spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडसीएम धामी का बड़ा फैसला अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच से...

सीएम धामी का बड़ा फैसला अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच से फिर जगी न्याय की उम्मीद

पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए उत्तराखंड सरकार ने लंबी राजनीतिक उठा-पटक के बाद जांच सीबीआई को सौंपी, जिससे मामले से जुड़े हर छिपे पहलू के उजागर होने और निष्पक्ष न्याय की राह मजबूत हुई।

देहरादून। प्रदेश कि राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा और बहस का केंद्र बने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आखिरकार उत्तराखंड सरकार ने वह फैसला ले लिया है, जिसका इंतज़ार न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि पूरा प्रदेश कर रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने की संस्तुति प्रदान कर दी है। इस निर्णय के साथ ही एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इस दर्दनाक और संवेदनशील मामले से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल होगी और किसी भी स्तर पर यदि कोई तथ्य अब तक सामने नहीं आ पाया है तो वह भी जांच के दायरे में आएगा। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि यह निर्णय स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के मातादृपिता की भावनाओं और उनके अनुरोध का सम्मान करते हुए लिया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल और केवल न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी भी प्रकार के दबाव या राजनीतिक शोर में निर्णय लेना।

उत्तराखंड में बीते कुछ समय से अंकिता भंडारी मामले को लेकर सियासत तेज़ हो गई थी। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, हर जगह इस मुद्दे पर चर्चा हो रही थी। विपक्षी दल कांग्रेस, कई सामाजिक संगठन और आम लोग लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार 9 जनवरी को इस प्रकरण में बड़ा निर्णय लेते हुए सीबीआई जांच को हरी झंडी दे दी। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार ने शुरू से ही इस मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की है, लेकिन पीड़ित परिवार की भावनाओं और उनकी अपेक्षाओं को सर्वाेपरि रखते हुए अब जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपने की संस्तुति दी गई है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब प्रदेश में पिछले 15 से 20 दिनों से इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान चरम पर था और जगहदृजगह प्रदर्शन, धरना और रैलियां देखने को मिल रही थीं।

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कुछ दिन पहले अंकिता भंडारी के मातादृपिता की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान अंकिता के मातादृपिता ने स्पष्ट रूप से सीबीआई जांच की मांग रखी थी और यह भी कहा था कि उन्हें अब भी लगता है कि मामले के कुछ पहलू सामने नहीं आ पाए हैं। मुख्यमंत्री ने उस समय भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी। उसी आश्वासन के अनुरूप अब राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति दे दी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का कोई भी निर्णय भावनाओं और कानून दोनों के संतुलन के साथ लिया जाता है, ताकि न्याय की प्रक्रिया पर किसी प्रकार का सवाल न उठे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, हृदयविदारक और पूरे समाज को झकझोर देने वाली थी। जैसे ही इस घटना की जानकारी राज्य सरकार और प्रशासन को मिली, बिना किसी देरी के कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना, पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ मामले को आगे बढ़ाया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया, जिसकी कमान एक महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि जांच में संवेदनशीलता बनी रहे और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में कोई कमी न रह जाए।

जांच की प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने जिस तेजी और सख्ती से काम किया, उसका उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया। न केवल गिरफ्तारी की गई, बल्कि माननीय न्यायालय में ठोस और प्रभावी पैरवी भी सुनिश्चित की गई। इसी का परिणाम रहा कि ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। एसआईटी द्वारा गहन विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत में सुनवाई पूरी होने पर तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मुख्यमंत्री ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि राज्य सरकार ने शुरू से अंत तक न्याय सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और कानून को अपना काम करने दिया।

हाल के दिनों में इस मामले से जुड़ी कुछ ऑडियो क्लिप्स के सोशल मीडिया पर वायरल होने से एक बार फिर प्रदेश का माहौल गरमा गया था। इन ऑडियो क्लिप्स को लेकर तरहदृतरह के दावे किए गए और कई लोगों ने इसमें कथित तौर पर वीआईपी के नाम का जिक्र होने की बात कही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि इन ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलगदृअलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनकी जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह साफ है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई नया पहलू सामने आता है, तो उस पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रदेश में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाएं फैलाने और जनता की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की गई। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि जनता को सच्चाई से अवगत कराया जाए और पीड़ित पक्ष की भावनाओं का सम्मान किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में सबसे अधिक पीड़ित अंकिता भंडारी के मातादृपिता हैं और उनका पक्ष जानना तथा उनकी भावनाओं को समझना सरकार की प्राथमिकता रही है। इसी सोच के तहत उनसे मुलाकात की गई और उनकी मांग को गंभीरता से लिया गया। उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में लाने में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के वीडियो और ऑडियो क्लिप्स ने बड़ी भूमिका निभाई। खुद को बीजेपी से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर ने कई वीडियो और ऑडियो जारी किए थे, जिनमें कथित तौर पर वीआईपी के जिक्र की बात कही गई। इन वीडियो के सामने आने के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एकाएक तूल पकड़ लिया। प्रदेश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए, लोग सड़कों पर उतरे और यहां तक कि मुख्यमंत्री आवास तक कूच किया गया। इस दौरान राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता गया और सरकार पर सीबीआई जांच कराने का दबाव भी बढ़ता चला गया।

प्रदेश में मचे इस राजनीतिक घमासान के बीच 6 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वह जल्द ही अंकिता भंडारी के मातादृपिता से मुलाकात करेंगे और उनकी मंशा को जानेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि बातचीत के बाद तमाम कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए सरकार आगे की दिशा तय करेगी। प्रेस वार्ता के अगले ही दिन यानी 7 जनवरी को मुख्यमंत्री ने अंकिता के मातादृपिता से मुलाकात की। इस मुलाकात में पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच के साथदृसाथ कथित वीआईपी के नाम के खुलासे की भी मांग रखी थी। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आखिरकार 9 जनवरी को सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी गई।

यदि अंकिता भंडारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि पर नजर डाली जाए, तो यह मामला 18 सितंबर 2022 का है। पौड़ी जिले के श्रीकोट डोभ गांव की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितंबर की शाम वह अचानक लापता हो गई। शुरुआत में मामला राजस्व पुलिस के पास गया, लेकिन बाद में इसे रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। जांच के दौरान पुलिस को रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, उसके दोस्त अंकित गुप्ता और मैनेजर सौरभ भास्कर पर शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अंकिता की हत्या की बात कबूल की और बताया कि उन्होंने उसे चीला बैराज की नहर में धक्का दे दिया था।

आखिरकार 24 सितंबर 2022 को नहर से अंकिता भंडारी का शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। जगहदृजगह प्रदर्शन हुए और लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। लगातार चली जांच और सुनवाई के बाद निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। बावजूद इसके, समयदृसमय पर सामने आते नए दावों और सोशल मीडिया पर वायरल होती सामग्रियों के कारण यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। अब सीबीआई जांच की संस्तुति के साथ एक बार फिर यह उम्मीद जगी है कि इस पूरे प्रकरण की हर परत को खोला जाएगा और स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय दिलाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोहराया है कि बहनदृबेटियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!