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उत्तराखण्ड में डिजिटल जनगणना 2027 का भव्य शंखनाद राज्यपाल ने स्व-गणना से रचा नया स्वर्णिम इतिहास

देवभूमि की जनता अब डिजिटल माध्यम से स्वयं दर्ज करेगी अपना विवरण क्योंकि राज्यपाल ने लोक भवन से भारत की पहली कागज रहित जनगणना का ऐतिहासिक आगाह करते हुए प्रदेशवासियों से इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है।

देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड के विकास की नई इबारत लिखने की दिशा में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है, जब देश की पहली डिजिटल जनगणना के महाअभियान का शंखनाद राजधानी देहरादून के लोक भवन से किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने स्वयं अपनी गणना के माध्यम से इस राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया का विधिवत आगाह करते हुए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक प्रेरणा प्रस्तुत की। यह क्षण मात्र प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि उत्तराखण्ड की बदलती तस्वीर और तकनीकी सशक्तिकरण का एक ऐसा जीवंत उदाहरण था, जो आने वाले दशकों के लिए प्रदेश की नीतिगत योजनाओं का आधार स्तंभ बनेगा। 10 अप्रैल 2026 की यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब जनगणना की पुरानी और बोझिल कागजी पद्धतियों को तिलांजलि देकर भारत ने पूर्णतः डिजिटल युग में कदम रख दिया है। राज्यपाल द्वारा स्व-गणना की इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की सांख्यिकी अब केवल सरकारी कर्मचारियों के भरोसे नहीं, बल्कि जनता की सीधी सहभागिता और आधुनिक डिजिटल उपकरणों के समन्वय से तैयार होगी, जिससे त्रुटियों की संभावना नगण्य हो जाएगी।

राजभवन के समीप स्थित लोक भवन के भव्य प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने जिस उत्साह के साथ सेल्फ़ एन्यूमरेशन पोर्टल का उपयोग किया, वह राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास था कि तकनीक अब उनके दरवाजे पर खड़ी है। इस पूरी प्रक्रिया में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है, जिसके लिए एक अत्यंत सुरक्षित वेब-आधारित बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। राज्यपाल महोदय ने इस अवसर पर प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का साधन नहीं है, बल्कि यह वह दर्पण है जिसमें राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक प्रतिबिंब दिखाई देता है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि नागरिकों को स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने की सुविधा मिलना एक क्रांतिकारी कदम है, जो लोकतंत्र को और अधिक पारदर्शी बनाएगा। पोर्टल की सुगमता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसे आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर यूजर फ्रेंडली बनाया गया है, ताकि एक साधारण स्मार्टफोन उपयोगकर्ता भी बिना किसी बाहरी मदद के अपने परिवार का विवरण पूर्ण सटीकता के साथ इसमें भर सके।

प्रदेश के युवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने एक मार्मिक अपील की, जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी को इस डिजिटल यज्ञ का सारथी बनने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा तकनीकी रूप से सक्षम है और उसे अपने आसपास के उन बुजुर्गों या कम पढ़े-लिखे लोगों की सहायता करनी चाहिए जो शायद डिजिटल पोर्टल का उपयोग करने में झिझक महसूस कर रहे हों। सामाजिक संस्थाओं से यह अपेक्षा की गई है कि वे दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाएं और लोगों को समझाएं कि उनके द्वारा दी गई एक-एक सटीक जानकारी भविष्य में स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी। राज्यपाल का मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग इस प्रक्रिया से नहीं जुड़ेगा, तब तक “सबका साथ, सबका विकास” का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनगणना-2027 के इस महापर्व में किसी भी व्यक्ति का विवरण छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि डेटा के अभाव में विकास की योजनाएं अपनी राह भटक सकती हैं, इसलिए जन-जन की सक्रिय भागीदारी ही इसकी सफलता की असली कुंजी है।

सांख्यिकी के इस विशाल ढांचे और आगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने विस्तृत कार्ययोजना साझा की, जिसमें उन्होंने समयसीमा और तकनीकी पहलुओं का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में इस विशाल अभियान का प्रथम चरण विशेष रूप से मकान सूचीकरण और मकानों की गणना पर केंद्रित होगा, जो कि आगामी 25 अप्रैल से शुरू होकर 24 मई, 2026 तक अनवरत रूप से 30 दिनों तक संचालित किया जाएगा। यह चरण इसलिए भी जटिल और महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर घर तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती है, जिसे डिजिटल मैपिंग के माध्यम से आसान बनाया जा रहा है। श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि प्रगणकों के घर पहुँचने से पहले ही लोगों के पास स्व-गणना का एक स्वर्णिम अवसर है, जो 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच उपलब्ध रहेगा। इस 15 दिवसीय विंडो का उपयोग कर नागरिक भीड़भाड़ और लंबी पूछताछ से बच सकते हैं और शांतिपूर्वक अपनी जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं, जिससे सरकारी मशीनरी पर भी दबाव कम होगा और डेटा की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

तकनीकी विशिष्टताओं को समझाते हुए निदेशक महोदय ने पोर्टल की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार se.census.gov.in वेबसाइट के माध्यम से लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को मात्र अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर पोर्टल पर लॉगिन करना होगा, जिसके बाद एक सुरक्षित ओटीपी प्रणाली के माध्यम से वे अपने और अपने परिवार के सदस्यों का विवरण डिजिटल फॉर्म में भर सकेंगे। यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है क्योंकि इसमें कागज का उपयोग शून्य कर दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा विकसित यह पोर्टल अत्यंत सुरक्षित सर्वरों से जुड़ा है, जिससे किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी के लीक होने का कोई खतरा नहीं है। कार्यक्रम के दौरान मौजूद सचिव दीपक कुमार ने भी इस पूरी प्रक्रिया के प्रशासनिक समन्वय पर अपनी बात रखी और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस डिजिटल क्रांति को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं कि वे स्व-गणना की इस अवधि के दौरान ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित करें।

उत्तराखण्ड की जनगणना के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब वास्तविक समय में डेटा संग्रहण के लिए मोबाइल एप्लीकेशन और वेब पोर्टल का एकीकृत रूप से प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जनगणना के परिणामों की घोषणा में होने वाली देरी को समाप्त किया जा सकेगा। 10 अप्रैल से शुरू हुई यह स्व-गणना की प्रक्रिया 24 अप्रैल की मध्यरात्रि तक चालू रहेगी, जिसके बाद 25 अप्रैल से सरकारी प्रगणक टैबलेट और स्मार्टफोन के साथ प्रत्येक घर की दहलीज पर दस्तक देना शुरू करेंगे। यदि कोई व्यक्ति स्व-गणना के दौरान अपना विवरण दर्ज कर देता है, तो उसे प्रगणक को केवल अपना रेफरेंस नंबर दिखाना होगा, जिससे उसका समय बचेगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य जनगणना-2027 को त्रुटिहीन बनाना है ताकि राज्य के संसाधनों का आवंटन और कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पूर्णतः वैज्ञानिक आधार पर किया जा सके। राज्यपाल की इस ऐतिहासिक शुरुआत ने उत्तराखण्ड में एक नई चेतना का संचार किया है, जहाँ तकनीक और नागरिक कर्तव्य का मिलन एक समृद्ध और डिजिटल उत्तराखण्ड की नींव रख रहा है, जो पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल के रूप में उभरकर सामने आएगा।

आज के इस कार्यक्रम ने यह भी प्रमाणित कर दिया कि देहरादून का लोक भवन केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं बल्कि राज्य के प्रगतिशील निर्णयों का केंद्र बन चुका है, जहाँ से राज्यपाल ने प्रदेशवासियों के उज्जवल भविष्य की मंगलकामना की। डिजिटल जनगणना के इस महाकुंभ में सचिव दीपक कुमार की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि शासन इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। इवा आशीष श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़े और तिथियां यह दर्शाती हैं कि आगामी दो महीने उत्तराखण्ड के लिए अत्यंत व्यस्ततापूर्ण और निर्णायक होने वाले हैं। जैसे-जैसे 25 अप्रैल की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रशासन अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है ताकि राज्य के दुर्गम हिमाच्छादित क्षेत्रों से लेकर मैदानी तराई तक, हर घर को इस गणना के दायरे में लाया जा सके। अंततः, यह प्रदेश के निवासियों की जिम्मेदारी है कि वे राज्यपाल की अपील को स्वीकार करते हुए डिजिटल माध्यमों को अपनाएं और जनगणना-2027 के इस राष्ट्रीय यज्ञ में अपनी आहूति देकर एक सशक्त, समृद्ध और पूर्णतः सुव्यवस्थित उत्तराखण्ड के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान सुनिश्चित करें।

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