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एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का भव्य आगाज युवा शक्ति ने लिया समाज सेवा का संकल्प

पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जोश से भरे स्वयंसेवियों ने सात दिवसीय विशेष शिविर के दौरान छोई की धरती पर सेवा और समर्पण की नई इबारत लिखने के साथ राष्ट्र निर्माण का बुलंद शंखनाद कर दिया।

रामनगर। युवा शक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की अलख जगाने के उद्देश्य से रामनगर के पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना का सात दिवसीय विशेष शिविर रविवार को छोई स्थित पंडित गोरी दत्त दानी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में प्रारंभ हुआ। शिविर के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य केदार दत्त जोशी तथा विशिष्ट अतिथि ग्राम प्रधान सुनील सिंह बिष्ट द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिससे समूचा परिसर वैदिक ऋचाओं और भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर स्वयंसेवियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीतों के माध्यम से अतिथियों का भावभीना अभिनंदन किया, जिसके पश्चात राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य गीत श्उठें समाज के लिए उठेंश् की गूँज ने छात्रों के भीतर सामाजिक दायित्वों के प्रति एक नई चेतना का संचार किया। यह सात दिवसीय प्रवास केवल एक शिविर नहीं बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व को तराशने की एक ऐसी कार्यशाला है, जहाँ वे किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर समाज की वास्तविक चुनौतियों और सेवा के महत्व को आत्मसात करेंगे।

राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ममता भदोला ने राष्ट्रीय सेवा योजना के ऐतिहासिक लक्ष्यों और छात्र जीवन में इसके अपरिहार्य महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अत्यंत ओजस्वी शब्दों में कहा कि एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है जो युवाओं के भीतर अनुशासन, निस्वार्थ सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की गहरी भावना को विकसित करने का कार्य करती है। डॉ. ममता भदोला ने जोर देकर कहा कि आज के इस तकनीक प्रधान युग में जब युवा एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं, ऐसे शिविर उन्हें सामुदायिकता का पाठ पढ़ाते हैं और उन्हें एक संवेदनशील नागरिक के रूप में समाज के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने स्वयंसेवियों से आह्वान किया कि वे इस सात दिवसीय प्रशिक्षण को केवल एक औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे स्वयं को समाज के लिए समर्पित करने की एक स्वर्णिम शुरुआत के रूप में स्वीकार करें, ताकि वे आने वाले समय में देश के जिम्मेदार स्तंभ बन सकें।

छात्रों के मानसिक और आध्यात्मिक संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुमन कुमार ने बौद्धिक सत्र के दौरान स्वयंसेवियों को संबोधित करते हुए उन्हें महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों और स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी विचारों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का सेवा भाव और विवेकानंद का आत्मविश्वास ही वह शक्ति है जो एक छात्र को साधारण से असाधारण बना सकती है। डॉ. सुमन कुमार ने स्वयंसेवियों को समझाया कि श्स्वयं से पहले सेवाश् का मंत्र ही राष्ट्रीय सेवा योजना की आत्मा है और इसी मंत्र को अपनाकर वे अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने छात्रों को चुनौतियों से न घबराने और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की सीख दी, ताकि वे समाज के वंचित वर्गों की सेवा हेतु सदैव तत्पर रहें। उनका संबोधन छात्रों के लिए एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में सिद्ध हुआ जिसने उनके भीतर सोई हुई नेतृत्व क्षमता को जगाने का कार्य किया।

शिक्षा और चरित्र निर्माण के अंतर्संबंधों पर चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि एवं प्रधानाचार्य केदार दत्त जोशी ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से कहा कि मानव जीवन की पूर्णता के लिए शारीरिक शिक्षा के साथ-साथ बौद्धिक शिक्षा का समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने उपस्थित युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया कि छात्र जीवन में सफलता प्राप्त करने का एकमात्र और सबसे छोटा मार्ग श्अनुशासनश् है, जिसके बिना किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है। केदार दत्त जोशी ने बौद्धिक सत्र में स्वयंसेवकों को सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी और बताया कि कैसे छोटी-छोटी आदतों में सुधार लाकर एक विशाल व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सकता है। उनके अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक ऐसा चरित्र विकसित करना है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहकर समाज का मार्गदर्शन कर सके और राष्ट्र की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान दे सके।

सामाजिक समरसता और ग्राम विकास पर बल देते हुए विशिष्ट अतिथि एवं गजपुर गड़वा छोई के ग्राम प्रधान सुनील सिंह बिष्ट ने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि समाज के हित में ही व्यक्ति का वास्तविक हित निहित है और जब तक हम अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर समुदाय के बारे में नहीं सोचेंगे, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। सुनील सिंह बिष्ट ने शिविर की उपयोगिता बताते हुए कहा कि ऐसे सामूहिक आयोजनों और कठिन परिवेश में रहने से युवाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता एवं त्वरित निर्णय लेने की शक्ति का विकास होता है, जो भविष्य के संघर्षों में उनके काम आती है। उन्होंने स्वयंसेवियों को ग्रामीण परिवेश की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया, ताकि वे समझ सकें कि असली भारत आज भी गांवों में बसता है और उसकी सेवा ही सच्ची राष्ट्र सेवा है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन की गरिमा और महत्व को देखते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम.सी. पाण्डे ने दूरभाष और संदेश के माध्यम से शिविर के सफल संचालन हेतु अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने विश्वास जताया कि पंडित गोरी दत्त दानी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज छोई की पावन धरती पर आयोजित यह शिविर स्वयंसेवियों के जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा। प्रो. एम.सी. पाण्डे ने आयोजन मंडल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विशेष शिविरों के माध्यम से ही कॉलेज की चारदीवारी से बाहर निकलकर छात्र सामाजिक यथार्थ से रू-ब-रू होते हैं, जिससे उनमें परोपकार और सहानुभूति जैसे गुणों का संचार होता है। प्राचार्य के संदेश ने शिविर के पहले ही दिन स्वयंसेवियों और कार्यक्रम अधिकारियों के उत्साह को दोगुना कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले सात दिन श्रमदान, बौद्धिक विमर्श और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा का एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

शिविर के उद्घाटन दिवस पर समूचा छोई क्षेत्र युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति के नारों से गुंजायमान रहा, जहाँ ग्रामीणों ने भी छात्रों के इस सेवा संकल्प की भूरि-भूरि प्रशंसा की। शिविर के दौरान होने वाले बौद्धिक सत्रों में केदार दत्त जोशी द्वारा दिए गए व्यक्तित्व विकास के सूत्रों ने छात्रों को जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित किया। यह सात दिवसीय विशेष शिविर न केवल स्थानीय समस्याओं जैसे स्वच्छता, साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित रहेगा, बल्कि यह स्वयंसेवियों को आत्मनिर्भरता और टीम वर्क का व्यावहारिक पाठ भी सिखाएगा। जैसे-जैसे शिविर आगे बढ़ेगा, स्वयंसेवियों द्वारा किए जाने वाले श्रमदान और जन-जागरूकता अभियानों से समाज सेवा की यह ज्योत और अधिक प्रज्वलित होगी। कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्थाएं इतनी सुव्यवस्थित थीं कि इसने अन्य संस्थानों के लिए भी एक आदर्श प्रस्तुत किया, जिससे सिद्ध होता है कि यदि युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो वे राष्ट्र की तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखते हैं।

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