हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनमानस के बीच आज एक बेहद चौंकाने वाली और प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई, जिसने न केवल सरकारी व्यवस्था के ढर्रे को एक नया नजरिया दिया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मिसाल भी कायम कर दी। अमूमन वीआईपी कल्चर, सायरन बजाती चमचमाती सरकारी गाड़ियां और सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रहने वाले बड़े प्रशासनिक अफसर के तौर पर पहचाने जाने वाले मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने आज कुछ ऐसा अनोखा कर दिखाया, जिसकी चर्चा पूरे उत्तराखंड में आग की तरह फैल गई है। आज सुबह जब हर कोई अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त था, ठीक उसी वक्त मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा अपने सरकारी आवास के मुख्य द्वार से बाहर निकले, लेकिन हर रोज की तरह उनकी शानदार लग्जरी सरकारी गाड़ी वहां उनका इंतजार नहीं कर रही थी, बल्कि उनके हाथों में एक साधारण सी साइकिल थी। अपने आवास से पैडल मारते हुए वह जब जिला कार्यालय रोशनाबाद में आयोजित एक विशेष सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सड़कों पर उतरे, तो राहगीर और सुरक्षाकर्मी उन्हें इस सादगी भरे अंदाज में देखकर पूरी तरह दंग रह गए। मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा की इस हैरतअंगेज और बेहद साहसिक पहल ने समूचे प्रशासनिक अमले में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है, क्योंकि उन्होंने इस अनोखे कदम के माध्यम से समाज को ईंधन की भारी बचत करने, अपने गिरते स्वास्थ्य को सुधारने तथा दम घुटते पर्यावरण का मजबूती से संरक्षण करने का एक बेहद सशक्त, जीवंत और कड़ा संदेश सीधे तौर पर दे दिया है।
इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक साइकिल यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर जब मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय के प्रंगढ़ में पहुंचे, तो वहां मौजूद अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका एक नायक की तरह भव्य स्वागत किया। इस बेहद खास मौके पर मीडियाकर्मियों और उपस्थित जनसमूह से रूबरू होते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने इस पूरी मुहिम की इनसाइड स्टोरी साझा की और इसके पीछे की असली वजह से पर्दा उठाया। उन्होंने बेहद गर्व और आदर के साथ कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड के ऊर्जावान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जनपद के कुशल जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा समय-समय पर देश और प्रदेश की भलाई के लिए ईंधन की फिजूलखर्ची को रोकने तथा तेजी से नष्ट हो रहे पर्यावरण को बचाने के संबंध में जो गंभीर आह्वान किए गए हैं, उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने आज इस ऐतिहासिक और व्यक्तिगत पहल की शुरुआत सीधे धरातल पर की है। मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने साफ तौर पर कहा कि बड़े पदों पर बैठे लोगों को केवल कागजों पर योजनाएं बनाने के बजाय खुद जमीन पर उतरकर एक मिसाल पेश करनी होगी, तभी जाकर शीर्ष नेतृत्व का सपना और नीतियां सच मायने में साकार हो सकेंगी।
अपनी बात को और अधिक गहराई से जनता के सामने रखते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का हवाला दिया और बढ़ते हुए खतरनाक वायु प्रदूषण तथा अंधाधुंध तरीके से हो रही बेशकीमती ईंधन की खपत पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे इस दौर में जिस तेजी से हमारी प्रकृति का विनाश हो रहा है, उसे देखते हुए अब यह अत्यंत आवश्यक और अनिवार्य हो गया है कि प्रत्येक जागरूक नागरिक अपने दैनिक जीवन की व्यस्त दिनचर्या में छोटे-छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलावों को पूरी ईमानदारी के साथ अपनाना शुरू कर दे। इसी गंभीर उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जनपद के समस्त जिला स्तरीय शीर्ष अधिकारियों, अधीनस्थ कर्मचारियों और प्रशासनिक अमले से एक बेहद भावुक और कड़क अपील जारी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश और सुझाव देते हुए कहा कि जिन भी अधिकारियों अथवा कर्मचारियों के सरकारी या निजी आवास उनके संबंधित कार्यालयों के बिल्कुल नजदीक स्थित हैं, वे अब से रोजाना अपने आलीशान वाहनों को छोड़कर केवल साइकिल के जरिए या फिर पैदल ही अपने दफ्तर आने का एक कड़ा और दृढ़ प्रयास शुरू करें, क्योंकि ऐसा करने से न केवल सरकारी और व्यक्तिगत स्तर पर ईंधन की एक बहुत बड़ी बचत होगी, बल्कि हमारे आसपास की आबोहवा को शुद्ध रखने और पर्यावरण संरक्षण के महायज्ञ में भी हर एक कर्मचारी का एक अमूल्य और ऐतिहासिक योगदान सीधे तौर पर सुनिश्चित हो सकेगा।

प्रशासनिक मुखिया के तौर पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब सरकारी तंत्र का कोई बड़ा जिम्मेदार अधिकारी किसी नेक काम के लिए खुद आगे बढ़कर अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग करता है, तो समाज के भीतर एक अत्यंत गहरा, दूरगामी और सकारात्मक संदेश जाता है। इस प्रकार की जमीनी और वास्तविक पहलों को देखकर समाज का आम नागरिक, युवा वर्ग और अन्य वर्ग के लोग भी भीतर से गहराई से प्रेरित होते हैं और वे व्यवस्था में बदलाव के इस महाअभियान का हिस्सा बनने के लिए खुद-ब-खुद आगे आने लगते हैं। उन्होंने जिले के सभी विभागों के अधिकारियों से बेहद कड़क लहजे में यह अपेक्षा की कि वे केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों पर पर्यावरण बचाने के उपदेश न दें, बल्कि खुद समाज के सामने एक जीवंत और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर जनमानस को जागरूक करने के इस पुनीत कार्य में प्रशासन का पूरा-पूरा सहयोग करें। अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में इस तरह के क्रांतिकारी बदलाव लाने होंगे ताकि जनता यह देख सके कि उनका नेतृत्व करने वाले अफसर भी पर्यावरण के प्रति उतने ही संवेदनशील हैं जितना कि एक आम इंसान को होना चाहिए।
साइकिल चलाकर रोशनाबाद कार्यालय पहुंचे मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा की इस मुहिम का दायरा केवल सरकारी दफ्तरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इस मंच के माध्यम से पूरे जनपद वासियों और आम नागरिकों के नाम भी एक बेहद मर्मस्पर्शी और क्रांतिकारी अपील जारी की। उन्होंने जनता से पुरजोर शब्दों में यह करबद्ध प्रार्थना की कि वे अपने घरों के आसपास के बेहद छोटे-छोटे रोजमर्रा के कार्यों के लिए, जैसे पास की दुकान से राशन लाना या पड़ोस में किसी से मिलने जाना, इन सब कामों के लिए पेट्रोल और डीजल से चलने वाले अपने भारी वाहनों का न्यूनतम यानी कम से कम उपयोग करने का एक नियम बना लें। उन्होंने कहा कि लोग अपने इन छोटे-छोटे स्थानीय कार्यों को पूरा करने के लिए या तो पैदल चलने की आदत डालें या फिर साइकिल का अधिक से अधिक प्रयोग करना अपनी आदत में शुमार कर लें। मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने इस अनूठी जीवनशैली के अनगिनत फायदे गिनाते हुए स्पष्ट किया कि इस छोटे से सामूहिक प्रयास से जहां एक ओर हमारे वातावरण में फैलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, वहीं दूसरी ओर सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह आदत आम इंसान को गंभीर बीमारियों से बचाकर एक बेहद स्वस्थ, ऊर्जावान और दीर्घायु जीवन शैली को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी मददगार साबित होगी।
मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा की इस ऐतिहासिक साइकिल यात्रा की गूंज अब पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में एक चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है, और रोशनाबाद जिला कार्यालय में मौजूद हर छोटा-बड़ा कर्मचारी अब खुद को इस मुहिम से जोड़ने की कसम खा रहा है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के विजन को धरातल पर उतारने का मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा का यह अनूठा और आकर्षक तरीका आने वाले दिनों में उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। जिस प्रकार उन्होंने भीषण गर्मी और व्यस्ततम प्रोटोकॉल के बीच खुद पैडल मारकर समाज को आईना दिखाया है, उसने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत अपने आप से की जा सकती है। आज की यह खबर अखबारों की सुर्खियों में सबसे ऊपर तैर रही है और जनता अब उम्मीद कर रही है कि जिले के अन्य सभी बड़े अधिकारी भी मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा के इस सादगी और पर्यावरण प्रेम के पदचिह्नों पर चलते हुए जल्द ही अपनी गाड़ियों को गैरेज में खड़ा कर साइकिल थामे नजर आएंगे, जिससे काशीपुर और पूरे उत्तराखंड की धरती को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।





