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कांग्रेस ने फूंका चुनावी शंखनाद डॉ गणेश उपाध्याय ने कार्यकर्ताओं को दिया जीत का महामंत्र

इकतालीस हजार वोटरों के कटने से मची खलबली, 15 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशन से पहले घर-घर जाकर फॉर्म 6, 7 और 8 भरवाने के लिए कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत।

काशीपुर। उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में चुनावी तैयारियों की सरगर्मी चरम पर पहुंच चुकी है और आगामी लोकतांत्रिक संग्राम को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में काशीपुर महानगर कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी ‘स्पेशल इन्टेन्सिव रिवीजन’ (एसआईआर) की बारीकियों से कार्यकर्ताओं को लैस करना था। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य वक्ता और मास्टर ट्रेनर के रूप में पधारे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डॉ. गणेश उपाध्याय ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनावी मशीनरी के इस सबसे महत्वपूर्ण चक्रव्यूह को भेदने के गुरुमंत्र दिए। कार्यक्रम में सांगठनिक मजबूती को धार देने के लिए विशेष रूप से मौजूद रहे उधमसिंह नगर के जिला अध्यक्ष हिमांशु गावा ने भी कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका और इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक-एक मतदाता का नाम सही तरीके से दर्ज कराना ही पार्टी की असली जीत की बुनियाद रखता है। इस दौरान समूचे सभागार में चुनावी रणभेरी जैसा माहौल नजर आया, जहां हर एक पदाधिकारी और कार्यकर्ता आगामी महीनों में होने वाले इस महाअभियान में अपनी पूरी ताकत झोंकने के संकल्प के साथ बेहद गंभीर मुद्रा में रणनीतिक दांव-पेंच सीखता हुआ दिखाई दे रहा था।

मुख्य वक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए बेहद आक्रामक और रणनीतिक अंदाज में खुलासा किया कि देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए तीसरे चरण की बेहद खास एसआईआर प्रक्रिया गत पच्चीस मई से पूरे जोर-शोर के साथ शुरू हो चुकी है। इस राष्ट्रव्यापी महाअभियान की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि देश के कुल सोलह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में इस चुनावी महायज्ञ की शुरुआत हो चुकी है, जिसके अंतर्गत देश के लगभग सैंतीस करोड़ मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाने का एक अभूतपूर्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उत्तराखंड राज्य में भी इस विशाल और सघन अभियान की शुरुआत पच्चीस मई से आधिकारिक तौर पर कर दी गई है, जिसके तहत सरकारी तंत्र के सबसे जमीनी सिपाही यानी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अब सीधे जनता के द्वार खटखटाएंगे और घर-घर जाकर मतदाता सूचियों को पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए फार्म संख्या छह, सात और आठ भरवाने का काम युद्धस्तर पर अंजाम देंगे। कांग्रेस पार्टी ने भी इस सरकारी तंत्र की हर एक गतिविधि पर पैनी नजर रखने और अपने पारंपरिक तथा नए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी पूरी सांगठनिक ताकत को जमीन पर उतारने का फैसला किया है ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह सके।

इस कड़े राजनैतिक मुकाबले में पार्टी की अग्रिम पंक्ति को मजबूत करने का फॉर्मूला बताते हुए मास्टर ट्रेनर ने स्पष्ट किया कि इस पूरे अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हमारे बूथ लेवल एजेंट प्रथम (बीएलए-1), ब्लॉक व मंडल अध्यक्षों की जिम्मेदारी संभाल रहे बीएलए-2 और क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आपस में कितना सटीक और जीवंत सामंजस्य स्थापित कर पाते हैं। उन्होंने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि बीएलए-2 के पद पर आसीन पदाधिकारियों के कंधों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र के हर एक परिवार की जमीनी हकीकत, उनके सुख-दुख और उनके सदस्यों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। जब तक बीएलए-2 का आम जनता के साथ सीधा और जीवंत संपर्क नहीं होगा, तब तक वे बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ की कार्यप्रणाली में प्रभावी ढंग से मदद नहीं कर पाएंगे और न ही मतदाता सूची में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को समय रहते पकड़ सकेंगे। कांग्रेस पार्टी इस बार किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है, इसलिए वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच एक ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जो सीधे जनता के बीच जाकर सरकारी फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा और पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करेगा।

काशीपुर विधानसभा क्षेत्र के राजनैतिक समीकरणों और आंकड़ों का एक बेहद चौंकाने वाला और विस्तृत विश्लेषण कार्यकर्ताओं के सामने रखते हुए डॉ. गणेश उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में काशीपुर में कुल एक लाख बहत्तर हजार चार सौ अट्ठावन मतदाता पंजीकृत हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प और ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्री-एसआईआर मैपिंग के दौरान यहां केवल छिहत्तर दशमलव दो छः प्रतिशत कार्य ही संपन्न किया जा सका था, जो कि दो अप्रैल दो हजार छब्बीस तक के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित एक बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इस मैपिंग प्रक्रिया के पूरे होने के बाद जो जमीनी हकीकत सामने आई है उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि प्री-एसआईआर की इस बारीक छंटनी के बाद काशीपुर क्षेत्र से कुल इकतालीस हजार छप्पन मतदाताओं के नाम या तो सूची से पूरी तरह काट दिए गए हैं या फिर उन्हें निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इस भारी फेरबदल के परिणामस्वरूप, अगर हम एक अक्टूबर दो हजार पच्चीस की मूल मतदाता सूची के संदर्भ में देखें, तो वर्तमान में प्रभावी और सक्रिय मतदाताओं की कुल संख्या घटकर अब केवल एक लाख इकतीस हजार नौ सौ दो रह गई है, जो आगामी चुनाव के नतीजों को पूरी तरह से पलटने की क्षमता रखती है।

मतदाता सूची के इस पूरे तकनीकी चक्रव्यूह को कार्यकर्ताओं को बेहद सरल भाषा में समझाते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने विभिन्न सरकारी फॉर्मों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि फार्म संख्या छह का उपयोग पूरी तरह से नए और युवा मतदाताओं का नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। जिन नागरिकों के नाम किन्हीं कारणों से पुरानी सूचियों में दर्ज होने से छूट गए हैं या जो युवा जीवन में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने की पात्रता हासिल कर रहे हैं, उनका नाम इस फॉर्म के जरिए जोड़ा जाएगा जो कि पार्टी के लिए एक नया और मजबूत वोट बैंक साबित हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, फार्म संख्या सात को एक बेहद संवेदनशील हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका उपयोग उन लोगों के नाम हटाने के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या जो इस क्षेत्र को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से चले गए हैं। इसके अतिरिक्त अगर किसी विरोधी दल द्वारा गलत या फर्जी तरीके से किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में चढ़वा दिया गया है, या एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज है, अथवा वह व्यक्ति उस विशेष निर्वाचन क्षेत्र का मूल निवासी ही नहीं है, तो ऐसे तमाम अवैध नामों को मतदाता सूची से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए फार्म संख्या सात का सहारा लिया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने फार्म संख्या आठ की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि मतदाता सूची में पहले से दर्ज किसी भी प्रकार की पुरानी या गलत जानकारियों को पूरी तरह से सुधारने, बदलने या समय के अनुसार अपडेट करने के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य है। चुनाव आयोग के कड़े और स्पष्ट नियमों का हवाला देते हुए कार्यशाला में कार्यकर्ताओं को यह भी घुट्टी पिलाई गई कि किसी भी आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक एकल मतदान केंद्र यानी बूथ के भीतर मतदाताओं की कुल संख्या बारह सौ से अधिक बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। इसी नियम के तहत काशीपुर क्षेत्र के राजनैतिक भूगोल को कुल दो सौ दो बूथों में विभाजित किया गया है, जिसके सापेक्ष कांग्रेस पार्टी ने अपनी सांगठनिक तैयारियों को चाक-चौबंद करते हुए अब तक कुल एक सौ छियानवे बीएलए-2 पदाधिकारियों की नियुक्ति धरातल पर सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। बचे हुए बूथों पर भी जल्द ही नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी ताकि चुनावी मशीनरी का कोई भी हिस्सा बिना पहरेदार के न रहे और पार्टी का हर एक सिपाही अपने निर्धारित मोर्चे पर पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहकर आने वाली हर एक चुनौती का डटकर मुकाबला कर सके।

इस बेहद अहम और समयबद्ध अभियान की समयसीमा का निर्धारण करते हुए मास्टर ट्रेनर डॉ. गणेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का यह अति महत्वपूर्ण कार्य आगामी पंद्रह सितंबर तक निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने आगाह किया कि इस अंतिम तारीख से पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्रों के पुनर्गठन, सूचियों पर आपत्तियां दर्ज कराने और सरकारी अधिकारियों द्वारा उनके त्वरित निस्तारण के कार्यों को बीएलओ के साथ लगातार सामंजस्य बिठाकर हर हाल में पूरा करना होगा। आगामी पंद्रह सितंबर दो हजार छब्बीस को इस महाअभियान के समापन के साथ ही अंतिम मतदाता सूची का अंतिम रूप से भव्य प्रकाशन कर दिया जाएगा, जो आगामी राजनैतिक मुकाबले की दिशा और दशा को पूरी तरह तय करेगी। इसके साथ ही उन्होंने दो दिन पूर्व उत्तराखंड चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए एक बेहद महत्वपूर्ण और नए दिशा-निर्देश का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसके अनुसार इस बार नए मतदाताओं के पंजीकरण और सत्यापन का कार्य पूरी तरह से भिन्न और अनूठे तरीके से संचालित किया जाएगा। इस नए नियम के तहत हमारे सभी बीएलए-2 पदाधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क रहते हुए नए मतदाताओं से फार्म संख्या छह भरवाना होगा और उसे बीएलओ से बकायदा रिसीव करके अपने पास सुरक्षित रिकॉर्ड के तौर पर रखना होगा ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की राजनैतिक या तकनीकी हेराफेरी की गुंजाइश को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

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