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भूगोल विषय में जितेन्द्र कुमार को पीएचडी की बड़ी उपाधि मिलते ही महाविद्यालय में जश्न

कुमाऊँ विश्वविद्यालय ने ग्रामीण पर्यटन और सामाजिक आर्थिक रूपांतरण पर किए गए बेहतरीन शोध कार्य को सराहा जिसके बाद देश के बड़े शिक्षाविदों और कॉलेज प्रशासन ने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाई दी।

रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामनगर के परिसर में आज एक अत्यंत गौरवमयी और हर्षोल्लास का क्षण दर्ज किया गया। यहाँ के भूगोल विभाग में लंबे समय से ज्ञान की साधना कर रहे कुशाग्र बुद्धि शोध छात्र जितेन्द्र कुमार को कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल द्वारा आधिकारिक रूप से विद्या वाचस्पति अर्थात पीएचडी (Ph.D.) की प्रतिष्ठित उपाधि से अलंकृत किया गया है। जैसे ही विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस सर्वोच्च डिग्री की संस्तुति संबंधी आधिकारिक घोषणा की गई, वैसे ही संपूर्ण रामनगर महाविद्यालय परिसर और भूगोल विभाग के गलियारों में बधाई देने वालों का ताँता लग गया। इस बड़ी उपलब्धि ने न केवल संबंधित शोधार्थी के परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रामनगर के नाम को एक नया मुकाम और विशिष्ट पहचान दी है। वर्तमान समय में उत्तराखंड के भीतर भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों पर गहन अनुसंधान की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जा रही है, और ऐसे दौर में एक युवा शोधार्थी द्वारा कड़े परिश्रम के बाद इस मुकाम को हासिल करना वास्तव में पूरे जिले के शैक्षणिक जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

सफलता की इस ऊँचाई तक पहुँचने के लिए शोधार्थी जितेन्द्र कुमार ने एक बेहद प्रासंगिक, व्यावहारिक और चुनौतीपूर्ण विषय को अपनी गहन रिसर्च का मुख्य आधार बनाया था। उन्होंने अपना पूरा शोध कार्य “ग्रामीण पर्यटन एवं सामाजिक आर्थिक रूपांतरण : जनपद नैनीताल का भौगोलिक अध्ययन” नामक अत्यंत महत्वपूर्ण और सामयिक शीर्षक के अंतर्गत निष्पादित किया है। अपने इस दीर्घकालिक शोध प्रबंध में उन्होंने नैनीताल जिले के ग्रामीण अंचलों में फल-फूल रहे टूरिज्म के विभिन्न प्रारूपों का बारीकी से वैज्ञानिक विश्लेषण किया और यह तथ्य सामने रखा कि किस प्रकार पर्यटन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों के रहन-सहन, उनकी पारंपरिक आय के स्रोतों तथा सामाजिक-आर्थिक ढांचे में व्यापक बदलाव आ रहे हैं। इस भौगोलिक अध्ययन में पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने और ग्रामीण स्तर पर ही स्वरोजगार के नए द्वार खोलने के व्यावहारिक समाधान भी सुझाए गए हैं। जितेन्द्र कुमार ने इस अत्यंत विस्तृत और गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामनगर के भूगोल विभाग में कार्यरत प्रख्यात शिक्षाविद् एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के अत्यंत कुशल, सघन और तकनीकी मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया है।

इस उच्च स्तरीय अनुसंधान की अंतिम कसौटी मानी जाने वाली मौखिक परीक्षा (वाइवा) कुमाऊँ विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में अत्यंत गरिमामयी माहौल में आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया का संचालन और आयोजन विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की वर्तमान अध्यक्ष तथा संयोजक प्रोफेसर अनीता पांडे की गरिमामयी अध्यक्षता में बेहद निष्पक्ष और अकादमिक मानकों के अनुरूप संपन्न हुआ। इस विशेष मौखिकी परीक्षा के मूल्यांकन हेतु देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के अंतर्गत आने वाले एस. पी. एम. कॉलेज से भूगोल विषय के सुविख्यात और वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर कैलाश नाथ सिंह बाह्य परीक्षक (एक्सटर्नल एग्जामिनर) के रूप में विशेष तौर पर आमंत्रित थे। परीक्षा हॉल के भीतर शोधार्थी ने अपने शोध पत्र के मुख्य बिंदुओं को बेहद तार्किक और सुस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया। युवा शोधार्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए नवीन तथ्यों, सटीक आंकड़ों और सुव्यवस्थित भौगोलिक मानचित्रों को देखकर दोनों वरिष्ठ परीक्षकों ने उनके द्वारा किए गए कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इसे वर्तमान समय का एक अत्यंत उच्च गुणवत्ता युक्त तथा समाजोपयोगी शोध ग्रंथ घोषित किया।

सफलतापूर्वक मौखिक परीक्षा उत्तीर्ण करने और पीएचडी की पात्रता हासिल करने के इस विशेष एवं सुखद अवसर पर उपस्थित सभी प्रबुद्ध विद्वानों ने नव-उपाधि धारक को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। परीक्षा कक्ष और उसके उपरांत आयोजित अनौपचारिक सत्र में बाह्य परीक्षक प्रोफेसर कैलाश नाथ सिंह, भूगोल विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनीता पांडे, तथा मुख्य शोध निर्देशक डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से जितेन्द्र कुमार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि की बधाई दी और उनके उज्ज्वल अकादमिक भविष्य की मंगलकामना की। इनके साथ ही शिक्षा जगत से जुड़े अन्य गणमान्य साथियों जिनमें डॉ. मनीषा त्रिपाठी, डॉ. मोहन लाल, डॉ. प्रकाश चन्याल, डॉ. मासूम रजा, डॉ. विनिता जोशी और डॉ. डी. एस. परिहार जैसे वरिष्ठ प्राध्यापक शामिल थे, उन्होंने भी इस शोध कार्य को क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी वैचारिक पूंजी बताया। इसके अलावा परिसर में मौजूद अन्य वरिष्ठ व कनिष्ठ शोधार्थियों ने भी अपने साथी की इस बड़ी सफलता पर खुशी का इजहार किया और इसे स्वयं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा के रूप में स्वीकार किया।

इस विशेष गौरवमयी उपलब्धि की गूंज जब रामनगर महाविद्यालय के प्रशासनिक भवन तक पहुँची, तो वहाँ भी खुशी की लहर दौड़ गई और संस्थान के प्रशासनिक मुखियाओं ने इसे पूरे कॉलेज के लिए सम्मान की बात कहा। रामनगर महाविद्यालय के वरिष्ठ और कर्मठ प्राचार्य प्रो. एम. सी. पाण्डे ने शोधार्थी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसे शोध कार्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को उजागर करने में मददगार होते हैं। वहीं कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर प्रो. एस. एस. मौर्या ने छात्र के कड़े अनुशासन और लगन की सराहना करते हुए अपनी शुभकामनाएं भेजीं। इसके साथ ही भूगोल विभाग के वर्तमान प्रभारी डॉ. सिराज अहमद, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. डी. एन. जोशी तथा डॉ. पी. सी. पालीवाल ने भी संयुक्त रूप से बधाई संदेश जारी करते हुए कहा कि भूगोल विभाग लगातार शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और यह सफलता उसी कड़ी का एक सुखद हिस्सा है। कॉलेज प्रशासन ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य में भी ऐसे मेधावी छात्रों को हर संभव प्रशासनिक और शैक्षणिक सहयोग मिलता रहेगा।

अपनी इस अभूतपूर्व और जीवन को बदलने वाली सफलता के चरम बिंदु पर पहुँचने के बाद डॉ. जितेन्द्र कुमार (अब पीएचडी उपाधि धारक) ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए इस पूरे सफर का वास्तविक श्रेय अपने पूजनीय गुरुजनों, माता-पिता और शुभचिंतकों को समर्पित किया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि बिना गुरुजनों के निरंतर मार्गदर्शन, माता-पिता के असीम त्याग, परिजनों के संबल और सच्चे मित्रों के नैतिक सहयोग के बिना इस कठिन और लंबी शोध यात्रा को पूरा कर पाना उनके लिए कतई संभव नहीं था। उन्होंने विशेष तौर पर अपने शोध निर्देशक का आभार व्यक्त किया जिन्होंने हर कठिन मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया। यह खबर पूरे क्षेत्र के समाचार पत्रों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर भी खूब सुर्खियां बटोर रही है, क्योंकि ग्रामीण विकास जैसे गंभीर विषय पर किया गया यह भौगोलिक शोध आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में काम आ सकता है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

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