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महाअधिवेशन में फूटा गुस्सा भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों पर सत्ता के खिलाफ आरपार का ऐलान

जनसरोकारों के नायकों ने कॉर्पोरेट माफियाओं और पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरा तथा दो जून के खुले सत्र में आंदोलनकारियों संग बनेगी सूबे को बचाने की महा रणनीति।

रामनगर। उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारे में उस समय एक बड़ी हलचल पैदा हो गई जब सूबे के पहाड़ी और मैदानी इलाकों से जुटे जनसरोकारों के नायकों ने सत्ता के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। अग्रवाल सभा भवन के भीतर उमड़े जनसैलाब और कार्यकर्ताओं के बुलंद नारों के बीच उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपा) के द्विवार्षिक महाअधिवेशन का बेहद धमाकेदार और जोश से भरा आगाज हुआ। इस महत्वपूर्ण राजनैतिक पड़ाव की शुरुआत करते हुए पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी ने मंच से हुंकार भरी और अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीधे तौर पर सत्ता में बैठी ताकतों को चुनौती दी। उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में देश और प्रदेश की मौजूदा कानून व्यवस्था, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक तानाशाही पर तीखे प्रहार किए। खचाखच भरे सभागार में मौजूद कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि साल 2009 में अपनी स्थापना के बाद से ही यह राजनैतिक दल उत्तराखंड की आम जनता की धड़कन बन चुका है। आज जब भी पहाड़ की वादियों से लेकर मैदान के गांवों तक किसी किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान या महिला का दमन होता है, तो उनकी ढाल बनकर सबसे पहले यही संगठन खड़ा नजर आता है।

केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी ने अपने संबोधन की धार को और तेज करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार की जनविरोधी नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज देश और सूबा दोनों ही एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं, जहां आम आदमी का जीना मुहाल हो चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि गलत और अदूरदर्शी फैसलों के चलते आज वैश्विक पटल पर भारत अलग-थलग पड़ने की कगार पर पहुंच गया है। आर्थिक मोर्चे पर देश की रीढ़ पूरी तरह से टूट चुकी है और व्यापार से लेकर रोजगार तक सब कुछ चौपट हो गया है। अपनी इन तमाम विफलताओं और नाकामियों को जनता की नजरों से छिपाने के लिए प्रधानमंत्री रोज नए बहाने ढूंढते हैं और अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने के लिए जनता को केवल उपदेश देने में मशगूल हैं। महंगाई और बेरोजगारी आज अपने इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसने हर परिवार का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।

युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह से घेरा। उन्होंने आक्रोशित लहजे में कहा कि आज युवाओं की मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है, हर दूसरी सरकारी नौकरी की परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है और इस महापाप की जिम्मेदारी लेने के लिए शासन में बैठा कोई भी नुमाइंदा तैयार नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने देश की संपत्ति को कौड़ियों के दाम बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई से खड़े किए गए सार्वजनिक उपक्रमों को सरकार अपने चुनिंदा पूंजीपति मित्रों को रेवड़ियों की तरह बांट रही है। आने वाला समय देश के लोकतंत्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और संघर्षपूर्ण होने वाला है क्योंकि मोदी सरकार ने देश की तमाम संवैधानिक संस्थाओं को अपने नियंत्रण में ले लिया है। चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाएं भी अब निष्पक्ष नहीं रह गई हैं, जिससे लोगों के मताधिकार पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।

राजनैतिक लाभ के लिए समाज में फैलाए जा रहे जहर पर बात करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी ने कहा कि आज सत्ता को बचाए रखने के लिए एक समुदाय को दूसरे समुदाय से लड़ाने की घिनौनी साजिशें रची जा रही हैं। ऐसे कठिन और नाजुक समय में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रत्येक निष्ठावान कार्यकर्ता की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरी मजबूती, वैचारिक शुद्धता और ईमानदारी के साथ मैदान में डटा रहे। कार्यकर्ताओं को जनता के हक में खड़े होकर अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व प्रदान करना होगा ताकि इस दमनकारी व्यवस्था को उखाड़ फेंका जा सके। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड पर्यटन पार्टी के धाकड़ प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने पिछले दो सालों की राजनैतिक गतिविधियों और सांगठनिक कार्यों की द्विवार्षिक रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने विस्तार से बताया कि बीते दो वर्षों के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी संगठन ने पिछले सम्मेलन में लिए गए तमाम संकल्पों और निर्णयों को अपने समर्पित सदस्यों और शुभचिंतकों के सहयोग से जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने का हरसंभव प्रयास किया है।

महासचिव द्वारा प्रस्तुत इस व्यापक रिपोर्ट पर सदन में मौजूद सभी प्रतिनिधियों ने गहराई से विचार-विमर्श किया और अंततः पूरी एकजुटता दिखाते हुए ध्वनिमत से इस वार्षिक रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके बाद मंच से बोलते हुए प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने सूबे की वर्तमान सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि प्रदेश की धामी सरकार ने शासनकाल में भ्रष्टाचार के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं और आज पूरा सरकारी तंत्र आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। उत्तराखंड का पूरा शासन और प्रशासनिक अमला इस समय जनता के प्रति जवाबदेह होने के बजाय पूरी तरह से कॉर्पोरेट माफियाओं के इशारों पर एक कठपुतली की तरह काम कर रहा है। सरकार की जनविरोधी नीतियों, उनके गलत फैसलों और कार्य करने के अलोकतांत्रिक तरीकों पर यदि कोई भी व्यक्ति अपनी असहमति जताता है या शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज करता है, तो सरकार उसके दमन पर उतारू हो जाती है।

असहमति की आवाज को दबाने की कोशिशों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा कि आज सरकार का विरोध करने वालों के साथ अपराधियों जैसा सलूक हो रहा है। चाहे वे विपक्ष के नेता हों, खुद सत्ता पक्ष के भीतर के ईमानदार लोग हों या फिर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया जगत से जुड़े साहसी पत्रकार हों, जो भी सच दिखाने की जुर्रत करता है, उसके साथ यह सरकार एक घोर दुश्मन की तरह बर्ताव करती है। उन्होंने उत्तराखंड की देवतुल्य जनता से पुरजोर अपील की कि अब समय आ गया है जब हमें अपनी आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना होगा और इस निरंकुश व जनविरोधी भाजपा सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता से बेदखल करना होगा। इस महाअधिवेशन के अगले सत्रों को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्सुकता है, जहां केंद्रीय पदाधिकारी, कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य और विभिन्न आनुषंगिक संगठनों के प्रमुख रणनीतिकार राज्य के विकास और संगठन की मजबूती को लेकर अपनी महत्वपूर्ण बातें सदन के सामने रखेंगे।

अग्रवाल सभा भवन में चल रहा यह गहन वैचारिक विमर्श और राजनैतिक मंथन अभी लगातार जारी है, जिसमें राज्य के बुनियादी सवालों पर रणनीति तैयार की जा रही है। इस महाअधिवेशन का अगला पड़ाव यानी कल दिनांक 2 जून का सत्र बेहद खास होने वाला है, जिसे पूरी तरह से खुला रखा गया है। इस खुले सत्र में उत्तराखंड के विभिन्न जल-जंगल-जमीन के जन आंदोलनों से जुड़े हुए क्रांतिकारी नेता, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य समविचारिक राजनैतिक पार्टियों से जुड़े प्रबुद्ध लोग शामिल होकर अपनी बात रखेंगे और राज्य को बचाने के लिए आगे की एक वृहद व ठोस रणनीति का खाका तैयार करेंगे। इस ऐतिहासिक और बेहद गरिमामयी सांगठनिक सम्मेलन को सफल बनाने में पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी नरेश नौडियाल, कुलदीप मधवाल, जे पी बडोनी और दिनेश उपाध्याय ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इनके साथ ही मंच पर आनन्दी वर्मा, नारायण राम, अमीनुर रहमान, भोपाल रावत और राजकुमार त्यागी ने भी शिरकत की।

इस विशाल राजनैतिक समागम में अपनी उपस्थिति से चार चांद लगाने वालों में वरिष्ठ नेता प्रकाश जोशी, मनमोहन अग्रवाल, लालमणि और आसिफ भी प्रमुख रूप से शामिल रहे। कुमाऊं मंडल के मुख्यालय अल्मोड़ा से विशेष रूप से पहुंचीं किरण आर्य अल्मोड़ा और रामनगर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहीं किरण आर्य रामनगर ने भी संगठन की मजबूती पर बल दिया। उत्तराखंड छात्र संगठन की तेजतर्रार नेत्री भारती पांडे ने युवाओं की आवाज को बुलंद किया, जबकि जन-जन के चहेते और प्रख्यात जन कवि बल्ली सिंह चीमा की रचनाओं ने कार्यकर्ताओं में गजब का जोश और नया उत्साह भर दिया। इसके साथ ही राज्य के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी सहित उत्तराखंड के कोने-कोने से, पहाड़ों के दुर्गम गांवों से और मैदानी इलाकों से आए सैकड़ों ऊर्जावान कार्यकर्ताओं और जनसरोकारों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों की भारी मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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