काशीपुर। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के ऐतिहासिक शहर में चैती मेला परिसर स्थित मां बाल सुन्दरी गौशाला में अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की जिला शाखा इकाई के तत्वावधान में एक भव्य और विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैश्य समाज के वरिष्ठ और सम्मानित सदस्यों ने भाग लिया और गौ सेवा के माध्यम से न केवल आस्था का प्रदर्शन किया बल्कि समाज में भाईचारे और परंपरा की मिसाल पेश की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. रामदास अग्रवाल की जन्म जयंती को गौरवपूर्ण तरीके से मनाना था। स्व. रामदास अग्रवाल ने अपने 50 वर्षों के सामाजिक और राजनैतिक जीवन में वैश्य समुदाय को विश्व स्तर पर सशक्त और संगठित करने के लिए जो अद्वितीय कार्य किए, उन्हें आज भी लोग सम्मान और श्रद्धा के साथ याद करते हैं। इस अवसर पर उपस्थित वैश्य बंधुओं ने गौ सेवा के माध्यम से अपनी श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन किया और गौ माता को चारा, फल और गुड़ खिलाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया, जिससे पूरे कार्यक्रम का माहौल अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक बन गया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से भाजपा के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं वैश्य गौरव आशीष गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गौ सेवा सर्वोच्च धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य है। गौ सेवा न केवल धर्म का हिस्सा है, बल्कि यह मानव मन में करुणा, निस्वार्थ प्रेम और संवेदनशीलता की भावना को विकसित करने का अद्भुत माध्यम है। आशीष गुप्ता ने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया कि वे नियमित रूप से गौ सेवा में हिस्सा लें और गौ माता को भोजन कराकर जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करें। उनके अनुसार गौ सेवा के माध्यम से न केवल आध्यात्मिक आनंद मिलता है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और परंपराओं को भी मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में जहां समाज में आत्मकेंद्रितता बढ़ रही है, वहां गौ सेवा लोगों में समाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक चेतना को बनाए रखने का सर्वोच्च माध्यम बन चुकी है।
कार्यक्रम में वीर भूमि बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के एम.डी राजीव गुप्ता ने कहा कि गौ माता की सेवा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शांति और दिव्य आनंद प्राप्त करने का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने उपस्थित सभी सनातनों को गौ माता की सेवा और उसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया। राजीव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि समाज के प्रत्येक व्यक्ति ने गौ माता की सेवा और उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया, तो समाज में नैतिक मूल्यों और परंपरागत आस्थाओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गौ सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश देने और सामाजिक चेतना जगाने का कार्य भी करती है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित सभी वैश्य बंधुओं से अनुरोध किया कि वे अपने जीवन में नियमित रूप से गौ सेवा को शामिल करें और युवा पीढ़ी को इस पवित्र कार्य के लिए प्रेरित करें।
अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि गौ माता के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक महत्त्व रखते हैं, बल्कि वैश्य समाज में भाईचारा, संगठन और परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य भी करते हैं। मनोज अग्रवाल ने उपस्थित लोगों से कहा कि गौ माता की सेवा के माध्यम से समाज में एकता, संगठन और धार्मिक चेतना बनाए रखना आज की पीढ़ी की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वैश्य समाज इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से करता रहेगा, ताकि समाज में भाईचारा, नैतिक मूल्यों की मजबूती और पारंपरिक संस्कृति को निरंतर बनाए रखा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और समाज सेवा को जोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष सुरेश गोयल ने वैश्य समाज की एकजुटता और संगठन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित सभी बंधुओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। सुरेश गोयल ने यह भी कहा कि वैश्य समाज का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवता की भावना और नैतिक चेतना को जागृत किया जाता है। उन्होंने उपस्थित सभी वैश्य बंधुओं से आग्रह किया कि वे गौ सेवा, सामाजिक गतिविधियों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में निरंतर सक्रिय रहें। उनके अनुसार ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को प्रेरित करने और समाज में सकारात्मक संदेश देने का सर्वोत्तम माध्यम हैं।
कार्यक्रम में संरक्षक एस. पी. गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश उपाध्यक्ष कौशलेश गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष महेंद्र गुप्ता, लोहिया जिलामंत्री डा. संजीव गुप्ता, जिला कोषाध्यक्ष नवनीत कुमार विश्नोई, महानगर अध्यक्ष पीयूष अग्रवाल, नागलिया अग्रवाल सभा अध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल, ईश्वर चंद्र गुप्ता, बी.के. गुप्ता, मनोहर गुप्ता, राजीव अग्रवाल, अमित गुप्ता, जी. के. अग्रवाल, शरद गुप्ता, मयंक गोयल, अशोक कुमार गुप्ता, पंकज गुप्ता, अभिषेक गुप्ता और करन भारद्वाज सहित कई वैश्य बंधु उपस्थित रहे। सभी उपस्थित बंधुओं ने गौ सेवा में हिस्सा लिया और अपनी श्रद्धा भाव का प्रदर्शन किया। इस अवसर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ जोड़ना आज की पीढ़ी के लिए अनिवार्य है। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वैश्य बंधुओं ने गौशाला में मौजूद सभी गायों को चारा, फल और गुड़ खिलाया। इस दौरान माहौल में आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का संचार हुआ। प्रत्येक बंधु ने गौ माता के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की और यह संकल्प लिया कि वे गौ सेवा को निरंतर जारी रखेंगे। इस अवसर ने यह भी दिखाया कि गौ सेवा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, करुणा और भाईचारे को बढ़ाने का सर्वोत्तम माध्यम है।
आशीष गुप्ता ने गौ सेवा के महत्व को विस्तार से समझाया और कहा कि यह मनुष्य में निस्वार्थ प्रेम और संवेदनशीलता की भावना पैदा करती है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वे नियमित रूप से गौ सेवा और भोजन कराने में हिस्सा लें। उनके अनुसार यह न केवल आध्यात्मिक लाभ देती है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और पारंपरिक संस्कृति को भी जीवित रखती है। आशीष गुप्ता ने यह भी कहा कि गौ सेवा के माध्यम से युवा पीढ़ी में सामाजिक चेतना, धार्मिक आस्था और संगठन की भावना बढ़ती है, जो आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी बंधुओं से आग्रह किया कि वे इसे केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन का नियमित हिस्सा बनाएं।
राजीव गुप्ता ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गौ माता की सेवा समाज में नैतिकता और करुणा की भावना जागृत करने का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने सभी सनातनी समाज के सदस्यों से अनुरोध किया कि वे गौ माता की सुरक्षा और सेवा के लिए विशेष ध्यान दें। उनके अनुसार यदि समाज में हर व्यक्ति गौ माता की सेवा और सुरक्षा सुनिश्चित करे, तो समाज में भाईचारा, समृद्धि और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में सकारात्मक मूल्य बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मनोज अग्रवाल ने अपने विचार साझा करते हुए उपस्थित सभी वैश्य बंधुओं को यह संदेश दिया कि गौ माता के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ माता की सेवा और सम्मान केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति के मूल्यों को आगे बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। मनोज अग्रवाल ने कहा कि वैश्य समाज इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को निरंतर जीवित रखेगा और युवा पीढ़ी को इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने उपस्थित सभी बंधुओं से विशेष आग्रह किया कि वे अपने व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों से समाज में भाईचारा, एकता और संगठन बनाए रखने में योगदान दें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे वैश्य समाज को मजबूत और संगठित बनाए रखें, ताकि परंपराओं और धार्मिक मूल्यों का संरक्षण लगातार सुनिश्चित हो।
जिला अध्यक्ष सुरेश गोयल ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि इस प्रकार के आयोजन समाज में भाईचारे, संगठन और धार्मिक परंपराओं को मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्य समाज का उद्देश्य केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिकता और मानवता की भावना को भी बढ़ावा दिया जाता है। सुरेश गोयल ने उपस्थित सभी बंधुओं का धन्यवाद करते हुए उन्हें प्रेरित किया कि वे भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय भाग लें और समाज में एकता, संगठन और सामाजिक चेतना बनाए रखने में निरंतर योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि गौ माता की सेवा के साथ-साथ समाज में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना आज की पीढ़ी का सर्वोच्च कर्तव्य है। इस प्रकार के कार्यक्रम वैश्य समाज के संगठन और समाजिक चेतना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित संरक्षक और वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात पर जोर दे रहे थे कि गौ सेवा केवल धार्मिक और आध्यात्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिकता, करुणा और भाईचारे की भावना फैलाने का सबसे प्रभावशाली और मूल्यवान माध्यम भी है। उन्होंने उपस्थित सभी वैश्य बंधुओं को समझाया कि गौ माता की सेवा करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी भी जागृत होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के आयोजन समाज में युवाओं के भीतर धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सभी उपस्थित बंधु इस बात से सहमत हुए और मिलकर यह संकल्प लिया कि वैश्य समाज में ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ी धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के मूल्य आत्मसात कर सके और समुदाय में भाईचारा और एकजुटता हमेशा बनी रहे।
इस अवसर पर उपस्थित सभी वैश्य बंधुओं ने गौ माता की सेवा का उत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया। उन्होंने गौ माता को चारा, गुड़, फल और अन्य पोषण सामग्री प्रदान कर उनकी सेवा में पूरी निष्ठा दिखाई। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रत्येक वैश्य बंधु ने इस सेवा को केवल धार्मिक कर्तव्य के रूप में नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देने का माध्यम माना। इस अवसर पर उपस्थित लोग गौ माता के चारों ओर एकत्र होकर उनके प्रति अपने आस्था और प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने गौ सेवा के महत्व को समझते हुए यह संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से इस पवित्र सेवा में भाग लेंगे। इस तरह, वैश्य समाज ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धर्म, संस्कृति और समाज सेवा को एक साथ जोड़ना न केवल आवश्यक है बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है।
स्व. रामदास अग्रवाल की जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित यह विशेष कार्यक्रम न केवल वैश्य समाज की एकता और भाईचारे का प्रतीक साबित हुआ, बल्कि इसने समाज में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान की। स्व. रामदास अग्रवाल ने अपने जीवनकाल में वैश्य समाज को विश्व स्तर पर सशक्त और संगठित करने का जो कार्य किया, उसका स्मरण करते हुए बंधुओं ने उनकी शिक्षाओं और आदर्शों का अनुसरण किया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के वरिष्ठ व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया। उपस्थित सभी वैश्य बंधु और अतिथि सदस्य गौ सेवा, समाज सेवा और धार्मिक गतिविधियों में योगदान देते हुए एक सकारात्मक संदेश का प्रसार कर रहे थे। इस कार्यक्रम ने यह दिखाया कि समाज में धर्म, आस्था, संस्कृति और मानवता के मूल्यों को एक साथ बनाए रखना संभव है और इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
अंततः काशीपुर में मां बाल सुन्दरी गौशाला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन का यह भव्य आयोजन धर्म, आस्था, संस्कृति और समाज सेवा का एक अद्वितीय संगम साबित हुआ। इस अवसर ने वैश्य समाज के सदस्यों को न केवल एकजुट किया बल्कि समाज में भाईचारे, करुणा और गौ सेवा के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उपस्थित प्रत्येक बंधु ने अपने आप को समाज और गौ माता की सेवा के लिए समर्पित किया, और इस कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन और समाज के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और भी प्रभावशाली बनाया। इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में भाईचारा, संस्कृति और सामाजिक चेतना बनाए रखना भी वैश्य समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है।





