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गैस एजेंसियों की मनमानी और होम डिलीवरी ठप होने पर संयुक्त संघर्ष समिति का हल्ला बोल

गैस वितरण में होम डिलीवरी ठप होने और डीएसी नंबर के बावजूद हफ्तों इंतजार से जनता का धैर्य जवाब दे गया, जिसके बाद आक्रोशित संगठनों ने एसडीएम आवास पर दस्तक देकर सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी।

रामनगर। शहर में घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर लगातार बढ़ती अव्यवस्थाओं ने अब आम लोगों के धैर्य की परीक्षा लेना शुरू कर दिया है। इसी के चलते संयुक्त संघर्ष समिति रामनगर से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान से उनके आवास पर मिला और उन्हें जमीनी हकीकत से रूबरू कराया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को बताया कि कागजों में व्यवस्था चाहे कितनी भी बेहतर दिखाई जा रही हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। लोगों को गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे घरों की रसोई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई परिवारों में खाना बनाने तक की समस्या खड़ी हो गई है और लोग वैकल्पिक साधनों की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह अब एक गंभीर जनसमस्या बन चुकी है, जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी को बताया कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करने और डीएसी नंबर प्राप्त होने के बाद भी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्हें डीएसी नंबर मिलने के बावजूद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एजेंसियों द्वारा जिन क्षेत्रों में सिलेंडर वितरण के लिए वाहन भेजे जा रहे हैं, वहां “पहले आओ, पहले पाओ” की व्यवस्था लागू की जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। इस कारण पहले से पंजीकृत और लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे उपभोक्ताओं को भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था को उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता खत्म हो रही है और अव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि डीएसी नंबर के आधार पर ही सिलेंडर वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि हर उपभोक्ता को उसका अधिकार मिल सके।

इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने दूसरी बुकिंग में हो रही देरी को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को अगले सिलेंडर की बुकिंग तभी करने की अनुमति मिलती है, जब पहले सिलेंडर की डिलीवरी निर्धारित समय के बाद पूरी हो जाती है। इसके कारण बुकिंग की प्रक्रिया पांच से दस दिन तक आगे खिसक रही है, जिससे उपभोक्ताओं के सामने भविष्य में और अधिक संकट खड़ा होने की आशंका है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में गैस संकट और भी गहरा सकता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और उपभोक्ताओं को समय पर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक इंतजार से राहत मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने एजेंसियों के बढ़ते बैकलॉग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। एजेंसियों में लंबित बुकिंग की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है, जब सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब आपूर्ति में कोई कमी नहीं है, तो फिर वितरण में इतनी अव्यवस्था क्यों देखने को मिल रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और दोषी एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।

सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू के रूप में प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा उठाया कि जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद भी गैस एजेंसियां होम डिलीवरी व्यवस्था का पालन नहीं कर रही हैं। होम डिलीवरी सिलेंडर घर तक पहुंचाने के आदेश होने के बाद भी उपभोक्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार लोगों को सुबह से लेकर देर शाम तक सिलेंडर वाहन का इंतजार करना पड़ता है, और जब तक उनकी बारी आती है, तब तक सिलेंडर खत्म हो जाते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के लिए बेहद कष्टदायक बन चुकी है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि होम डिलीवरी प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाए और इसकी निगरानी के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और उन्हें इस तरह की परेशानियों से मुक्ति मिल सके।

इस पूरे घटनाक्रम पर उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने गंभीरता दिखाते हुए तुरंत संबंधित गैस एजेंसियों के अधिकारियों से फोन पर बातचीत की और उन्हें सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिलेंडर वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी उपभोक्ताओं को नियमानुसार गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उप जिलाधिकारी ने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन इस मामले की लगातार निगरानी करेगा और लोगों को जल्द से जल्द राहत दिलाने का प्रयास करेगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त संघर्ष समिति रामनगर के संयोजक ललित उप्रेती, प्रभात ध्यानी, रोहित रूहेला, मनमोहन अग्रवाल, गिरीश आर्य, गीता देवी, कौशल्या, लालमणि और भुवन सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में जनता की समस्याओं को उठाया और प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल गैस सिलेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अंत में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को यह संदेश दिया कि जनता अब और अधिक इंतजार करने के मूड में नहीं है और यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे जमीनी हकीकत को समझें और ठोस कदम उठाएं, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं अब गंभीर रूप ले चुकी हैं और यदि समय रहते इन्हें हल नहीं किया गया, तो यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती हैं।

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