काशीपुर। पी. एन. जी.राजकीय स्नातकोत्तर में नमामि गंगे इकाई द्वारा आयोजित ‘गंगा स्वच्छता पखवाड़ा’ का भव्य और रंगारंग समापन समारोह आयोजित किया गया। इस विशेष अवसर पर पूरे पखवाड़े की मेहनत और जन-जागरूकता के संदेश को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पिरोया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का औपचारिक और गरिमामय शुभारम्भ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम.सी.पांडे द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्राचार्य ने अपने संबोधन में गंगा की निर्मलता को राष्ट्र की अस्मिता से जोड़ते हुए युवाओं को इस पवित्र अभियान का ध्वजवाहक बनने का आह्वान किया। यह पखवाड़ा केवल एक आयोजन मात्र नहीं था, बल्कि गंगा मैया को प्रदूषण मुक्त करने के संकल्प की एक लंबी श्रृंखला थी, जिसका आज एक सफल और गौरवशाली पड़ाव देखने को मिला। परिसर में गूंजते जयकारे और छात्र-छात्राओं के चेहरे पर दिखी राष्ट्र सेवा की चमक इस बात का प्रमाण थी कि रामनगर का युवा अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस पखवाड़े की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 16 मार्च से शुरू होकर 31 मार्च तक चली इस लंबी मुहिम के दौरान छात्र-छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के लिए निबंध, भाषण, स्लोगन, पोस्टर, मेहंदी और वाद-विवाद जैसी विविध और बौद्धिक प्रतियोगिताओं की एक विशाल श्रृंखला आयोजित की गई थी। इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि निर्णायकों के लिए विजेताओं का चयन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया। भाषण प्रतियोगिता में अपनी वाकपटुता और ओजस्वी विचारों से दीप्ती लोहला (एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर) ने सर्वाेच्च स्थान प्राप्त कर सभी को प्रभावित किया। वहीं, लेखन कला और विचारों की गहराई का परिचय देते हुए निबंध प्रतियोगिता में मोनिका (एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर) ने अपनी लेखनी का लोहा मनवाया।
रचनात्मकता के इस सफर में स्लोगन लेखन के अंतर्गत नेहा रावत (बी.ए. छठे सेमेस्टर) ने प्रथम स्थान हासिल कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। कला के क्षेत्र में अपनी तूलिका से गंगा की व्यथा और स्वच्छता का संदेश उकेरने वाली कोमल (बी.कॉम चतुर्थ सेमेस्टर) पोस्टर मेकिंग में अव्वल रहीं, जबकि मेहंदी प्रतियोगिता में अपनी बारीकी और सुंदर कलाकृति के जरिए दिव्या (बी.ए. द्वितीय सेमेस्टर) ने बाजी मारी। प्रत्येक विजेता की सफलता की कहानी उनके परिश्रम और गंगा के प्रति अगाध प्रेम को बयां कर रही थी, जिसने पूरे महाविद्यालय प्रशासन को गौरवान्वित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मनमोहक छटा और पुरस्कारों की घोषणा के बीच महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एम.सी. पांडे का उद्बोधन समारोह का मुख्य आकर्षण रहा, जिन्होंने अपने शब्दों से छात्र-छात्राओं के भीतर कर्तव्यनिष्ठा की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। उन्होंने अत्यंत भावुक और ओजस्वी लहजे में कहा कि ‘गंगा स्वच्छता की जिम्मेदारी हम सब की है’ और इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम मानने के बजाय हमें अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करना होगा।
प्राचार्य ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि पर्यावरण और हमारे आसपास की स्वच्छता का ख्याल रखना किसी उपकार जैसा नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की रक्षा के लिए अनिवार्य कर्तव्य है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हम आज जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उनके अनुसार, एक स्वच्छ और सुंदर भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब प्रत्येक युवा अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता को एक संस्कार के रूप में अपनाए। प्राचार्य के इस प्रेरक संदेश ने विद्यार्थियों को न केवल गंगा बल्कि अपने संपूर्ण परिवेश को प्लास्टिक मुक्त और हरा-भरा बनाने के लिए एक नई दिशा प्रदान की, जिससे समारोह स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
समारोह का सबसे प्रतीक्षित क्षण वह था जब पूरे सत्र के दौरान नमामि गंगे इकाई द्वारा आयोजित विभिन्न कठिन प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जब मंच पर बुलाकर पुरस्कृत किया गया, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। यह सम्मान उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण के प्रति दिखाए गए समर्पण का पुरस्कार था।

इसी क्रम में, कार्यक्रम के अंतिम चरण में समाज को एक क्रांतिकारी संदेश देने के उद्देश्य से श्प्लास्टिक उन्मूलनश् की मुहिम को बल दिया गया। सभी उपस्थित छात्र-छात्राओं और अतिथियों को जूट बैग वितरित किए गए, जो इस बात का प्रतीक थे कि अब हमें घातक प्लास्टिक को त्यागकर पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाना होगा। जूट बैग वितरण का यह कदम न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि यह भविष्य की उस कार्ययोजना का हिस्सा था जिसके तहत महाविद्यालय परिसर को श्जीरो प्लास्टिक जोनश् बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों ने हाथ में जूट बैग लेकर यह संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं प्लास्टिक का उपयोग बंद करेंगे, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
इस भव्य समापन समारोह की सफलता के पीछे महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों और प्रशासनिक अधिकारियों का अथक परिश्रम और मार्गदर्शन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए चीफ प्रॉक्टर एस.एस. मौर्य, प्रो. पुनीता कुशवाहा, डॉ. लोतिका, अमित, डॉ. ऋतु, डॉ. रीमा प्रियदर्शी, डॉ. इंदु, डॉ. सुरेश चंद्रा, डॉ. मुरली धर कापड़ी जैसे प्रबुद्ध शिक्षाविदों की उपस्थिति ने छात्रों का मनोबल बढ़ाया। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी श्री गोविन्द सिंह जंगपागी की सक्रियता ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखा।
छात्र शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए छात्र संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार, उपाध्यक्ष मनोज पांडे, सचिव मनीष जोशी, संक्रांत बिष्ट, और कृतिका मंडोला सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया। समापन की घोषणा के समय हर आंख में गंगा को निर्मल देखने का सपना और हर हाथ में प्लास्टिक के खिलाफ जूट बैग का हथियार था। स्वच्छता पखवाड़ा का यह समापन दरअसल एक नए अध्याय की शुरुआत थी, जहाँ रामनगर का यह महाविद्यालय अब गंगा की अविरलता और पर्यावरण की शुद्धता के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ा है।
महाविद्यालय के नमामि गंगे इकाई की समन्वयक और उनकी टीम ने जिस सूक्ष्मता से इस 15 दिवसीय पखवाड़े का खाका तैयार किया था, उसका परिणाम आज धरातल पर एक ठोस परिवर्तन के रूप में नजर आ रहा है। भाषण से लेकर मेहंदी तक, हर विधा के माध्यम से केवल एक ही संदेश प्रसारित किया गया कि प्रकृति ही जीवन का आधार है। समापन समारोह में वितरित किए गए जूट बैगों ने यह स्पष्ट कर दिया कि विकास की दौड़ में हम अपनी मिट्टी और पानी को प्रदूषित नहीं होने दे सकते।
छात्र संघ के पदाधिकारियों ने भी एक सुर में प्रशासन को यह आश्वासन दिया कि वे इस मुहिम को महाविद्यालय की दीवारों से बाहर निकालकर रामनगर के हर घर और हर घाट तक पहुंचाएंगे। गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के समापन पर हुई इस पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक संध्या ने न केवल मेधावियों को पहचान दी, बल्कि संपूर्ण समाज को यह चेतावनी भी दी कि यदि आज हम स्वच्छता के प्रति सचेत नहीं हुए, तो कल बहुत देर हो जाएगी। अंततः, राष्ट्रगान के साथ इस ऐतिहासिक समारोह का समापन हुआ, लेकिन स्वच्छता की जो लौ विद्यार्थियों के मन में जली है, वह निश्चित रूप से गंगा की लहरों की तरह अनंत काल तक प्रकाशमान रहेगी।
समारोह के अंतिम पड़ाव पर जब उत्साह अपने चरम पर था, तब कार्यक्रम की रीढ़ और नमामि गंगे इकाई की कुशल नोडल अधिकारी डॉ. नीमा राणा ने मंच संभालकर अपनी ओजस्वी वाणी से संपूर्ण वातावरण को कृतज्ञता के भाव से भर दिया। उन्होंने बेहद आत्मीय और प्रभावशाली ढंग से मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो. एम.सी.पांडे सहित पधारे सभी विशिष्ट शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और ऊर्जावान छात्र शक्ति का ह्रदय की गहराइयों से धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ. नीमा राणा ने इस सफल आयोजन का श्रेय पूरी टीम के सामूहिक परिश्रम और विद्यार्थियों के अटूट जज्बे को देते हुए कहा कि “गंगा की निर्मलता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की पुकार है।” उनके इस भावपूर्ण समापन वक्तव्य ने न केवल अतिथियों को सम्मानित महसूस कराया, बल्कि वहां मौजूद हर युवा के भीतर स्वच्छता की मशाल को और अधिक प्रज्वलित कर दिया। उनके धन्यवाद प्रस्ताव के साथ ही 15 दिनों के इस तपस्वी पखवाड़े का समापन एक नई संकल्प शक्ति के साथ हुआ।





