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महापौर दीपक बाली ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी के निधन पर जताया गहरा शोक

काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है, जिससे संपूर्ण राष्ट्र सहित सीमांत प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। भारतीय सेना में शौर्य का परचम लहराने वाले पूर्व मेजर जनरल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी के आकस्मिक अवसान पर काशीपुर के प्रथम नागरिक महापौर दीपक बाली ने अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हुए इसे एक युग का अंत बताया है। जन-जन के चहेते और राजनीति के ‘मिस्टर क्लीन’ कहे जाने वाले इस महान राजनेता के देहावसान की खबर मिलते ही हर आंख नम हो गई और काशीपुर नगर निगम के मुखिया ने दिवंगत पुण्यात्मा की आत्मिक शांति के लिए परमपिता परमेश्वर के चरणों में प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने इस बेहद कठिन और वज्रपात जैसी घड़ी में शोकाकुल पारिवारिक सदस्यों को संबल, संताप सहने की असीम शक्ति और धैर्य प्रदान करने की भी ईश्वर से पुरजोर कामना की है।

महापौर दीपक बाली ने दिवंगत राष्ट्रनायक के अविस्मरणीय और गौरवशाली राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि बी.सी. खंडूरी ने दो अलग-अलग कार्यकालों में सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली और विकास को एक नई दिशा दी। वे वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक पहली बार और फिर वर्ष 2011 से 2012 तक दूसरी बार सूबे के मुखिया रहे, जिसके दौरान उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक और कड़े फैसले लिए जिन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का कायाकल्प कर दिया। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी उनका कद बेहद ऊंचा था, जिसका प्रमाण यह है कि उन्होंने केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री जैसी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का न केवल निर्वहन किया बल्कि देश में सड़कों के आधुनिक जाल को बिछाने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। इसके साथ ही वे गढ़वाल लोकसभा सीट से जनता के भारी बहुमत के साथ सांसद चुने गए, जहाँ उन्होंने अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास योजनाओं को पहुँचाने का भगीरथ प्रयास किया।

इस महान सेनानी और राजनेता की बेदाग छवि तथा उनके अनुकरणीय जीवन को याद करते हुए काशीपुर के महापौर बाली ने कहा कि उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली और प्रशासनिक निष्पक्षता आज के दौर के नेताओं के लिए एक महान नजीर है। वे अपनी बेहद साफ-सुथरी छवि, सादगी और अनुशासन के लिए पूरे हिंदुस्तान में एक मिसाल के तौर पर जाने जाते थे, जिनकी ईमानदारी पर विरोधी भी कभी उंगली उठाने का साहस नहीं कर सके। उनके शासनकाल के दौरान राज्य में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए उठाए गए पारदर्शी कदम और ऐतिहासिक लोकायुक्त कानून को धरातल पर उतारने के उनके दृढ़ संकल्प की पूरे देश में जमकर तारीफ हुई थी। उन्हें हमेशा एक ऐसे अद्वितीय और विरले राजनेता के रूप में देखा जाता था, जिसने सार्वजनिक जीवन की चकाचौंध में भी सेना जैसी ईमानदारी, कड़ा अनुशासन और उच्च नैतिक मूल्यों की मिसाल को हमेशा जीवंत और प्रज्वलित रखा।

उत्तराखंड के विकास के पुरोधा और राष्ट्रभक्त के महाप्रयाण पर गहरा दुख जताते हुए महापौर बाली ने भावुक शब्दों में कहा कि उन्होंने भारतीय सेना की वर्दी पहनने से लेकर सार्वजनिक जीवन के गलियारों तक, सिर्फ और सिर्फ राष्ट्र सेवा और लोक कल्याण का एक ऐसा अनुपम उदाहरण पेश किया जो इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगा। उनका समूचा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा पुंज और मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा, जिससे समाज सेवा की सीख मिलती रहेगी। खंडूरी के इस दुनिया से चले जाने के कारण भारतीय राजनीति के फलक पर एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक संभव नहीं है और यह देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। महापौर ने अंत में अत्यंत भावुक मन से ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार को इस असहनीय तथा मर्मभेदी कष्ट को सहन करने का संबल दें।

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