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लाल जगवीर सिंह ने राष्ट्रीय पटल पर अभिनय का परचम लहराकर जीता प्रतिष्ठित खिताब

चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल टीवी रियलिटी शो के महामुंभ में काशीपुर के जगवीर सिंह ने अपनी अद्भुत अदाकारी से सबको पछाड़ा और गोल्ड मेडल जीतकर देवभूमि उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय जोड़ा।

काशीपुर। देवभूमि की उर्वरा माटी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प अडिग हो और प्रतिभा में धार हो, तो सफलता के शिखर को छूने से कोई नहीं रोक सकता। उत्तराखंड के प्रवेश द्वार काशीपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले जगवीर सिंह ने अपने अटूट आत्मविश्वास और बेमिसाल अदाकारी के दम पर राष्ट्रीय पटल पर एक ऐसी अमिट इबारत लिख दी है, जिसकी गूँज अब पूरे देश के मनोरंजन जगत में सुनाई दे रही है। हाल ही में चंडीगढ़ की धरती पर आयोजित हुए बहुचर्चित और प्रतिष्ठित नेशनल टीवी रियलिटी शो ‘किसमे कितना है दम’ के ग्रैंड फिनाले में जगवीर सिंह ने अपनी अभिनय कला का ऐसा जादू बिखेरा कि निर्णायकों से लेकर दर्शकों तक, हर कोई दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया। यह केवल एक प्रतियोगिता की जीत नहीं है, बल्कि उन तमाम छोटे शहरों के सपनों की जीत है जो अभावों के बीच भी बड़े मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का माद्दा रखते हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल काशीपुर बल्कि समूचे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है, जिससे प्रदेश के सांस्कृतिक और कलात्मक गौरव को एक नया आयाम मिला है।

प्रतियोगिता का यह महाकुंभ पंजाब के मोहाली में स्थित विख्यात तैयार बाराह यूनिवर्सिटी के भव्य परिसर में आयोजित किया गया था, जहाँ देश के चप्पे-चप्पे से चुनकर आए सैकड़ों हुनरमंद कलाकारों ने अपनी किस्मत आजमाने के लिए शिरकत की थी। इस रियलिटी शो का स्तर इतना ऊँचा था कि यहाँ चयन होना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती मानी जाती है, लेकिन जगवीर सिंह ने शुरुआत से ही अपनी अभिनय क्षमता और प्रभावशाली संवाद अदायगी से सबको प्रभावित करना शुरू कर दिया था। फिनाले की रात रोशनी से सराबोर मंच पर जब जगवीर सिंह ने अपनी अभिनय श्रेणी में प्रदर्शन करना शुरू किया, तो उनकी भाव-भंगिमाओं और चरित्र में डूब जाने की कला ने समां बांध दिया। उन्होंने अपनी श्रेणी के अन्य तमाम धुरंधरों को पीछे छोड़ते हुए निर्णायक मंडल का दिल जीत लिया और अंततः ‘ग्रैंड फिनाले विनर’ के प्रतिष्ठित खिताब पर अपना कब्जा जमा लिया। उनकी इस जीत की घोषणा होते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जो उनकी कड़ी मेहनत और कला के प्रति समर्पण का सीधा प्रमाण था।

समारोह के समापन पर शो के विजनरी डायरेक्टर वरुण बंसल जी ने स्वयं मंच पर आकर जगवीर सिंह की असाधारण प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और उन्हें विजेता की चमकती हुई ट्रॉफी प्रदान की। वरुण बंसल जी ने इस दौरान उल्लेख किया कि जगवीर सिंह के पास न केवल तकनीक है, बल्कि उनके अभिनय में वह गहराई और संवेदनशीलता भी है जो एक सच्चे कलाकार की पहचान होती है। ट्रॉफी के साथ-साथ उन्हें नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र से भी नवाजा गया, जो उनके करियर की दिशा बदलने में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह बात विशेष रूप से गौरवपूर्ण है कि पूरे उधम सिंह नगर जिले से जगवीर सिंह एकमात्र ऐसे प्रतिभागी थे, जिन्होंने न केवल इस राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहुँच बनाई बल्कि शीर्ष पर पहुँचकर जिले का नाम रोशन किया। उनकी इस कामयाबी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और वे अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के कलाकारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

अपनी इस अभूतपूर्व सफलता के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए जगवीर सिंह ने बहुत ही विनम्रता के साथ अपनी जीत का श्रेय अपने संघर्ष और प्रदेश की जनता के असीम प्रेम को दिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह जीत उनकी सालों की तपस्या और एक्टिंग के प्रति उनके जुनून का परिणाम है, लेकिन इसके पीछे उनके परिवार का सहयोग और उत्तराखंड की जनता की दुआएं सबसे बड़ी ताकत रही हैं। जगवीर सिंह के अनुसार, ‘किसमे कितना है दम’ के मंच पर जाना और वहां जीतना उनके लिए एक सपने जैसा था, जिसे उन्होंने अपनी जिद और मेहनत से हकीकत में बदल दिया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए संदेश दिया कि छोटे शहरों से होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपके सपने भी छोटे हों; यदि आपमें कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो दुनिया का हर मंच आपका स्वागत करने के लिए तैयार बैठा है। उनकी बातों में अपनी जड़ों के प्रति जो सम्मान दिखा, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को प्रभावित किया।

जैसे ही जगवीर सिंह की जीत की खबर काशीपुर और उधम सिंह नगर जिले में पहुँची, मानों पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल छा गया और खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचकर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं, क्योंकि उनके बीच का एक लड़का अब राष्ट्रीय स्तर का सितारा बन चुका है। क्षेत्र के तमाम गणमान्य व्यक्तियों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को उत्तराखंड के लिए एक बड़ा गौरव बताया है और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों मंगलकामनाएं प्रेषित की हैं। हर तरफ बस इसी बात की चर्चा है कि जगवीर सिंह ने साबित कर दिया है कि देवभूमि के युवा केवल सेना या खेलों में ही नहीं, बल्कि कला और मनोरंजन के क्षेत्र में भी दुनिया जीत सकते हैं। उनके निवास स्थान पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सफलता के चर्चे लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

भविष्य की योजनाओं पर नजर डालें तो जगवीर सिंह अब अपनी इस सफलता को आधार बनाकर अभिनय की दुनिया में और भी बड़े मुकाम हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। जानकारों का मानना है कि इस जीत के बाद उनके लिए मनोरंजन उद्योग के कई बड़े दरवाजे खुल गए हैं और जल्द ही वे सिल्वर स्क्रीन या बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी नजर आ सकते हैं। ‘किसमे कितना है दम’ जैसे शो का विजेता बनना किसी भी कलाकार के पोर्टफोलियो के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जिससे बड़े प्रोडक्शन हाउस की नजर उन पर पड़ना स्वाभाविक है। जगवीर सिंह की यह यात्रा उन हजारों उभरते हुए कलाकारों के लिए एक प्रेरणास्रोत है जो संसाधनों की कमी के बावजूद कला की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। आज काशीपुर की गलियों से लेकर चंडीगढ़ के बड़े मंच तक जगवीर सिंह के नाम का जो डंका बज रहा है, वह निश्चित रूप से आने वाले समय में उत्तराखंड की प्रतिभा को एक नई पहचान दिलाने का कार्य करेगा।

अंततः, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि जगवीर सिंह ने अपनी अभिनय कला के माध्यम से न केवल स्वयं को स्थापित किया है, बल्कि उन्होंने अपनी मिट्टी का कर्ज भी चुकाया है। उनकी इस गौरवशाली जीत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सफलता किसी भौगोलिक सीमा या बड़े शहर की मोहताज नहीं होती, बल्कि वह केवल कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की दासी होती है। आज जब वे विजेता की ट्रॉफी लेकर अपनी कर्मभूमि काशीपुर लौटेंगे, तो उनका स्वागत एक नायक की तरह होगा, क्योंकि उन्होंने अपनी कला के जरिए देवभूमि की शान में एक और नया सुनहरा पन्ना जोड़ दिया है। हमें गर्व है ऐसे होनहार युवा पर जिसने अपनी कला को ही अपना हथियार बनाया और राष्ट्रीय स्तर पर ‘किसमे कितना है दम’ के खिताब को जीतकर यह दिखा दिया कि वाकई उत्तराखंड के सपूतों में कितना दम है। आने वाले वर्षों में जगवीर सिंह का नाम अभिनय की दुनिया में और भी चमकता रहे, इसी उम्मीद के साथ पूरा प्रदेश उन्हें दिल से सैल्यूट करता है।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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