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मतगणना के रोमांचक सफर में दिग्गजों की साख दांव पर, तीसरे राउंड के बाद अमित और कुलभूषण की जोरदार बढ़त

मतपेटियों से निकलता जीत का सैलाब: दिग्गज पत्रकारों की साख पर भारी पड़ी एक-एक वोट की जंग, अमित और कुलभूषण की बादशाहत के बीच हार-जीत के फासले ने बढ़ाई धड़कनें, अब चौथे राउंड पर टिकीं सबकी निगाहें!

हरिद्वार। धर्मनगरी कि पत्रकारिता जगत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान ‘प्रेस क्लब (रजि.) हरिद्वार’ के वार्षिक महाकुंभ का वह क्षण अब अपने चरम पर पहुँच चुका है, जिसका इंतजार पिछले कई महीनों से न केवल शहर के पत्रकार, बल्कि शासन-प्रशासन और आम जनमानस भी बड़ी बेसब्री से कर रहा था। मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही मतगणना का आगाज हुआ, पूरे परिसर का तापमान अचानक बढ़ गया। यह चुनाव महज एक पद का चयन नहीं है, बल्कि यह हरिद्वार की कलम के सिपाहियों की एकजुटता और उनके भविष्य की दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक जनादेश साबित होने वाला है। सुबह की पहली किरण के साथ ही प्रेस क्लब परिसर में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था, जहाँ हर चेहरे पर उम्मीद और घबराहट का मिला-जुला भाव साफ देखा जा सकता था। जैसे-जैसे मतपेटियां खुलीं और वोटों की गिनती शुरू हुई, वैसे-वैसे वहां का माहौल किसी हाई-वोल्टेज चुनावी ड्रामे में तब्दील हो गया, जहाँ हर एक वोट के साथ समीकरण बदल रहे हैं।

मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग की कड़ी निगरानी में शुरू हुई इस पारदर्शी मतगणना प्रक्रिया ने लोकतंत्र की उस खूबसूरती को जीवंत कर दिया है, जिसमें एक-एक मत की कीमत सर्वोपरि होती है। सुरक्षा के इतने कड़े इंतजाम किए गए हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता, और पारदर्शिता ऐसी कि उम्मीदवारों के प्रतिनिधि खुद हर वोट की बारीकी से जांच कर रहे हैं। प्रथम चरण से लेकर तीसरे चरण की समाप्ति तक, जिस तरह से उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, उसने इस चुनावी मुकाबले को साल का सबसे ‘हॉट’ टॉपिक बना दिया है। प्रेस क्लब के गलियारों में सट्टेबाजी तो नहीं, लेकिन दावों और प्रति-दावों का दौर इतना तेज है कि हर कोई बस यह जानना चाहता है कि कार्यकारिणी के 20 पदों पर कौन बाजी मारेगा। चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए यह सुनिश्चित किया है कि बिना किसी मानवीय त्रुटि के परिणाम घोषित किए जाएं, ताकि किसी भी प्रत्याशी को संदेह की गुंजाइश न रहे।

आंकड़ों की बात करें तो अब तक के रुझानों में अमित कुमार शर्मा ने एक तरफा बढ़त बनाते हुए विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। पहले राउंड में 21, दूसरे में 38 और तीसरे राउंड की समाप्ति तक उन्होंने कुल 55 मत हासिल कर अपनी स्थिति को फौलादी मजबूती प्रदान की है। उनके साथ ही कुलभूषण शर्मा ने भी अपने अनुभव और लोकप्रियता का लोहा मनवाते हुए 57 मतों के साथ तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमा रखा है। इन दोनों दिग्गजों के बीच चल रही यह ‘नेक-टू-नेक’ फाइट वहां मौजूद पत्रकारों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। तनवीर अली भी किसी से कम नहीं हैं और 54 मतों के साथ वे भी जीत के बेहद करीब खड़े नजर आ रहे हैं। इन तीनों की जोड़ी ने जिस तरह से अपनी बढ़त को बरकरार रखा है, उससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि मतदाताओं ने इनके पिछले कार्यों या इनकी भविष्य की योजनाओं पर गहरी आस्था प्रकट की है।

वहीं दूसरी ओर, मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना रहे हैं बालकृष्ण, केके पालीवाल और ललितनाथ, जो 53-53 मतों के साथ एक ही कतार में खड़े होकर एक-दूसरे को कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इन तीन उम्मीदवारों के बीच का मुकाबला इतना कड़ा है कि चौथे राउंड की एक-एक पर्ची इनके भाग्य का फैसला बदल सकती है। इनके ठीक पीछे संजीव शर्मा और रोहित सिखोला 50 मतों के साथ अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा रहे हैं। इन प्रत्याशियों के समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा है, जो हर राउंड के बाद बाहर निकलकर जीत के विक्ट्री साइन दिखा रहे हैं। जोगेंद्र सिंह, देवेंद्र शर्मा और मेहताब आलम भी 49-49 मतों के साथ इस चुनावी रेस में पूरी ताकत से बने हुए हैं। इन आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि प्रेस क्लब का मतदाता इस बार बहुत ही सोच-समझकर और संतुलन बनाकर अपना मत दे रहा है, जिससे परिणाम काफी हद तक चौंकाने वाले हो सकते हैं।

इस चुनावी रण में कुमार दुष्यत, सुदेश आर्य, विकास चौहान और नरेश दिवान शैली भी 48-48 मतों के साथ बराबरी के पायदान पर संघर्ष कर रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि कार्यकारिणी के निचले पायदान के पदों के लिए कितनी भीषण खींचतान चल रही है। कुमकुम शर्मा ने 46 मतों के साथ अपनी पकड़ बनाई हुई है, जबकि डॉ.शिवा अग्रवाल, आफताब खान और शिवप्रकाश शिव 45-45 मतों पर सिमटे हुए हैं, जिन्हें अब चमत्कारिक बढ़त की दरकार है। शैलेन्द्र सिंह 43 मतों के साथ पीछे चल रहे हैं, लेकिन अभी चौथे राउंड की गिनती शेष होने के कारण उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इन परिणामों के बीच कुछ ऐसे भी नाम हैं जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए, जिनमें रूपेश वालिया को केवल 30 मत, गोपाल कृष्ण को 31 मत और संजय चौहान को 36 मत मिले हैं। सबसे आश्चर्यजनक रूप से बृजपाल सिंह मात्र 20 मतों के साथ रेस में काफी पीछे छूट गए हैं।

मतगणना स्थल के बाहर का दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं है, जहाँ वरिष्ठ पत्रकार और युवा रिपोर्टर कंधे से कंधा मिलाकर परिणाम आने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही किसी राउंड की घोषणा होती है, पूरा क्षेत्र तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से गूंज उठता है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग ने बताया कि मतदान का प्रतिशत इस बार असाधारण रहा है, जो यह प्रमाणित करता है कि हरिद्वार के पत्रकार अपने संगठन के प्रति कितने जागरूक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चौथे राउंड की गिनती अब अंतिम चरण में है और बहुत जल्द आधिकारिक रूप से नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी। यह चुनाव केवल जीत-हार का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह आने वाले समय में हरिद्वार की पत्रकारिता के गिरते स्तर को बचाने और पत्रकारों की सुरक्षा व उनके हितों के लिए लड़ने वाली एक नई टीम का निर्माण करेगा।

परिणामों की घोषणा के बाद जो नई कार्यकारिणी अस्तित्व में आएगी, उसके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। पत्रकारों के आवास, उनकी सुरक्षा और प्रेस क्लब के नवीनीकरण जैसे कई लंबित मुद्दे हैं, जिन पर निर्वाचित सदस्यों को तुरंत काम शुरू करना होगा। हरिद्वार के इस चुनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहाँ एक-एक मत की गिनती के लिए घंटों इंतजार किया जाता है और अंत में जो जीतता है, वह पूरे पत्रकार समाज का प्रतिनिधित्व करता है। अब सभी की निगाहें उस अंतिम सूची पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि प्रेस क्लब की सुनहरी चाबी अगले कार्यकाल के लिए किसके पास रहेगी। तनावपूर्ण लेकिन उत्साहजनक इस माहौल में, हर कोई अब बस अंतिम राउंड के पूर्ण होने और आधिकारिक विजय घोषणा का साक्षी बनने के लिए बेताब है।

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