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शंकराचार्य अपमान प्रकरण पर उबाल कांग्रेस का मौनव्रत सरकार पर संकीर्ण सोच और जांच भटकाने के गंभीर आरोप

श्रीनगर की घटना से उठी राजनीतिक-धार्मिक हलचल के बीच गणेश गोदियाल ने संतों की आवाज़ दबाने, असहमति से डरने और अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच को लेकर सरकार की नीयत पर तीखे सवाल खड़े किए।

श्रीनगर। ज्योतिर्मठ पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अब उत्तराखंड की राजनीति में बड़े टकराव का रूप लेता दिख रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में मौनव्रत और प्रतीकात्मक विरोध का रास्ता अपनाया। इस दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह घटना केवल एक संत के अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता की उस मानसिकता को उजागर करती है जो असहमति की किसी भी आवाज़ को दबाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शंकराचार्य जी को स्नान जैसे धार्मिक कृत्य से रोका गया, वह न केवल धार्मिक आस्था पर चोट है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। गणेश गोदियाल के अनुसार, पूरे देश में इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना हो रही है और धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के मन में सरकार के प्रति गहरी नाराजगी और पीड़ा पैदा हुई है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इसी असंतोष को शांतिपूर्ण ढंग से प्रकट करने के लिए पार्टी ने मौनव्रत का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष समिति की ओर से यह निर्णय लिया गया है कि उत्तराखंड के सभी जिलों, विधानसभा क्षेत्रों और यहां तक कि विकासखंड स्तर तक लोग कुछ समय के लिए मौन रखकर विरोध दर्ज कराएं। गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि यह मौनव्रत मंदिरों के सामने और सार्वजनिक स्थलों पर रखा जाएगा, ताकि सरकार को यह संदेश जाए कि समाज इस तरह की संकीर्ण सोच को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना था कि सरकार को सद्बुद्धि देने के उद्देश्य से यह मौनव्रत रखा जा रहा है, ताकि भगवान सरकार को यह समझने की शक्ति दें कि धार्मिक और वैचारिक असहमति को दबाने से समाज में विभाजन और असंतोष ही बढ़ता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना को दुश्मनी के रूप में देखना खतरनाक प्रवृत्ति है।

गणेश गोदियाल ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि आज सत्ता में बैठे लोग यह मानने लगे हैं कि जो व्यक्ति उनकी भाषा में नहीं बोलता, वह उनका विरोधी है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति किसी भी पद पर क्यों न हो, चाहे वह धार्मिक स्थान पर विराजमान संत ही क्यों न हो, यदि वह सरकार के फैसलों पर सवाल उठाता है तो उसे विरोधी मान लिया जाता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि यही सोच श्रीनगर की घटना का कारण बनी। उनके अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी सरकार की नीतियों पर समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं और यही कारण है कि उन्हें निशाना बनाया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार आलोचना से डरने लगी है और इसलिए वह ऐसे लोगों की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है, जो समाज को दिशा दिखाने का काम करते हैं।

अपने बयान में गणेश गोदियाल ने यह भी याद दिलाया कि शंकराचार्य जी केवल एक राज्य या सरकार पर सवाल नहीं उठाते, बल्कि वे सभी सरकारों को सही और गलत के बीच फर्क समझाने का प्रयास करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के शंकराचार्य द्वारा केदारनाथ में सोने के कथित गायब होने का मुद्दा उठाया गया था, जो एक गंभीर सवाल था। ऐसे सवाल सत्ता को असहज करते हैं, लेकिन इनका उद्देश्य सरकार को सही रास्ता दिखाना होता है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि शंकराचार्य जी ने कई बार कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं पर भी टिप्पणी की है, लेकिन पार्टी ने कभी इसे व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है और उसे सहन करने की क्षमता ही किसी सरकार की परिपक्वता को दर्शाती है।

गणेश गोदियाल ने जोर देकर कहा कि सरकार हर बार शंकराचार्य जी की बातों को राजनीतिक विरोध के रूप में देखने लगती है और इसी वजह से उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि यह रवैया न तो धार्मिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही लोकतांत्रिक सिद्धांतों के। कांग्रेस नेता के अनुसार, सरकार की यह संकीर्ण सोच देश को कमजोर करती है, क्योंकि मजबूत राष्ट्र वही होता है जहां अलग-अलग विचारों को सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि संत, समाज सुधारक और बुद्धिजीवी खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगे, तो समाज में भय का माहौल बनेगा। इसी वजह से कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि सत्ता में बैठे लोगों के इन कृत्यों के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक विरोध किया जाएगा।

इस दौरान बातचीत में सरकार द्वारा हिंदू राष्ट्र की बात किए जाने पर भी सवाल उठे। इस पर गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य चाहे जो भी हो, लेकिन जिस तरह एक जगद्गुरु का अपमान किया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी केवल इसलिए रोके गए क्योंकि उनकी राय सरकार के अनुकूल नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य जी जहां सरकार की अच्छी बातों का समर्थन करते हैं, वहीं गलत नीतियों का विरोध भी करते हैं। यही संतों की परंपरागत भूमिका रही है। गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि इस तरह की असहिष्णुता बढ़ेगी, तो न तो राष्ट्र मजबूत बनेगा और न ही उसकी नैतिक आधारशिला सुदृढ़ होगी।

बातचीत के दौरान अंकिता भंडारी मामले को लेकर भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नौ जनवरी को मुख्यमंत्री ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति देने की बात कही थी, लेकिन पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी कोई स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आया है। गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस ने बार-बार सरकार से मांग की है कि वह वह कागज़ सार्वजनिक करे, जिससे यह विश्वास हो सके कि वास्तव में सीबीआई जांच की संस्तुति दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक सीबीआई की ओर से भी ऐसा कोई बयान नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट हो कि जांच एजेंसी को औपचारिक रूप से मामला सौंपा गया है।

गणेश गोदियाल ने पुराने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि जब पहले किसी मामले में सीबीआई जांच सौंपी गई थी, तो दो दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक हो गए थे और सीबीआई की ओर से भी पुष्टि आ गई थी। लेकिन अंकिता भंडारी प्रकरण में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार या तो इस जांच को भटकाने की कोशिश कर रही है या फिर सच्चाई सामने आने से डर रही है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार संभावित सवालों की जांच की बात कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि दोषी कौन था और उसके पीछे कौन लोग थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि काल्पनिक संभावनाओं की जांच से न्याय नहीं मिल सकता।

प्रदेश अध्यक्ष ने उधम सिंह नगर के शुभमन सिंह हत्या मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां पुलिस चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को दंडित किया गया, लेकिन मृतक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के नाम सामने आए, तब भी केवल प्राथमिक जांच की बात कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार और प्रशासन पर जनता का भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें प्रशासन पर पूर्ण विश्वास जताया गया था। कांग्रेस नेता ने दो टूक कहा कि न उन्हें मुख्यमंत्री पर भरोसा है और न ही भारतीय जनता पार्टी पर, क्योंकि प्रशासन भी सत्ता की भाषा बोलने लगा है।

अपनी बात को समाप्त करते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार की असली ताकत जनता होती है और जिस दिन जनता यह ताकत वापस ले लेगी, उस दिन सत्ता अपने आप खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस लगातार सरकार से सवाल पूछ रही है और पूछती रहेगी। उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल किसी एक घटना या मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की लड़ाई है। गणेश गोदियाल ने चेतावनी दी कि सरकार चाहे जितना प्रयास कर ले, सच्चाई को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता और दोषियों को देर-सबेर कानून के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ेगा।

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