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प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से काशीपुर में स्ट्रीट वेंडरों को मिला आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का नया संबल

वर्चुअल राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़े काशीपुर नगर निगम में महापौर और नगर आयुक्त की मौजूदगी में ऋण व क्रेडिट कार्ड पाकर दर्जनों रेहड़ी-पटरी व्यापारी मुख्यधारा की बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े और कारोबार विस्तार की राह पर आगे बढ़े।

काशीपुर। देशभर में छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी पर निर्भर परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना एक अहम साधन के रूप में उभर रही है। इसी क्रम में 23 जनवरी 2026 को एक बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तिरुवनंतपुरम से एक लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को ऋण और क्रेडिट कार्ड वितरण की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आया, जिनकी आजीविका छोटे-छोटे व्यापारों पर निर्भर है। इस ऐतिहासिक अवसर से देश के कई नगर निगम वर्चुअल माध्यम से जुड़े और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जनपद का काशीपुर नगर निगम भी इस राष्ट्रीय पहल का सक्रिय हिस्सा बना। डिजिटल माध्यम के जरिए जुड़े इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि केंद्र सरकार की योजनाएं अब सीधे जमीनी स्तर तक पहुंच रही हैं और छोटे व्यापारियों को मुख्यधारा की आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास लगातार तेज हो रहा है।

काशीपुर नगर निगम सभागार में इस अवसर पर विशेष आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता नगर के महापौर दीपक बाली ने की। कार्यक्रम में नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने योजना के क्रियान्वयन और उसके लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभागार में माहौल उत्साहपूर्ण था, जहां बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, सामुदायिक संगठनकर्ता और नगर निगम का स्टाफ मौजूद रहा। वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सभी ने ध्यानपूर्वक सुना, जिसमें उन्होंने स्ट्रीट वेंडरों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। काशीपुर में आयोजित इस कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक पहल के रूप में देखा गया, क्योंकि इससे उन लोगों को सीधा लाभ मिला जो वर्षों से सीमित संसाधनों के बीच अपना व्यापार चला रहे थे।

इस आयोजन में कुल 145 स्ट्रीट वेंडरों ने भागीदारी की, जो यह दर्शाता है कि योजना के प्रति लोगों में उत्सुकता और भरोसा दोनों मौजूद हैं। विभिन्न बैंकों के माध्यम से ऋण वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें कुल 76 वेंडरों को आर्थिक सहायता का लाभ मिला। यह आंकड़ा केवल संख्या भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे 76 परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की संभावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऋण वितरण को चरणबद्ध तरीके से किया गया, ताकि योजना का लाभ व्यवस्थित रूप से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। पहले चरण में 15 हजार रुपये के ऋण 34 वेंडरों को स्वीकृत किए गए, दूसरे चरण में 25 हजार रुपये के ऋण 24 लोगों को मिले और तीसरे चरण में 25 हजार रुपये के ऋण 18 वेंडरों को प्रदान किए गए। इस क्रमबद्ध व्यवस्था से यह साफ हुआ कि योजना को लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक सहयोग के रूप में तैयार किया गया है।

समारोह के दौरान लाभार्थियों के चेहरों पर संतोष और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। महापौर दीपक बाली और नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट ने स्वयं आगे बढ़कर वेंडरों को ऋण के चेक और क्रेडिट कार्ड सौंपे, जिससे कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ गया। यह केवल कागजी औपचारिकता नहीं थी, बल्कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष जुड़ाव भी था। स्ट्रीट वेंडरों ने इस अवसर पर बताया कि इस ऋण से वे अपने ठेले, फड़ या छोटे दुकानों को बेहतर ढंग से संचालित कर पाएंगे, नया सामान खरीद सकेंगे और अपने कारोबार को विस्तार दे सकेंगे। कई लाभार्थियों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्हें किसी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का मौका मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और आर्थिक समझ दोनों बढ़ी।

कार्यक्रम में नगर निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा और सिटी मिशन मैनेजर मोहम्मद जफर की उपस्थिति ने प्रशासनिक सहयोग को मजबूत किया। इनके साथ-साथ विभिन्न सामुदायिक संगठनकर्ता, ठेला फड़ एसोसिएशन के पदाधिकारी और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी मौजूद रहीं, जिन्होंने योजना के सफल क्रियान्वयन में अपनी भूमिका निभाई। यह सहभागिता दर्शाती है कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केवल सरकारी स्तर पर सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी शामिल है। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने वेंडरों को योजना से जुड़े नियमों, ऋण वापसी की प्रक्रिया और भविष्य में मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी, ताकि वे इस सहायता का सही उपयोग कर सकें।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को छोटे व्यापारियों के लिए एक मजबूत सहारा बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि स्ट्रीट वेंडरों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित भी करती है। पहले जहां छोटे व्यापारियों को साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब उन्हें बैंकों से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ-साथ सामाजिक सम्मान भी बढ़ रहा है। वक्ताओं का मानना था कि इस योजना के जरिए स्ट्रीट वेंडरों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित और स्थिर बन सकेगा। काशीपुर जैसे शहरों में इस तरह के कार्यक्रम स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा देने का काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल महामारी के बाद सबसे अधिक प्रभावित हुए वर्गों में से एक, स्ट्रीट वेंडरों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है। कार्यक्रम के दौरान यह बात बार-बार सामने आई कि छोटे व्यापारियों का सशक्तिकरण पूरे शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देता है। काशीपुर नगर निगम द्वारा इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना स्थानीय प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़कर यह साबित हुआ कि तकनीक का सही उपयोग करके योजनाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है। स्ट्रीट वेंडरों ने भी भरोसा जताया कि इस सहायता से वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का एक सशक्त उपकरण है। काशीपुर में आयोजित यह आयोजन भविष्य में और अधिक वेंडरों को योजना से जोड़ने की प्रेरणा बनेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सके। स्ट्रीट वेंडरों के लिए यह दिन लंबे समय तक यादगार रहेगा, क्योंकि इसने उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर एक ठोस कदम बढ़ाने का अवसर दिया। कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल सरकारी योजना की सफलता का उदाहरण बना, बल्कि छोटे व्यापारियों के उज्जवल भविष्य की उम्मीद भी जगाकर गया।

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