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उर्वशी बाली ने काशीपुर में बच्चों के साथ हनुमान चालीसा संकल्प से नई आस्था जगाई

हिंदू वाहिनी संगठन के साथ उर्वशी दत्त बाली ने नववर्ष 2026 में प्रत्येक मंगलवार बच्चों और परिवारों के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का संकल्प लिया, जिससे संस्कार और आस्था की नई लहर शुरू हुई।

काशीपुर। नववर्ष 2026 की शुरुआत धर्म, आस्था और संस्कार के मार्ग पर करते हुए उर्वशी दत्त बाली ने हिंदू वाहिनी संगठन के साथ सनातन एकता के संकल्प की नई पहल की। इस कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि वर्ष 2026 में प्रत्येक मंगलवार, अपने बच्चों के साथ किसी न किसी मंदिर में उपस्थित होकर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। इस उद्देश्य से यह योजना बनाई गई है कि हर सप्ताह केवल 20 मिनट, संतान और माता-पिता दोनों के लिए प्रभु श्री हनुमान जी के चरणों में समय बिताने का एक पावन अवसर बन सके। इस संकल्प के माध्यम से परिवारों में धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कारों की नींव मजबूत करने के साथ ही बच्चों में आस्था और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने की दिशा में एक नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया जा रहा है।

उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि सनातन धर्म में अनगिनत देवी-देवता हैं और प्रतिदिन सभी के दर्शन करना संभव नहीं है। उन्होंने यह बताया कि मंगलवार का दिन विशेष रूप से हनुमान जी को समर्पित है और यही वह अवसर है जब परिवार अपने बच्चों के साथ केवल 20 मिनट प्रभु के चरणों में बैठकर भक्ति, आस्था और संस्कार का संकल्प ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह संकल्प केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। बच्चों को मोबाइल और डिजिटल उपकरणों से हटाकर मंदिर ले जाना, उन्हें प्राचीन कथाओं और भक्ति की सीख देना, उनके व्यक्तित्व और संस्कारों को मजबूत करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि माता-पिता का आचरण और परिवार की धार्मिक गतिविधियां बच्चों में संस्कार और जीवन मूल्यों की नींव डालती हैं।

काशीपुर में शनि मंदिर परिसर, निकट नागनाथ मंदिर में 6 जनवरी, मंगलवार को संकल्प की पहली शुरुआत हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उर्वशी दत्त बाली के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस कार्यक्रम में हिंदू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव आनंद तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष रुचिन शर्मा सहित संगठन के सदस्यों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक मंगलवार वे अपने बच्चों के साथ किसी न किसी मंदिर में उपस्थित रहेंगे और हनुमान जी के चरणों में अपने आस्था और भक्ति को समर्पित करेंगे। इस पहल ने स्थानीय समुदाय में एक नई ऊर्जा और उत्साह पैदा कर दिया और लोगों में इसे नियमित रूप से जारी रखने का दृढ़ संकल्प देखने को मिला।

हिंदू वाहिनी के इस आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी संकल्प से जुड़ते हुए अपने नाम दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि अगला मंगलवार उनका है और वे अपने बच्चों के साथ हनुमान जी के चरणों में उपस्थित रहकर यह श्रृंखला निरंतर बनाएंगे। इस संकल्प का उद्देश्य बच्चों को माता-पिता के माध्यम से धर्म और संस्कारों से जोड़ना है। उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि यदि बच्चा मोबाइल और टीवी छोड़कर माता-पिता के साथ मंदिर आता है, तो समझो कि संस्कार जीत गए। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कार केवल बातें करके नहीं, बल्कि जीवन में दिखाकर सिखाए जाते हैं। माता संस्कार देती है और पिता उन्हें जीवन में उतारने की क्षमता प्रदान करता है।

उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि यह कोई बड़ा आंदोलन नहीं है, बल्कि एक छोटा-सा लेकिन अत्यंत प्रभावशाली संकल्प है। उन्होंने कहा कि बच्चों को माता-पिता के साथ लेकर मंदिर लाना ही उनकी शिक्षा और संस्कारों की मजबूत नींव बनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिता का आचरण संस्कारों की रीढ़ है और जब बच्चे माता-पिता के साथ मंदिर आते हैं, तो धर्म मजबूरी नहीं, बल्कि जीवन का गर्व बन जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में माता-पिता दोनों कामकाजी हैं, फिर भी बच्चों को संस्कार देना उनकी समान जिम्मेदारी है। यह संकल्प इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के डिजिटल युग में बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में उलझे रहते हैं।

उर्वशी दत्त बाली ने आगे कहा कि बच्चों को असली हीरो की पहचान कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे सुपरपावर हीरो मोबाइल या टीवी में खोज रहे हैं, तो उन्हें हनुमान जी की कथाएँ सुनाना चाहिए। हनुमान जी की कहानियाँ उन्हें साहस, भक्ति और नैतिक मूल्यों के महत्व को समझाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह संकल्प न केवल बच्चों की धार्मिक समझ को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें जीवन में सही दिशा में मार्गदर्शन भी देगा। इस पहल के माध्यम से हिंदू वाहिनी ने सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारी के साथ नई पीढ़ी में संस्कार और आस्था की भावना जगाने का प्रयास किया है।

राष्ट्रीय महासचिव आनंद तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि यह संकल्प एक प्रेरणादायक पहल है, जो परिवारों में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की नींव को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा का पाठ बच्चों और माता-पिता के बीच एक पवित्र समय साझा करने का अवसर है। इस पहल से बच्चों में आस्था, नैतिकता और जीवन मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता पैदा होगी। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों, युवाओं और बच्चों से अपील की कि वे इस संकल्प में भाग लेकर सनातन धर्म की ज्योति को और अधिक उज्ज्वल करें और इसे निरंतर बनाए रखें।

प्रदेश अध्यक्ष रुचिन शर्मा ने कहा कि मंगलवार के केवल 20 मिनट बच्चों के भविष्य और संस्कारों के नाम हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कार बोलकर नहीं, दिखाकर सिखाए जाते हैं। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं। यह संकल्प इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों को धर्म और संस्कार के साथ जोड़ना आज का हमारा कर्तव्य है, ताकि वे भविष्य में अपनी संस्कृति और परंपरा को समझें और उसका पालन करें।

उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि संकल्प का उद्देश्य परिवारों को धार्मिक गतिविधियों में जोड़ना और बच्चों में आस्था का बीज बोना है। उन्होंने यह भी कहा कि हर मंगलवार, सर्दियों में शाम लगभग 5:30 बजे, अपने घर के निकट स्थित किसी भी मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। यह संकल्प न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि यह कोई कठिन नियम या दिखावा नहीं, बल्कि भक्ति, एकता और संस्कार की एक छोटी-सी लेकिन अत्यंत शक्तिशाली शुरुआत है।

हिंदू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव आनंद तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष रुचिन शर्मा ने कहा कि यह चैन अब टूटने नहीं दी जाएगी। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों, युवाओं और बच्चों से अपील की कि वे इस संकल्प में सहभागी बनें और इसे नियमित रूप से जारी रखें। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में संस्कार और नैतिक मूल्यों की नींव मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से परिवार और समाज में एकता, भक्ति और नैतिक शिक्षा का प्रसार होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संकल्प की इस पहल की सराहना की और इसे निरंतर बनाए रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों और माता-पिता के बीच विश्वास और आस्था का पुल बनाती है। बच्चों को धर्म और संस्कार से जोड़ने के इस प्रयास को स्थानीय समुदाय में व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि यह संकल्प आने वाले वर्षों में एक परंपरा के रूप में स्थापित होगा और बच्चों में नैतिकता और धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा।

इस अवसर पर उपस्थित सभी नेताओं, श्रद्धालुओं और संगठन के सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि प्रत्येक मंगलवार वे अपने बच्चों के साथ किसी भी मंदिर में उपस्थित रहेंगे और हनुमान जी की कृपा से इस श्रृंखला को निरंतर बनाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल बच्चों के लिए प्रेरक है, बल्कि पूरे समाज में भक्ति, संस्कार और एकता की भावना को बढ़ावा देती है। यह संकल्प नववर्ष 2026 की नई शुरुआत को आस्था और संस्कार के मार्ग पर अग्रसर करता है।

उर्वशी दत्त बाली ने अपने समापन संदेश में कहा कि आज यदि हम बच्चों को धर्म से नहीं जोड़ेंगे, तो कल हमें अपनी संस्कृति ढूँढनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि माता-पिता का मार्गदर्शन और परिवार की धार्मिक गतिविधियाँ बच्चों के संस्कारों की नींव बनाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल बच्चों में भक्ति, नैतिकता और जीवन मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे नियमित रूप से इस संकल्प में भाग लें और सनातन धर्म की ज्योति को उज्ज्वल बनाएं।

इस प्रकार उर्वशी दत्त बाली और हिंदू वाहिनी संगठन ने नववर्ष 2026 में एक नई आस्था, भक्ति और संस्कार की पहल की। मंगलवार के संकल्प ने बच्चों और परिवारों को धर्म और संस्कार के मार्ग पर जोड़ने का कार्य किया। इस पहल के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बच्चों के जीवन में समाहित करने का प्रयास किया गया। संगठन ने यह सुनिश्चित किया कि यह संकल्प आने वाले वर्षों में निरंतर जारी रहे और प्रत्येक परिवार इसे अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करे, जिससे बच्चों में संस्कार और आस्था का विकास हो सके।

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