काशीपुर। आईटीआई थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सैनिक कॉलोनी इन दिनों असामाजिक तत्वों के आतंक और खौफ के साये में जीने को मजबूर है। यहां के साकेत विहार और आसपास की बस्तियों में रहने वाली मासूम बच्चियों का घर से निकलना दुश्वार हो गया है क्योंकि कुछ मनचले और बेखौफ लड़के लगातार छेड़खानी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामले ने तो मानवता को शर्मसार कर दिया है, जहां स्कूल और ट्यूशन जाने वाली 13-14 साल की नाबालिग बच्चियों के साथ अश्लील हरकतें की गईं और जब उनके परिजनों ने इस गुंडागर्दी का विरोध करने की हिम्मत जुटाई, तो उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया। गौरव उर्फ धामपुर, अभिषेक और नन्दू जैसे नामजद आरोपियों ने न केवल छेड़छाड़ की सीमाएं लांघी, बल्कि बीच-बचाव करने आए युवकों को लहूलुहान कर दिया, जिससे पूरी कॉलोनी में दहशत का माहौल व्याप्त है और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, जसपुर खुर्द के पशुपति विहार निवासी कार्तिक शर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में इस पूरे भयावह घटनाक्रम का खुलासा किया है, जिसमें बताया गया है कि सैनिक कॉलोनी के पास एक विशेष गुट सक्रिय है जो बाहर से लड़कों को बुलाकर वहां की बेटियों और महिलाओं पर गंदे कमेंट पास करता है। आर्यन नामक युवक की महज 14 वर्षीय बहन जब ट्यूशन के लिए निकलती थी, तो ये आरोपी उसे रास्ते में रोककर धमकाते थे और अश्लील बातें करते थे, जिसके डर से उस मासूम बच्ची ने कई दिनों तक घर में कुछ नहीं बताया और खुद को कमरे में कैद कर लिया। जब इस बात की भनक उसके भाई आर्यन और दोस्त कार्तिक शर्मा को लगी, तो उन्होंने शांतिपूर्वक तरीके से आरोपियों से बात करने का मन बनाया ताकि मामला सुलझ सके, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आरोपियों के परिवार वाले ही इस साजिश में शामिल हैं और उन्होंने उन्हें बातचीत के बहाने बुलाकर मौत के घाट उतारने की पूरी तैयारी पहले से ही कर रखी थी।
घटना के उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए पीड़ितों ने बताया कि जब वे सैनिक कॉलोनी पहुंचे, तो वहां पहले से ही डंडे, पत्थर, ईंट और लोहे की रॉड से लैस होकर आरोपियों का पूरा कुनबा मौजूद था। जैसे ही कार्तिक और आर्यन ने अपनी बहन के साथ हुई बदसलूकी का मुद्दा उठाया, आरोपियों ने गालियां देनी शुरू कर दीं और देखते ही देखते लात-घूसों की बरसात कर दी। हद तो तब हो गई जब अभिषेक नामक युवक ने कार्तिक के ऊपर अपनी बाइक चढ़ा दी, जिससे उसके कंधे में गंभीर चोट आई, वहीं राज नामक एक अन्य हमलावर ने कार्तिक के सिर पर जोरदार डंडे से वार किया, जिससे उसका सिर फट गया और खून की धारा बह निकली। मौके पर मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने भी पीड़ितों को बचाने के बजाय आरोपियों का साथ दिया और उन निहत्थे लड़कों को तब तक पीटा जब तक वे अधमरे नहीं हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों द्वारा 112 नंबर पर सूचना देने के बाद ही उनकी जान बच सकी।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी इन गुंडों का दुस्साहस कम नहीं हुआ और उन्होंने एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल पहुंचकर भी पीड़ितों को जान से मारने की धमकियां दीं, जिससे वहां मौजूद मरीज और डॉक्टर भी सहम गए। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने रात में आरोपियों को पकड़ा तो था, लेकिन किसी अज्ञात राजनीतिक दबाव या सेटिंग के चलते उन्हें सुबह होते ही छोड़ दिया गया, जिससे आरोपियों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं। थाना परिसर में मौजूद पीड़ित बच्चियों की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका कहना है कि अगर आज उनकी बेटियों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो कल ये अपराधी किसी और की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेंगे। कॉलोनी के वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस गुटबाजी और नशीले पदार्थों के सेवन के बाद होने वाली इन वारदातों पर चिंता जताई है, क्योंकि आरोपी पक्ष के लोग अब थाने के भीतर भी पीड़ितों के साथ बदतमीजी और बहस करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
वर्तमान में स्थिति यह है कि घायल कार्तिक शर्मा के सिर में कई टांके आए हैं और डॉक्टरों ने उसे सिटी स्कैन सहित अन्य गंभीर जांचों के लिए रेफर कर दिया है, क्योंकि उसके शरीर के आंतरिक अंगों में भी गहरी चोटें आई हैं। दूसरी ओर, पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस केवल आश्वासन दे रही है और अभी तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है, जबकि उनके पास आरोपियों द्वारा दी गई धमकियों के वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं। इस पूरे प्रकरण ने काशीपुर की कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है, जहां एक तरफ प्रशासन महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ सरेआम छेड़खानी का विरोध करने वालों को अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। अब देखना यह होगा कि उत्तराखंड पुलिस इन रसूखदार और बेखौफ अपराधियों के खिलाफ क्या कड़ी कार्रवाई करती है या फिर इन मासूम बच्चियों और उनके जख्मी भाइयों को इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।





