश का जो माहौल बन चुका है, उसकी वजह से देश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसी आत्मघाती घटनाएं करने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। जब भी देश में कोई बड़ी परीक्षा आयोजित होने वाली होती है, तो छात्रों के मन में उत्साह के बजाय एक अजीब सा डर बैठ जाता है। परीक्षा का यह पूरा तामझाम अब ज्ञान के मूल्यांकन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह पूरी प्रक्रिया छात्रों के लिए एक भयानक ‘नेशनल ट्रॉमा सेंटर’ में तब्दील होती जा रही है, जहां युवाओं को केवल मानसिक प्रताड़ना और गहरे तनाव के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है।

परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों के स्तर और उनकी विसंगतियों पर बात करते हुए कांग्रेस नेता अलका पाल ने शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों की राय को भी जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी जैसी संस्थाएं मात्र एक दिखावा बनकर रह गई हैं क्योंकि इस बार का जो परीक्षा पत्र तैयार किया गया था, वह सामान्य मापदंडों से परे जाकर बच्चों के लिए इस कदर कठिन बनाया गया था कि उसे सामान्य तरीके से क्वालिफाई करना बेहद दुष्कर और लगभग असंभव सा प्रतीत हो रहा था। कई बड़े शिक्षा विशेषज्ञों ने भी खुले तौर पर यह स्वीकार किया है कि यह परीक्षा वास्तव में छात्रों की वास्तविक क्षमता को जांचने के लिए नहीं बल्कि उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से एक बेहद जटिल और दुरूह परीक्षा के रूप में आयोजित की गई थी। इस तरह के ऊटपटांग प्रयोगों से साफ जाहिर होता है कि शिक्षा विभाग और वर्तमान सरकार देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य को लेकर जरा भी गंभीर या संवेदनशील नहीं हैं।

देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और परीक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर उठ रहे इन तीखे सवालों के बीच अलका पाल ने सरकार के तानाशाही पूर्ण रवैये पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और एक के बाद एक लगातार सामने आ रहे पर्चा लीक के घिनौने मामलों ने शिक्षा विभाग की साख पर हमेशा-हमेशा के लिए एक बहुत बड़ा काला धब्बा लगा दिया है, वह बेहद निंदनीय है। इस घोर प्रशासनिक नाकामी के बाद राहुल गांधी जी ने पूरे विपक्ष की तरफ से देश की हुकूमत से यह पुरजोर मांग की है कि भविष्य में होने वाली तमाम परीक्षाओं को पूरी तरह से निष्पक्षता, सुचिता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ आयोजित कराया जाए ताकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ कोई अन्याय न हो सके। लेकिन सरकार अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय सच को दबाने के हथकंडे अपना रही है।

सरकार द्वारा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उठाए गए कदमों की कड़ी आलोचना करते हुए महानगर अध्यक्ष ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब इस महाघोटाले की गूंज चारों तरफ सुनाई देने लगी और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा, तो सरकार ने अपनी जिम्मेदारी तय करने या किसी बड़े अधिकारी पर गाज गिराने के बजाय उल्टा टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया संदेश वाहक सेवाओं पर ही प्रतिबंध लगा दिया। ंअलका पाल ने सवाल उठाया कि इस पूरे मामले में आज तक किसी की भी जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई और न ही किसी उच्च पदस्थ अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया। सरकार अपनी कमियों को छुपाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा रही है, जिसका कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी जी पूरी ताकत के साथ पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आप इस देश की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने की क्षमता नहीं रखते और देश के होनहार छात्रों के साथ पूरी ईमानदारी से न्याय नहीं कर सकते, तो आपको सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और आपको तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।

भाषण और अपनी बातचीत के अंतिम चरण में अलका पाल ने देश के तमाम परेशान और आंदोलनरत छात्र-छात्राओं के नाम एक बेहद भावुक और संबल प्रदान करने वाला संदेश भी जारी किया। अलका पाल ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आप सब हमारे देश की असली ताकत और रीढ़ हैं, इसलिए आपको इस भ्रष्ट व्यवस्था के आगे घुटने टेकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। हमारे जनप्रिय नेता राहुल गांधी जी ने भी अपने संवाद में आप सभी को पूरे आत्मविश्वास और निडरता के साथ हर परीक्षा में शामिल होने और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी कठिन परिस्थिति में आपको हताश या निराश होने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि पूरी कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती, चट्टानी एकता और पूरी शिद्दत के साथ इस देश के एक-एक छात्र के पीछे खड़ी हुई है। छात्रों के इन बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए चाहे हमें सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करना पड़े या फिर मीडिया के विभिन्न माध्यमों से आपकी बुलंद आवाज को शासन के बहरे कानों तक पहुंचाना हो, कांग्रेस पार्टी आपकी इस न्यायपूर्ण लड़ाई को इसके अंतिम मुकाम तक पूरी ताकत से लड़ेगी।

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