काशीपुर। देवभूमि के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले काशीपुर की सबसे बड़ी और नासूर बन चुकी रामनगर रोड की समस्या का आखिरकार समाधान हो गया है। शहर के प्रथम नागरिक और नगर निगम के ऊर्जावान महापौर दीपक बाली ने अचानक एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता बुलाकर काशीपुर की जनता के लिए खुशियों की सौगात का ऐलान किया। पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मेयर ने बेहद आत्मविश्वास के साथ यह घोषणा की कि रामनगर रोड के सुधारीकरण के लिए 16 करोड़ 81 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत हो गया है। उन्होंने इस बड़ी उपलब्धि का पूरा श्रेय प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की त्वरित कार्यशैली और उनकी जन-संवेदनाओं को दिया। मेयर ने बताया कि महज चार दिन पहले उन्होंने इसी मुद्दे पर प्रेस वार्ता की थी और जनता को आश्वस्त किया था कि मानसून की पहली दस्तक से पहले इस मार्ग का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा, और आज उनकी वह प्रतिबद्धता फलीभूत होती दिखाई दे रही है।
रुके हुए विकास कार्यों को गति देने की इस कसरत में मेयर दीपक बाली ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि रामनगर रोड के 0 किलोमीटर से लेकर 24 किलोमीटर तक के हिस्से का कायाकल्प करने के लिए शासन स्तर से जीओ (GO) जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और केंद्र सरकार से लगातार किए गए पत्राचार के फलस्वरूप इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। मेयर ने जनता को हो रही असुविधा के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगते हुए कहा कि सरकारी प्रक्रियाओं में एस्टीमेट बनाने, लागत तय करने और विभागों के बीच समन्वय बैठाने में समय लगता है, लेकिन अब तमाम अड़चनें दूर हो चुकी हैं। आगामी 10 अप्रैल के आसपास पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और मई के दूसरे सप्ताह तक मशीनों की गड़गड़ाहट के साथ सड़क निर्माण का कार्य पूरी रफ्तार पकड़ लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्माण कार्य काशीपुर की जनता के उन कष्टकारी महीनों का अंत होगा जो उन्होंने धूल और गड्ढों के बीच बिताए हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने निर्माणाधीन फोरलेन के कार्यों और उसमें आ रही वन विभाग की बाधाओं पर सवाल दागे, तो दीपक बाली ने बड़े ही तार्किक ढंग से जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि फोरलेन एक दीर्घकालिक योजना है जिसकी प्रक्रिया अपने निर्धारित समय से चल रही है। पेड़ों के कटान और भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही प्रगति पर है और इसके लिए आवश्यक धनराशि भी उपभुक्त की जा चुकी है। हालांकि, फोरलेन के निर्माण में दो से ढाई साल का लंबा समय लग सकता है, इसलिए वर्तमान में मौजूद टू-लेन मार्ग को तत्काल चलने लायक बनाना अनिवार्य था। मेयर ने समझाया कि अगर वर्तमान सड़क को सुधारा नहीं जाता तो बरसात के दिनों में इस पर चलना नामुमकिन हो जाता। इसी दूरदर्शिता के तहत 16.81 करोड़ की लागत से इस 24 किलोमीटर के टुकड़े को नया जीवन दिया जा रहा है, ताकि फोरलेन बनने तक जनता को सुगम यातायात मिल सके और शहर की कनेक्टिविटी प्रभावित न हो।
शहर की एक और लंबित परियोजना, यानी रामनगर ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण में हो रही देरी पर भी मेयर ने अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने साफ किया कि इस प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा और वर्तमान विधायक निरंतर प्रयासरत हैं। रेलवे की कड़ी शर्तों और डिजाइन में बदलाव के कारण बजट में जो उतार-चढ़ाव आए हैं, उन पर विभाग और ठेकेदारों के बीच मंथन जारी है। दीपक बाली ने कहा कि यद्यपि वे व्यक्तिगत तौर पर रेलवे अधिकारियों की बैठकों में शामिल नहीं थे, लेकिन पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा के अनुभवों और उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2026 तक इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहर के विकास के लिए विधायक और महापौर एक ही टीम के रूप में काम कर रहे हैं और जनता के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रेलवे ब्रिज का निर्माण भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है और जल्द ही इसके टेंडर की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
प्रेस वार्ता में रोडवेज बस अड्डे की बदहाली और वहां यात्रियों को पीने के पानी तक न मिलने की गंभीर समस्या पर जब पत्रकारों ने मेयर को घेरा, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया। दीपक बाली ने माना कि आईएसबीटी के निर्माण की प्रक्रिया सूत मिल परिसर में चल रही है, लेकिन जब तक नया बस अड्डा तैयार नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि रोडवेज में पानी की किल्लत और यात्रियों को होने वाली अन्य परेशानियों का वे तत्काल संज्ञान ले रहे हैं और एक-दो दिन के भीतर ही संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर मौके पर सुधार सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि चैती मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए नगर निगम प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह स्वयं इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
शहर के सौंदर्यीकरण और ओवरब्रिज के नीचे खाली पड़ी जगहों के दुरुपयोग पर चर्चा करते हुए मेयर ने भविष्य की सुंदर तस्वीर पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरओबी के नीचे की खाली जगह को नशेड़ियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा, बल्कि वहां ग्रीनरी और एनवायरमेंट फ्रेंडली सौंदर्यीकरण किया जाएगा जिससे शहर की सुंदरता में चार चांद लग सकें। जहां तक फूड कोर्ट और बैडमिंटन कोर्ट की मांग का सवाल है, दीपक बाली ने बताया कि बैडमिंटन कोर्ट के लिए स्टेडियम के नवनिर्माण का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है, जबकि शहर में पांच वेंडिंग जोन चिन्हित किए गए हैं जिनमें से दो-तीन स्थानों पर आधुनिक फूड कोर्ट विकसित किए जाएंगे। उन्होंने रेलवे स्टेशन के पार्कों की बदहाली पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि वे जल्द ही रेलवे अधिकारियों से बात करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मेंटेनेंस के लिए आने वाले फंड का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, अन्यथा नगर निगम स्वयं कोई ठोस पहल करेगा।
अंत में, चैती मेले के आसपास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई बुलडोजर कार्रवाई और नगर निगम की ‘तय बाजारी’ रसीद को लेकर उत्पन्न विवाद पर मेयर ने स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया। उन्होंने बताया कि नगर निगम की रसीद की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है; 24 फुट तक की जगह के लिए ₹50, 48 फुट तक के लिए ₹75 और उससे अधिक के लिए ₹150 की पुरानी दरें ही लागू हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई ठेकेदार अवैध वसूली करेगा तो उसका ठेका उसी घंटे निरस्त कर दिया जाएगा। अतिक्रमण की कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अपनी आजीविका कमाने का पूरा हक है, लेकिन सड़कों को पूरी तरह घेर लेना भी उचित नहीं है। उन्होंने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि वे इस मामले में अधिकारियों से बात करेंगे कि रसीद होने के बावजूद कार्रवाई क्यों की गई। मेयर दीपक बाली ने संकल्प दोहराया कि काशीपुर का विकास उनकी पहली प्राथमिकता है और वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में शहर को आदर्श बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।





